सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ द्वारा दिल्ली में चुनी हुई सरकार और उपराज्यपाल के बीच अधिकारों पर फैसला दिया जाने के महल 24 घंटे के भीतर ही दोबारा विवाद हुआ. इस पर चुप्पी तोड़ते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान किया जाना चाहिए.
बुधवार को सेवा विभाग के मंत्री मनीष सिसोदिया ने सेवा विभाग के सचिव को दिल्ली में अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग संबंधी नई व्यवस्था को लागू करने के आदेश दिए थे, जिसे सेवा विभाग के सचिव ने मानने से इंकार कर दिया. उन्होंने कहा कि गृह मंत्रालय के पुराने आदेश और दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को निरस्त किए बिना किसी नए आदेश को नहीं मानेंगे.
इस नए विवाद के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली सचिवालय में बयान दिया कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में एक बड़ी लकीर खींच दी है. इसके तहत जमीन, पब्लिक ऑर्डर और पुलिस को उपराज्यपाल और केंद्र के हवाले किया है. बाकी सभी मसलों में फैसला देने और लेने का अधिकार दिल्ली की चुनी हुई सरकार को दिया है.
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि हर संवैधानिक संस्थाओं और दिल्ली सरकार के सभी विभागों उपराज्यपाल और अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का सम्मान करते हुए उसका पालन करना चाहिए. गुरुवार को सचिवालय में दिल्ली विद्युत नियामक आयोग के नए चेयरमैन सत्येंद्र चौहान के शपथ ग्रहण समारोह के बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बयान दिया. दिल्ली सरकार के सूत्रों की मानें तो सरकार नए विवाद के बाद कानूनी विमर्श कर रही है जिसके बाद वह न्यायालय की अवमानना का केस लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा एक बार फिर खटखटा सकती है.