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'न भागने और ना गवाह को धमकाने का खतरा...', सत्येंद्र जैन की जमानत के लिए अधिवक्ता ने दिए तर्क  

आप नेता के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में उनकी जमानत याचिका पर बहस करते हुए कहा कि अगर सत्येंद्र जैन ने 2010 में मनी लॉन्ड्रिंग की साजिश रची थी तो उन्हें ज्योषित में नोबेल पुरस्कार मिलना चाहिए. न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी और न्यायमूर्ति पंकज मित्तल की पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनकर फैसला सुरक्षित रख लिया है.

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आप नेता सत्येंद्र जैन. (फाइल फोटो)
आप नेता सत्येंद्र जैन. (फाइल फोटो)

दिल्ली के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है. सत्येंद्र 2015 के एक मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा आरोपी बनाया गया है और इसी केस में वह 9 महीने से ज्यादा समय तक तिहाड़ जेल में बंद हैं.

बुधवार को जेल में बंद आप नेता के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में उनकी जमानत याचिका पर बहस करते हुए कहा कि अगर सत्येंद्र जैन ने 2010 में मनी लॉन्ड्रिंग की साजिश रची थी तो उन्हें ज्योषित में नोबेल पुरस्कार मिलना चाहिए.

न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी और न्यायमूर्ति पंकज मित्तल की पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू और वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी को सुनने के बाद सत्येन्द्र जैन की जमानत याचिका पर आदेश सुरक्षित रख लिया.
 

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'तो मिलना चाहिए नोबेल पुरस्कार'

आप नेता की ओर से पेश हुए वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, ईडी ने आरोप लगाया है कि सत्येन्द्र जैन ने 2010 में साजिश रची थी तो फिर उन्हें ज्योतिष के लिए नोबेल पुरस्कार या कोई विशेष पुरस्कार मिलना चाहिए, क्योंकि 2010 में ही उन्हें पता था कि भविष्य में एक पार्टी बनेगी. इसी पार्टी से वह राजनीति में प्रवेश करेगा, चुनाव जीतेंगे और मंत्री बनेंगे. फिर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करेंगे. वह चाहता है कि वह इतना सर्वज्ञ होता तो उसे इस तरह कष्ट नहीं झेलना पड़ता.

वहीं, एएसजी राजू ने अपनी दलीलों में मोटे तौर पर इस बात पर जोर दिया कि सत्येंद्र जैन इस मामले में कैसे शामिल थे और कहा, शेयर बहुत अधिक प्रीमियम पर जारी किए गए थे. बायबैक बहुत कम दर पर था. कंपनियों के नाम पर बाद में अंकुश और वैभव को हस्तांतरित कर दिया गया था. साथ ही सॉलिसिटर जनरल ने ट्रायल कोर्ट और हाई कोर्ट के संबंधित हिस्से पर भी प्रकाश डाला.

एडिशनल सॉलिसिटर जनरल की टिप्पणी का विरोध करते हुए आप नेता के वकील ने कहा कि मैं एक साल के लिए इन्कार्वट हूं. यह मामला 2017 में दर्ज किया गया था और मुझे पांच साल बाद गिरफ्तार किया गया था. वे जानते हैं कि आरोप पत्र में भी उनके पास शेयरहोल्डिंग पर मामला नहीं है. उनका पूरा आधार शेयरहोल्डिंग रहा है. बाद में उन्होंने निदेशक पद जोड़ा दिया, क्योंकि वे जानते हैं कि वे शेयरधारिता के आधार पर मामला नहीं बना सकते हैं.

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आयकर के मामले को मनी लॉन्ड्रिंग में बदल रही है एजेंसी
 
उन्होंने आगे कहा कि यह एक अजीब मामला है, जहां जांच एजेंसी आयकर मामले को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बदलने की कोशिश कर रही है. ईडी का 4 करोड़ रुपये और सीबीआई का 1 करोड़ रुपये होने का सवाल कहां है? यह एक अनोखा मामला है, क्योंकि इन चार लोगों ने स्वामित्व किया और ये कहा से उनका पैसा, उनके शेयर हैं. लेकिन इसे नजरअंदाज करते हुए, ईडी ने कहा कि सत्येंद्र जैन ने वास्तविक नियंत्रण का इस्तेमाल किया है. तब तो इस पर चलाया जाना चाहिए, आप ऐसे ही किसी आदमी को जेल में नहीं डाल सकते.

फिर कैसे सत्येंद्र जैन को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है

सिंघवी ने पीठ से कहा, जेपी मेहता के सीए के बयान में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि उन्हें कभी नकदी नहीं मिली. उन्होंने यह भी कहा कि सुनील कुमार जैन और वैभव जैन ने आवास प्रविष्टियों के लिए उनसे संपर्क किया था। शेयर और पैसे उनके पास जाते हैं. फिर इसका जिम्मेदार सत्येन्द्र जैन को कैसे ठहराया जा सकता है?

सत्येंद्र जैन ने पीठ से उन्हें जमानत देने का आग्रह करते हुए अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि उनके भागने का खतरा नहीं है और न ही गवाह के लिए कोई खतरा है और वह इतने लंबे समय से मेडिकल जमानत पर हैं.

सत्येन्द्र जैन ने 14 फरवरी, 2015 से 31 मई तक विभिन्न व्यक्तियों के नाम पर चल संपत्तियां अर्जित करने के आरोप में दर्ज की गई सीबीआई की शिकायत पर प्रवर्तन निदेशालय द्वारा जांच की जा रही मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जमानत के लिए शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया है.

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