गुजरात के स्थानीय निकाय चुनाव का औपचारिक ऐलान हो गया है. प्रदेश में 21 फरवरी और 28 फरवरी को दो चरणों में चुनाव होने हैं. कांग्रेस पार्टी ने अपने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है जबकि बीजेपी चुनाव को लेकर कमर कस चुकी है. वहीं, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी भी दस्तक देने जा रहे हैं. गुजरात निकाय चुनाव अभियान की शुरुआत ओवैसी कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे अहमद पटेल के गृहक्षेत्र भरूच जिले से करने जा रहे हैं.
हैदराबाद के सांसद और AIMIM के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी सात फरवरी को यानि रविवार को मुस्लिम बहुल भरूच जिले से गुजरात निकाय चुनाव अभियान का आगाज करेंगे. ओवैसी के साथ भारतीय ट्राइबल पार्टी (बीटीपी) के मुखिया छोटू वसावा भी मंच शेयर करेंगे. निकाय चुनाव के लिए ओवैसी और वसावा की पार्टी ने गठबंधन किया है. इस तरह से उन्होंने मुस्लिम और आदिवासी समुदाय का समीकरण बनाने की कवायद की है.
बता दें कि गुजरात में करीब 10 फीसदी मुस्लिम आबादी है, जो अहमदाबाद, पंचमहल, खेड़ा, आणंद, भरूच, नवसारी, साबरकांठा, जामनगर और जूनागढ़ के इलाके की सीटों पर प्रभाव रखते हैं. राज्य में सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी भरूच जिले में है. मौजूदा समय में भरूच में करीब 25 फीसदी मुस्लिम मतदाता हैं, जो चुनावी लिहाज से काफी अहम हैं. कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे अहमद पटेल का यह गृह क्षेत्र है.
अहमद पटेल की जन्मभूमि भरूच
गुजरात के भरूच जिले के अंकलेश्वर गांव में अहमद पटेल का जन्म हुआ था. इसीलिए उन्होंने अपनी राजनीतिक पारी का आगाज भी अपने जन्मभूमि भरूच किया था. अहमद पटेल 26 साल की उम्र में पहली बार 1977 में सांसद बने और फिर 1982 और 1984 में भरूच सीट से जीत दर्ज की थी. अहमद पटेल के बाद कोई दूसरा मुस्लिम सांसद आजतक गुजरात से नहीं जीत सका है.
अहमद पटेल का पिछले साल 25 नवंबर को कोरोना संक्रमण के चलते निधन हो गया है. माना जाता है कि अहमद पटेल के चलते ही असदुद्दीन ओवैसी ने गुजरात की सियासत से खुद को दूर रखा था. हालांकि, अब अहमट पटेल नहीं हैं तो सूबे में पूरा सियासी मैदान खाली नजर आ रहा है. ऐसे में ओवैसी गुजरात निकाय चुनाव में अपने सियासी आधार को बढ़ाने के लिए अहमद पटेल की जन्मभूमि और कर्मभूमि भरूच जिले से चुनाव अभियान शुरू करने जा रहे हैं. ऐसे में देखना है कि ओवैसी गुजरात में मुस्लिम समुदाय का दिल कितना जीत पाते हैं?