आरजेडी के पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन द्वारा तिहाड़ जेल में बंद करने और भरपेट भोजन न देने संबंधी याचिका पर जेल प्रशासन ने हाईकोर्ट में अपना जवाब दाखिल किया है. अदालत में जेल प्रशासन ने कोर्ट को बताया है कि शहाबुद्दीन को जेल नियमों के अनुसार ब्रेकफास्ट, लंच व डिनर दिया जाता है. उसे पर्याप्त भोजना दिया जा रहा है.
शहाबुद्दीन पर तकरीबन 45 आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें से तकरीबन 10 में वह दोषी करार दिया जा चुका है. जेल प्रशासन के अनुसार जेल में सभी मूलभूत सुविधाएं दी गयी हैं. अब शहाबुद्दीन को इस पर अपना पक्ष रखना है. हाइकोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 7 मई की तारीख तय की है.
शहाबुद्दीन ने याचिका में ये भी कहा कि मुझे पिछले 13 महीने से तिहाड़ जेल के ऐसे हिस्से में रखा गया है जहां रोशनी नहीं आती है और न ही पर्याप्त हवा है. मैं एकांत कारावास में बंद हूं. याची का दावा है कि जब से वो तिहाड़ जेल में शिफ्ट हुआ है तब से उसका वजन 15 किलो घट गया है. शहाबुद्दीन ने शंका जताई है अगर यही हालात रही तो वह गंभीर बीमारियों से ग्रस्त हो सकता है.
याचिका में शहाबुद्दीन ने अपील की है कि उन्हें एकांत कारावास से निकालकर आम कैदियों की तरह रखा जाए. सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 15 फरवरी को करीब 45 आपराधिक मामलों का सामना कर रहे मोहम्मद शहाबुद्दीन को बिहार के सीवान जेल से तिहाड़ जेल शिफ्ट करने का आदेश दिया था.
सुप्रीम कोर्ट से दो अलग-अलग घटनाओं में अपने तीन बेटे गंवा चुके चंद्रकेश्वर प्रसाद उर्फ चंदा बाबू और आशा रंजन ने याचिका दायर कर राजद नेता को तिहाड़ जेल में रखने का आग्रह किया था जिसके बाद शहाबुद्दीन को तिहाड़ शिफ्ट कर दिया गया था. कोर्ट में लगाई याचिका में शहाबुद्दीन ने गुहार लगाई है कि कोर्ट में उन्हें खुद जज के सामने पेश होकर अपनी बात कहने का मौका दिया जाए.