दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आवास के बाहर गुरुवार को हजारों शिक्षक पैदल मार्च करते हुए पहुंचे और जमकर नारेबाजी करने लगे. इस दौरान उन्हें रोकने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल की तैनात रही, साथ ही वॉटर कैनन को भी लाया गया.
यह शिक्षक मुख्यमंत्री से अपने स्कूल न बंद करने की मांग को लेकर गुहार लगाने के लिए गए थे. दरअसल, दिल्ली सरकार ने 7 फरवरी को एक आदेश निकाला है कि दिल्ली के उन सभी स्कूलों को बंद कर दिया जाए, जिनकी मान्यता नहीं है. दिल्ली में इस तरह के तकरीबन 3 हजार स्कूल हैं, जिनमें 9 लाख के करीब बच्चे पढ़ते हैं. इन स्कूलों की वजह से 30 हजार शिक्षकों को रोजगार मिला हुआ है.
कहां जाएंगे 9 लाख छात्र?
प्रदर्शन करने आए शिक्षकों का कहना है कि अगर दिल्ली सरकार इन सभी स्कूलों को बंद करेगी तो इनमें पढ़ने वाले 9 लाख छात्र कहां जाएंगे. क्योंकि पहले से ही सरकारी स्कूलों में क्षमता से अधिक बच्चे पढ़ रहे हैं. शिक्षकों की कमी पहले से ही है ऐसे में 9 लाख नए बच्चों का बोझ सरकारी स्कूल उठा नहीं सकते. वहीं, दूसरी ओर इन बच्चों के परिवार के पास इतना पैसा नहीं है कि वह किसी महंगे स्कूल में बच्चों का दाखिला करा सकें.
स्कूल बंद किए गए तो दिल्ली ठप कर देंगे: एसोसिएशन
इस प्रदर्शन में हिस्सा ले रहे प्राइवेट स्कूलों की एसोसिएशन ने दिल्ली सरकार को धमकी देते हुए कहा कि अगर उनके स्कूलों को बंद किया गया तो पूरी दिल्ली को ठप कर दिया जाएगा. हर गली में ऐसे स्कूल हैं, इसलिए दिल्ली सरकार इतना बड़ा कदम न उठाए. हर गली से विरोध प्रदर्शन होगा और दिल्ली ठप हो जाएगी.