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मास्क पहनने को दिल्ली वाले बनाएं जन-आंदोलन, जल्द खत्म होगी कोरोना की तीसरी लहर: केजरीवाल

प्रदूषण को लेकर सीएम केजरीवाल ने कहा कि पराली की वजह से इतना ज्यादा प्रदूषण बढ़ गया है. जनवरी से 15 अक्टूबर तक दिल्ली की हवा साफ रहती है. फिर इसके बाद आसपास के राज्यों में पराली जलती है तो दिल्ली में प्रदूषण आता है.

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सीएम केजरीवाल ने सभी से मास्क पहनने की अपील की (फाइल फोटो)
सीएम केजरीवाल ने सभी से मास्क पहनने की अपील की (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 'मास्क पहनने को बनाएं जन आंदोलन'
  • जल्द खत्म होगी कोरोना की तीसरी लहर- केजरीवाल
  • 'पराली की वजह से दिल्ली में होता है प्रदूषण'

कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने लोगों से मास्क पहनने को 'जन आंदोलन' बनाने की गुहार लगाई है. शुक्रवार सुबह एक सरकारी कार्यक्रम में पहुंचे सीएम केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली ने कोरोना का सामना सबसे कठिन परिस्थितियों में किया है. मार्च में इटली, फ्रांस, लंदन से बीमार इंडियन्स, फ्लाइट्स से दिल्ली पहुंचे थे. लगभग 32 हजार लोग दिल्ली के कोने कोने में फैल गए थे. दिल्ली में देशभर से लोग आते हैं. 23 जून को सबसे ज्यादा केस थे और आज तीसरी लहर आ गयी है. लेकिन मुझे उम्मीद है कि तीसरी लहर भी पिछली दो लहर की तरह जल्द ही खत्म हो जाएगी.

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सीएम ने आगे कहा, 'कोरोना पर काबू पाने के लिए जबतक दवाई नहीं आती मास्क ही दवाई है. कई लोग मास्क तो पहन रहे हैं लेकिन नाक के नीचे या गर्दन पर सरकार कर रखते हैं. समझता हूं कि सांस लेने में दिक्कत होती है लेकिन खुद को बचाने का कोई अन्य तरीका नहीं है. दिल्ली वालों से अपील करता हूं कि उन्हें मास्क पहनने को जन-आंदोलन बनाना होगा. 

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वहीं प्रदूषण को लेकर सीएम केजरीवाल ने कहा कि पराली की वजह से इतना ज्यादा प्रदूषण बढ़ गया है. उन्होंने कहा, "जनवरी से 15 अक्टूबर तक दिल्ली की हवा साफ रहती है. फिर इसके बाद आसपास के राज्यों में पराली जलती है तो दिल्ली में प्रदूषण आता है. पराली को खाद में बदलने की तकनीक भी पूसा इंस्टीट्यूट ने तैयार की है. अब पंजाब, उत्तरप्रदेश और हरियाणा सरकार के पास बहाना नहीं होगा." 

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सीएम केजरीवाल ने कहा कि अगर केमिकल चाहिए तो हमारी सरकार पूसा इंस्टीट्यूट के साथ मिलकर इन राज्यों को पहुंचाएगी. ये सरकारें मिलकर काम करें तो आखिरी साल होगा जब दिल्ली में पराली प्रदूषण आया है. अगले साल से पराली प्रदूषण आने का कोई मतलब ही नहीं है क्योंकि दिल्ली ने पराली को खाद में बदलना सिखा दिया है."

 

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