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7 प्वाइंट्स में समझें पाबंदियों के बाद क्यों हो रहे एसिड अटैक, गिरफ्तारी और नोटिस का नहीं है खौफ

एसिड हमलों के बाद आरोपियों की गिरफ्तारी और बेचने वाले को नोटिस देने से क्या पुलिस की जवाबदेही खत्म हो जाती है. क्या इस तरह से एसिड हमलों को रोका जा सकता है. इस खबर में जानिए क्यों नहीं थमते हैं एसिड हमलों के केस, कितने आरोपियों को होती है सजा, कितनी हो सकती है सजा और कितना खतरनाक है एसिड.

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सिरफिरे आशिकों ने 'तेजाब' को हथियार बना लिया है. दिल्ली में बुधवार एसिड अटैक का मामला सामने आने के बाद एक बार फिर से कई सवाल खड़े हो रहे हैं. द्वारका में दोस्ती टूटने पर न केवल तेजाब से हमला हुआ, बल्कि पुलिस को भटकाने के लिए अलग थ्योरी भी गढ़ी गई. 

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वहीं, एसिड अटैक का शिकार हुई लड़की जिंदगी के लिए सफदरजंग अस्पताल में जंग लड़ रही है. एक्शन के नाम पर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है. साथ ही एसिड बेचने के लिए फ्लिपकार्ट को नोटिस भेजा गया है. 

मगर, सवाल ये है कि तमाम पाबंदियों के बाद भी ऐसे घटनाएं क्यों नहीं रूक रही हैं? शिकार होती लड़कियों पर क्या गुजरेगी? Aajtak.in की इस एक्सक्लूसिव खबर में 7 प्वाइंट में जानिए कहां और कितने में मिल रहा है एसिड, कितना नुकसान करता है, त्वचा की कौन सी परत जलाता है, सरकार ने क्या गाइडलाइंस जारी की हैं, कितने आरोपियों को होती ऐसा मामलों में सजा और ऑनलाइन कंपनियों का इस पर क्या है जवाब… 

1. ऑनलाइन 194 रुपए में बिकता है जानलेवा तेजाब 

दिल्ली में हुई दिल दहला देने वाले एसिड अटैक की घटना के बाद पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. पूछताछ और तकनीकी साक्ष्य के आधार पर पता चला है कि आरोपी ने फ्लिपकार्ट से तेजाब खरीदा था. मामले में आगे की जांच की जा रही है. ऑनलाइन के इस डिजिटल युग में हर काम आपके फिंगर टिप पे होता है, उसका साइड इफेक्ट भी साथ जुड़ा है.

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ऑनलाइन कॉमर्शियल साइट पर जानलेवा तेजाब 100 रुपए से भी कम खर्च में मिल जाएगा. जैसे के अगर आप किसी ऑनलाइन पोर्टल पर जाएं, तो असनी से आपको हर रेंज की एसिड की बोतल मिल जाएगी. कुछ मशहूर वेब पोर्टल पर एसिड की आधा लीटर की बोतल 190-210 रुपए में असानी से मिल जाती है.

2. वॉशरूम क्लीनिंग एसिड से कितनी होती है इंजरी?

एसिड की एंटेंसिटी पर यह डिपेंड करता है कि वह त्वचा को कितना नुकसान पहुंचाएगा.

मणिपाल हॉस्पिटल गाजियाबाद के सीनियर डॉक्टर भावुक मित्तल ने बताया, "तेजाबी हमले में सिर्फ चेहरा ही नहीं झुलसता, बल्कि जान भी जा सकती है". कोई भी एसिड का त्वचा को किस स्तर तक इंजर्ड कर सकता है, यह उसकी इंटेंसिटी पर निर्भर करता है. वह एसिड क्या है, कौन सा है उसकी स्ट्रैंथ क्या है. इसके बावजूद बाजार में हर तरह का एसिड आसानी से मिल जाता है.   

3. एसिड फेंकने से त्वचा की कौन सी परत जलती है?

डॉक्टर भावुक मित्तल ने बताया, "सुपरफिशियल होने पर एसिड केवल एपिडर्मिस तक जाता है. ज्यादा इंटेंसिटी होने पर डीप मसल टिशू तक चला जाता है." वहीं, टॉयलेट में इस्तेमाल किया जाने वाला तेजाब भले ही सस्ता मिलता हो, लेकिन शरीर के अधिकतर हिस्से पर पड़ जाए, तो स्किन को अंदर तक जलाने का काम करता है.  

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एसोसिएशन ऑफ सर्जन्स ऑफ इंडिया (Association of Surgeons of India) दिल्ली स्टेट के प्रेसिडेंट डॉक्टर एसके पोद्दार (Doctor SK Poddar) ने बताया, "टॉयलेट में इस्तेमाल होने वाले एसिड के अटैक में अगर शरीर 85 फीसदी से ज्यादा जल जाता है, तो जान भी जा सकती है. किसी भी वाइटल एरिया में अटैक होने के बाद जान जाने का खतरा बना रहता है."

4. नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार 5-6 फीसदी आरोपियों को हुई सजा 

NCRB के आंकड़े साफ गवाही दे रहे हैं कि सजा नहीं होने से आरोपियों में खौफ ही नहीं है.

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (National crime record bureau) के मुताबिक, साल 2014 में एसिड अटैक के 203 मामले सामने आए थे. इसमें से सिर्फ 11 को ही सजा हुई. यानी 5.4 फीसदी आरोपियों को सजा हुई, जबकि 94.6 फीसदी आरोपी बच निकले. 

इसी तरह साल 2015 में एसिड अटैक के 222 मामले सामने आए थे. इसमें से सिर्फ 14 को ही सजा हुई. यानी 6.3 फीसदी आरोपियों को ही पुलिस सजा दिला पाई और 92.7 फीसदी आरोपी बच निकले. लिहाजा, शत प्रतिशत मामलों में सजा नहीं होने की वजह से लोगों में खौफ नहीं हैं. सुप्रीम कोर्ट की वकील रीना एन सिंह ने बताया कि एसिड फेंकने पर आईपीसी की धारा 326ए के तहत मुकदमा दर्ज किया जाता है. इसमें उम्र कैद तक की सजा का प्रावधान है. 

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इसके बावजूद अपराधी बच जाते हैं क्योंकि, "महिलाओं के विरुद्ध होने वाले ऐसे मामलों में एफआईआर दर्ज करने में पुलिस आनाकानी करती है. एविडेंस ठीक समय पर न जुटाने के कारण कई पीड़ितों का पक्ष अदालत में जाकर बहुत कमजोर पड़ जाता है. लिहाजा, तेजाब हमले के अपराधी बच निकलते हैं." 

5. वॉशरूम एसिड और बाकी एसिड में क्या है डिफरेंस?

केमिकल के जानकार एके वर्मा ने बताया, “एसिड आम तौर पर सल्फ्यूरिक एसिड (Sulfuric Acid) नाइट्रिक एसिड (Nitric Acid) और (Hydrochloric Acid) से मिलकर बना होता है। हाइड्रो क्लोरिक एसिड कंसंट्रेटेड  गैस बनती है. लिहाजा, इसका इस्तेमाल टॉयलेट क्लीनर के तौर पर नहीं होता. 

ज्यादातर एसिड सल्फ्यूरिक और नाइट्रिक एसिड से मिलकर बना होते हैं. इन्हें पानी डालकर जितना चाहे डाइल्यूट कर सकते हैं और बिना पानी डालकर कंसंट्रेटेड बना सकते हैं. टॉयलेट में लो इंटेंसिटी वाला एसिड यूज होता है. इसके बावजूद इसका भी इस्तेमाल कई मामलों में अटैक के लिए किया गया. 

6. सरकार ने एसिड सेल्स को लेकर बनाई हैं गाइडलाइंस

सर्वोच्च न्यायालय ने 'लक्ष्मी बनाम भारत संघ एवं अन्य' के मामले में भारत में एसिड हमलों को रोकने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को कई निर्देश दिए हैं. इनमें एसिड की बिक्री को विनियमित करने की बात कही गई है. इस संबंध में दिल्ली सरकार ने दिल्ली में एसिड की बिक्री को विनियमित करने के लिए एक आदेश पारित किया था, जो कि किसी भी क्षेत्र के एसडीएम को आदेश के उल्लंघन के लिए 50,000 रुपए तक का जुर्माना लगाने का अधिकार देता है. खुले में एसिड बेचने पर पूर्ण प्रतिबंध है. बावजूद इसके ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर खुलेआम इसे बेचा जाना चौंकाता है.

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7. दिल्ली एसिड अटैक में ये है फ्लिपकार्ट का जवाब

एसिड अटैक रोकने के लिए कंपनियां भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं करती हैं. इस मामले में ऑनलाइन शॉपिंग साइट फ्लिपकार्ट ने जवाब दिया, "हम इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना की कड़ी निंदा करते हैं. हमारी संवेदनाएं और प्रार्थनाएं पीड़िता और उसके परिवार के साथ हैं. फ्लिपकार्ट मार्केटप्लेस प्लेटफॉर्म उन उत्पादों की बारीकी से निगरानी करता है और उन्हें हटाता है, जो अपेक्षित मानकों का उल्लंघन करते हैं." 

कंपनी ने आगे कहा, "ऐसे विक्रेताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाती है जो अवैध, असुरक्षित और प्रतिबंधित उत्पादों को बेचने में लगे हुए पाए जाते हैं. संबंधित विक्रेता को काली सूची में डाल दिया गया है. हम मामले की जांच में संबंधित अधिकारियों को हर संभव सहायता प्रदान कर रहे हैं."

कम क्यों नहीं हो रहे एसिड अटैक के मामले?

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