बंबई उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश एच सुरेश ने कैग तथा जांच आयोगों जैसी संवैधानिक एवं वैधानिक संस्थाओं को और अधिक अधिकार दिये जाने की वकालत की है.
न्यायमूर्ति सुरेश ने मीडियाकर्मियों से कहा, ‘कैग और आयोगों जैसी वैधानिक संस्थाओं को सिफारिशें करने के अलावा और अधिक अधिकार होने चाहिए. उनकी सिफारिशें सरकार के लिए बाध्यकारी होनी चाहिए और इन संस्थाओं को गलती के लिए जिम्मेदार सरकारों या इसके विभागों पर कार्रवाई करने का अधिकार भी होना चाहिए.’
पीयूसीएल, गुजरात की ओर से पुस्तक ‘गुजरात कैग रिपोर्ट: ए पब्लिक हियरिंग ऑफ डिस्कशन’ के विमोचन के मौके पर यहां एक समारोह में सुरेश ने कहा, ‘जिस तरह से सरकारें पिछले कई साल से कैग की रिपोर्ट के साथ रवैया अपना रहीं हैं इससे संवैधानिक और वैधानिक इकाइयों को और अधिक शक्ति देना जरूरी हो गया है.’
इस पुस्तक में राज्य के कैग की रिपोर्ट पर जून महीने में हुई जनसुनवाई के दौरान आये 150 से अधिक सुझावों और विचारों को शामिल किया गया है.
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि किसी भी राज्य या केंद्र सरकार द्वारा गठित आयोगों को तय समयसीमा के अंदर रिपोर्ट देनी चाहिए.