गुजरात के सूरत की सेशन कोर्ट ने राहुल गांधी को आपराधिक मानहानि के एक मामले में 2 साल जेल की सजा सुनाई. उनके वकील के मुताबिक अदालत से राहुल को जमानत भी मिल गई और सजा को 30 दिनों के लिए निलंबित कर दिया ताकि वे हाई कोर्ट में अपील कर सकें.
इस मुद्दे पर राहुल गांधी को अब बिहार डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव का समर्थन मिला है. तेजस्वी यादव ने राहुल के समर्थन में कहा है कि पीएम मोदी अब पूरी तरह से नर्वस हो चुके हैं. वे 2024 के लोकसभा चुनाव में हार की बात सोचकर डरे हुए हैं.
तेजस्वी ने आगे कहा कि विपक्ष की आवाज को दबाया जा रहा है. बीजेपी घबरा रही है, क्योंकि वह जमीन खो रही है. उन्होंने आगे कहा कि अब समय आ गया है कि कांग्रेस पार्टी सहित पूरा विपक्ष केंद्र सरकार के खिलाफ एकजुट हो जाए. तेजस्वी यादव ने कहा कि अगर वे 2024 में फिर से सत्ता में लौटते हैं तो बीजेपी नोटों पर गांधी की जगह मोदी की तस्वीर लगा देगी.
आईना दिखाने वाले पर एक्शन
उन्होंने आगे कहा कि जो सच बोलता है, आईना दिखाता है उसके खिलाफ साजिश होती है. षडयंत्र रचकर कार्रवाई करवाई जाती है. एकजुटता पर जोर देते हुए तेजस्वी ने कहा कि अब समय आ गया है कि कांग्रेस पार्टी सहित पूरा विपक्ष केंद्र सरकार के खिलाफ एकजुट हो जाए.
राहुल को क्यों मिली सजा?
राहुल गांधी ने कर्नाटक के कोलार में 13 अप्रैल 2019 को चुनावी रैली में कहा था कि नीरव मोदी, ललित मोदी, नरेंद्र मोदी का सरनेम कॉमन क्यों है? सभी चोरों का सरनेम मोदी क्यों होता है? राहुल के इस बयान को लेकर बीजेपी विधायक और पूर्व मंत्री पूर्णेश मोदी ने उनके खिलाफ आपराधिक मानहानि का केस दर्ज कराया था.
सुप्रीम कोर्ट ने दी थी हिदायत
सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता ने तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट में आरोपी राहुल गांधी ने लिखित माफी मांगी थी और उन्हें सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी थी कि भविष्य में ऐसी बातें दोबारा ना कहीं जाएं. अधिवक्ता ने यह भी तर्क दिया कि राहुल गांधी सांसद हैं और इस तरह का आचरण अच्छा नहीं है.
आचरण में नहीं आया कोई बदलाव
इस पर सेशन कोर्ट की तरफ से टिप्पणी की गई. कोर्ट ने कहा- हालांकि आरोपी को सुप्रीम कोर्ट ने सतर्क रहने की सलाह दी थी, लेकिन उनके आचरण में कोई बदलाव नहीं आया है. आरोपी खुद सांसद (संसद सदस्य) हैं और जनता को संबोधित करने का तरीका गंभीर है. इसका बहुत व्यापक प्रभाव है और अपराध में बहुत गंभीरता है. यदि अभियुक्त को कम दण्ड दिया जाता है तो इससे जनता में गलत संदेश भी जाता है और मानहानि का उद्देश्य प्राप्त नहीं होगा, इसलिए सभी तथ्यों पर विचार करते हुए दोषी को दो साल की सजा सुनाई जाती है.