शोभायात्रा में हथियार और तमंचे की इजाजत क्या पुलिस ने दी थी? जहांगीरपुरी हिंसा पर ओवैसी ने उठाए ये सवाल
एआईएमआईएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने पूछा कि पुलिस ने क्या तलवारों और तमंचों का इजाजत दिया था. जो भी कानून को हाथ में ले, उस पर कार्रवाई होना चाहिए.
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एआईएमआईएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने दिल्ली हिंसा में पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए.
- नई दिल्ली,
- 18 अप्रैल 2022,
- (अपडेटेड 18 अप्रैल 2022, 8:02 PM IST)
स्टोरी हाइलाइट्स
- दिल्ली में हनुमान जयंती पर जहांगीरपुरी इलाके में हिंसा हुई थी
- हिंसा में कई पुलिसकर्मी जख्मी हुए, एक नागरिक भी घायल
राजधानी दिल्ली के जहांगीरपुरी इलाके में शनिवार को हिंसा मामले में राजनीति तेज हो गई है. एआईएमआईएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने घटना के लिए दिल्ली पुलिस और सरकार को जिम्मेदार ठहराया है. सोमवार को प्रेस वार्ता में ओवैसी ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए और आरोपी अंसार की खुलेआम वकालत की. ओवैसी ने कहा कि वीडियो में देखा जा सकता है कि अंसार तो वहां लोगों को समझा रहा था, इसके बावजूद उसे आरोपी बना दिया गया.
ओवैसी ने कहा, 'मेरा काम सच्चाई बताना है. मैंने संसद में दिल्ली के दंगों के बारे में कहा था. रांची के बारे में कांग्रेस से पूछिए. अगर आपने ये दिमाग बना लिया गया है कि मुसलमान ही जिम्मेदार हैं तो इंसाफ कभी नहीं हो सकता है. इंक्वायरी कराइये'.
ओवैसी ने सरकार से पूछे ये 10 सवाल...
- पुलिस ने क्या तलवारों और तमंचों के लिए परमीशन दिया था?
- अंसार को आरोपी बनाना गलत है. वह शांति बनाए रखने के लिए आया था. मौके पर लोगों को समझा रहा था.
- दिल्ली पुलिस की कार्रवाई एकतरफा है. दिल्ली हिंसा की जिम्मेदारी मोदी सरकार की है.
- शोभायात्रा में हथियार लहराए जा रहे थे. क्या तलवार लेकर घूमना गैर कानूनी नहीं रहा है?
- आज दिल्ली पुलिस के कमिश्नर ने खुद कहा कि जहांगीरपुरी में बिना अनुमति के जुलूस निकाला गया. सवाल ये है कि जब जुलूस निकाला जा रहा था. तब स्थानीय पुलिस कहां गई थी?
- मौके पर भड़काऊ नारे लगाए गए. सरकार चाहती तो हिंसा नहीं होती. सांप्रदायिक हिंसा तभी होती है, जब सरकार चाहती है.
- दिल्ली के CM अरविंद केजरीवाल ने पूरा आरोप मुसलमानों पर लगा दिया. उनको शर्म नहीं आती है इस तरह के बयान देने में कि मुसलमानों ने पत्थर फेंके.
- जब चुनाव आते हैं तब आप सबके वोट लेते हैं और जब ऐसे मामले सामने आते हैं तब आप अपना असली चेहरा दिखाते हैं.
- दिल्ली पुलिस हिंसा रोकने में नाकाम रही. सिर्फ एक समुदाय के लोग गिरफ्तार किए गए. नाकामी छुपाने के लिए पुलिस झूठ बोल रही. मुसलमानों के खिलाफ नारेबाजी की जा रही है.
- मस्जिद पर झंडा क्यों फहराया गया? इससे पहले दिन में 2 जुलूस पहले ही निकल चुके थे, यह तीसरा था जो हिंसक हो गया.
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