गुजरात के गीर के जंगल में शेरों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. यहां पर शेरों की मौत का आंकड़ा 13 तक पहुंच गया है. 12 से 19 सितंबर के बीच 11 शेरों की मौत हुई थी, जिसके बाद अब दो और शेरों की मौत हो गई है.
शेरों की ये मौत भी अमरेली रेंज के दलखनिया में ही हुई है. वन विभाग के मुताबिक मरने वाले एक शेर की उम्र 3 से 4 साल के बीच है, जो लंबे वक्त से बीमार चल रहा था. इससे पहले कि वन विभाग उसका इलाज करा पाता उसकी मौत हो गई.
शेर के गले से वन विभाग को केलर आड़ी चीप मिली है, जो वन विभाग के जरिए शेर को ट्रेक करने के लिए लगाई जाती है. वहीं शेर के एक 6 महीने के बच्चे को रेस्क्यू कराकर जसाधर एनिमल सेंटर ले जाया गया था.
शेर का बच्चा काफी बीमार था, इलाज के दौरान ही उसकी मौत हो गई. गौरतलब है कि वन विभाग बार-बार ये दावा कर रहा है कि 64 अलग-अलग टीम बनाकर वो गीर में शेर पर निगरानी रख रहे हैं. लेकिन शेरों की इतने कम वक्त में अमरेली रेंज के दलखानिया में हुई मौत ने कई सवाल खड़े किए हैं.
हालांकि सरकार की ओर से ये दावा किया जा रहा है कि शेरों की मौत किसी बीमारी से नहीं बल्की वर्चस्व की लड़ाई को लेकर हुई है. हालांकि शुरूआती जांच में डॉक्टर ने शेर की मौत के लिए लंग्स और लिवर के खराब होने की वजह बताई थी. तो फिर अचानक ये रिपोर्ट बदल कैसे गई.
सवाल तो ये भी खड़ा हो रहा है कि अगर शेर बीमारी से नहीं मरे हैं तो वन विभाग जंगल और आसपास के दूसरे जानवरों में वैक्सीनेशन क्यों शुरू कर रहा है.