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दिल्ली: सस्ती बिजली पर फैसला टला, बीमार केजरीवाल ने नहीं बुलाई अफसरों की बैठक

दिल्ली में सस्ती बिजली पर आज कोई फैसला नहीं होगा. बुखार, खांसी और डायरिया की मार झेल रहे मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बिजली अधिकारियों की बैठक नहीं बुलाई है.

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अरविंद केजरीवाल
अरविंद केजरीवाल

दिल्ली में सस्ती बिजली पर आज कोई फैसला नहीं होगा. बुखार, खांसी और डायरिया की मार झेल रहे मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बिजली अधिकारियों की बैठक नहीं बुलाई है.

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अटकलें थीं कि केजरीवाल आज अपने घर पर ही बिजली अधिकारियों की बैठक ले सकते हें और मामले पर बड़ा फैसला भी आज ही आ सकता है. लेकिन अब इसकी उम्मीद नहीं है. गौरतलब है कि आम आदमी पार्टी की सरकार 52 घंटे में ही मुफ्त पानी का पहला वादा पूरा कर चुकी है.

 

क्या सब्सिडी ही है एकमात्र चारा?
 दिल्ली विद्युत नियामक आयोग (डीईआरसी) ने भी कहा है कि अब तक सरकार की ओर से उसे कोई प्रस्ताव नहीं मिला है. मौजूदा दरों की समीक्षा में तीन महीने तक का वक्त लग सकता है. सूत्रों की मानें तो डीईआरसी बिजली दरों में कटौती के पक्ष में नहीं है. ऐसे में अगर सरकार चाहे तो दिल्ली की जनता को भारी सब्सिडी दे सकती है.

सब्सिडी से सरकारी खजाने पर पड़ेगा भारी बोझ
सब्सिडी यानी जनता पर टैक्स की मार. एक अनुमान के मुताबिक, सरकार ने अगर बिजली की दर आधी कम कर दी तो सालाना 5000 करोड़ का बोझ खजाने पर बढ़ जाएगा. शायद यही वजह है कि अब केजरीवाल सरकार सिर्फ उन्हीं लोगों को बिजली बिल पर 50 फीसदी राहत देने पर विचार कर रही है जो हर महीने 400 यूनिट बिजली ही इस्तेमाल करते हैं.

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आसान नहीं होगा फैसला
गौरतलब है कि अपने घोषणापत्र में आम आदमी पार्टी ने बिजली के दाम 50 फीसदी घटाने का वादा किया था. लेकिन जानकारों की माने तो पानी की तरह सस्ती बिजली का तोहफा देना मुख्यमंत्री केजरीवाल के लिए आसान नहीं होगा. हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (एचईआरसी) के पूर्व चेयरमैन वी एस इलाहाबादी के मुताबिक, 'कमिशन बहुत सारी चीजों को ध्यान में रखकर टैरिफ का निर्धारण करती है और एक बार एक साल के लिए टैरिफ फिक्स तय की गई हों तो उसमें सरकार किसी भी तरह का हस्तक्षेप नहीं कर सकती. यह कानून के भी खिलाफ है और इस पर सुप्रीम कोर्ट भी फैसला दे चुका है.'

मुफ्त पानी का ऐलान कर चुकी है AAP सरकार
इससे पहले सोमवार को एक बेहद अहम फैसले में केजरीवाल सरकार ने दिल्ली के हर परिवार के लिए महीने में 20 हजार लीटर मुफ्त पानी का ऐलान किया. यानी रोजाना 666 लीटर पानी के इस्तेमाल पर दिल्ली वालों को एक पाई भी नहीं देनी होगी. जल बोर्ड के नए सीईओ विजय कुमार ने यह ऐलान किया.

यह सुविधा फिलहाल सिर्फ उन लोगों को मिलेगी जिनके घर में पानी का मीटर लगा हुआ है. इस पर विपक्ष की ओर से आलोचना भी शुरू हो गई है. पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के बेटे और कांग्रेस सांसद संदीप दीक्षित ने फैसले को आंकड़ों की बाजीगरी बताते हुए कहा कि इसका लाभ हर वर्ग के लोगों को नहीं मिलेगा.

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कांग्रेस बोली- 'घरों तक पहुंचाएं पानी'
सीलमपुर से कांग्रेस विधायक मतीन अहमद ने कहा है कि दिल्ली में सिर्फ 9 से 10 लाख घरों में ही मीटर, बाकी लोगों का क्या होगा. मतीन अहमद ने कहा कि केजरीवाल मुख्यमंत्री हैं, कुछ भी कर सकते हैं, लेकिन योजना को लागू कराना बड़ी चुनौती है. गौरतलब है कि एक चैनल के स्टिंग ऑपरेशन में मतीन अहमद कैमरे पर यह कहते हुए पाए गए थे कि उनकी पार्टी का AAP को समर्थन एक ड्रामे से ज्यादा कुछ नहीं है. उन्होंने कहा था, 'गालियां तो पड़ रही हैं, पर मजा बहुत आ रहा है.'

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