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अयोध्या के महायज्ञ के बीच सोमनाथ मंदिर के 73 साल पुराने न्योते पर सियासी लड़ाई... नेहरू पर क्यों भिड़े कांग्रेस-BJP?

कांग्रेस नेताओं ने बुधवार को एक बयान में कहा कि वो 22 जनवरी को अयोध्या में भगवान राम की मूर्ति के 'प्राण प्रतिष्ठा' समारोह और राम मंदिर के उद्घाटन में शामिल नहीं होंगे. कांग्रेस को राम मंदिर ट्रस्ट की तरफ से न्योता दिया गया था, लेकिन न्योते को अस्वीकार किए जाने से सियासत गरमा गई. बीजेपी ने सोमनाथ मंदिर कनेक्शन निकाला और कांग्रेस पर हमला बोल दिया.

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कांग्रेस ने पंडित जवाहरलाल नेहरू के 11 मार्च 1951 को तत्कालीन गृहमंत्री सी राजगोपालाचारी को लिखे गए पत्र को साझा किया.
कांग्रेस ने पंडित जवाहरलाल नेहरू के 11 मार्च 1951 को तत्कालीन गृहमंत्री सी राजगोपालाचारी को लिखे गए पत्र को साझा किया.

अयोध्या में 22 जनवरी को नए राम मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम है. कांग्रेस ने इस न्योते को ठुकरा दिया है. कांग्रेस ने अपने बयान में कहा, पार्टी नेता राम मंदिर उद्घाटन समारोह में शामिल नहीं होंगे. इस पर बीजेपी नेताओं ने कांग्रेस पर हमला किया और सोमनाथ मंदिर पर जवाहरलाल नेहरू के रुख का जिक्र किया. 1951 में सोमनाथ मंदिर के उद्घाटन से नेहरू के कनेक्शन पर दोनों पार्टियों के नेताओं ने वार-पलटवार किया है.

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दरअसल, बुधवार को कांग्रेस ने एक बयान जारी किया और बताया कि पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी और अधीर रंजन को 22 जनवरी को राम मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम में शामिल होने का न्योता मिला था. चूंकि यह बीजेपी और आरएसएस का इवेंट है और चुनावी लाभ के लिए अधूरे मंदिर का उद्घाटन किया जा रहा है. इसलिए कांग्रेस पार्टी न्योते को ससम्मान अस्वीकार करती है. कांग्रेस का कहना है कि हमारे देश में लाखों लोग भगवान राम की पूजा करते हैं. धर्म एक निजी मामला है. लेकिन आरएसएस / बीजेपी ने लंबे समय से अयोध्या में मंदिर को राजनीतिक प्रोजेक्ट बनाया है. अधूरे मंदिर का उद्घाटन स्पष्ट रूप से चुनावी लाभ के लिए किया जा रहा है. आरएसएस/बीजेपी के कार्यक्रम के निमंत्रण को सम्मानपूर्वक अस्वीकार कर दिया है.

'बीजेपी ने नेहरू का किस्सा याद दिलाया'

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कांग्रेस के आधिकारिक बयान आने के बाद बीजेपी हमलावर हो गई. बीजेपी नेताओं ने गुरुवार को कांग्रेस पर 'राम विरोधी' कहकर तंज कसा और आरोप लगाया कि कैसे देश के पहले प्रधानमंत्री और कांग्रेस नेता जवाहरलाल नेहरू सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण/ उद्घाटन कार्यक्रम में नहीं पहुंचे थे. बीजेपी का कहना है कि नेहरू ने देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद को रोकने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने नेहरू की अनदेखी की और सोमनाथ मंदिर के उद्घाटन समारोह में हिस्सा लिया था.

नेहरू-सोमनाथ पर बीजेपी ने क्या कहा है...

बीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने गुरुवार प्रेस कॉन्फ्रेंस की और कहा, कांग्रेस नकारात्मक राजनीति करती है. हर चीज का बहिष्कार कर रही है. यह गांधी (महात्मा गांधी) की नहीं, बल्कि नेहरू (जवाहरलाल नेहरू) की कांग्रेस है. सुधांशु त्रिवेदी का कहना था कि भारत का इतिहास जब-जब करवट ले रहा होता है, तब-तब कांग्रेस उस मौके के साथ खड़े ना होकर उसका बहिष्कार करती है. उन्होंने कहा, इंदिरा गांधी के जमाने में कारसेवकों पर गोलियां चलीं. राजीव गांधी के जमाने और पीवी नरसिम्हा के जमाने में क्या क्या नहीं हुआ और सोनिया गांधी के दौर में राम काल्पनिक हो गए. राम मंदिर का विरोध भी उसी का हिस्सा है. बाबरी के पक्षकार भी राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में आ रहे हैं लेकिन कांग्रेस का विरोध किस लिए है? सुधांशु ने जवाहर लाल नेहरू का जिक्र किया और कहा, जब सोमनाथ मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा हो रही थी तो जवाहरलाल नेहरू जी ने 24 अप्रैल, 1951 को उस समय सौराष्ट्र के प्रमुख को पत्र लिखा था कि इस कठिन समय में इस समारोह के लिए दिल्ली से मेरा आना संभव नहीं है. मैं इस पुनरुत्थानवाद से बहुत परेशान हूं, मेरे लिए बहुत कष्टकारक है कि मेरे राष्ट्रपति, मेरे कुछ मंत्री और आप सोमनाथ के इस समारोह से जुड़े हुए हैं और मुझे लगता है कि ये मेरे देश की प्रगति के अनुरूप नहीं है, इसके परिणाम अच्छे नहीं होंगे.

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हिमंत, सीटी रवि ने भी नेहरू को लेकर घेरा

असम के मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता हिमंत बिस्वा सरमा ने भी कांग्रेस पर हमला किया और उसे 'हिंदू विरोधी पार्टी' कहा. उन्होंने जवाहरलाल नेहरू के सोमनाथ मंदिर के उद्घाटन में शामिल ना होने के बारे में भी बात की. हिमंत बिस्वा सरमा ने एक्स पर लिखा, इस निमंत्रण को स्वीकार करके वे प्रतीकात्मक रूप से हिंदू समाज से माफी मांग सकते थे. हालांकि, जैसा पंडित नेहरू ने सोमनाथ मंदिर के साथ किया था, वैसा ही कांग्रेस नेतृत्व ने राम मंदिर के साथ भी किया. इतिहास उन्हें हिंदू विरोधी पार्टी के रूप में आंकता रहेगा. हिमंत ने कहा, श्री राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव में शामिल होने के निमंत्रण से कांग्रेस पार्टी को अपने पाप कम करने का सुनहरा अवसर मिला था.

'कांग्रेस हिंदुत्व के खिलाफ रही'

कर्नाटक में बीजेपी नेता सीटी रवि ने भी कांग्रेस को नेहरू के सोमनाथ स्टैंड की याद दिलाई. सीटी रवि ने कहा, कांग्रेस हमेशा हिंदुत्व के खिलाफ रही है. सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण सरदार वल्लभभाई पटेल, बाबू राजेंद्र प्रसाद और केएम मुंशी ने किया था. उस दौरान जवाहरलाल नेहरू प्रधानमंत्री थे. वे सोमनाथ मंदिर नहीं गए थे. ऐसे में कांग्रेस का वर्तमान नेतृत्व कैसे अयोध्या जा सकता है?

'पीएम मोदी ने राहुल गांधी के सोमनाथ दौरे पर कसा था तंज'

यह पहली बार नहीं है कि जब बीजेपी ने कांग्रेस को घेरने के लिए जवाहरलाल नेहरू और सोमनाथ मंदिर के उद्घाटन का जिक्र किया. 2017 में पीएम नरेंद्र मोदी ने भी कांग्रेस नेता राहुल गांधी के सौराष्ट्र तीर्थ यात्रा पर तंज कसा था. पीएम मोदी ने कहा था, जब सरदार पटेल ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का काम शुरू किया तो नेहरू नाखुश थे. जब राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद सोमनाथ मंदिर के उद्घाटन समारोह में आने वाले थे, तब आपके (राहुल गांधी के) परदादा नेहरू ने उन्हें एक पत्र लिखा था.  पीएम मोदी ने कहा, बहादुर लोगों की यह भूमि उन लोगों को माफ नहीं करेगी, जिन्होंने सोमनाथ मंदिर के खिलाफ काम किया है. बता दें कि 2017 में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोमनाथ मंदिर में जलाभिषेक और दर्शन-पूजन करने के बाद गुजरात में अपनी चुनावी यात्रा शुरू की थी.

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'कांग्रेस ने क्या पलटवार किया...'

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने बीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी के आरोपों पर पलटवार किया. जयराम ने कहा, सुधांशु त्रिवेदी ने सोमनाथ मंदिर पर पंडित नेहरू के कुछ पत्र हवा में लहराए हैं. ये पत्र और तत्कालीन गृहमंत्री राजाजी और तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद को लिखे गए पत्र ऑनलाइन उपलब्ध हैं. जयराम रमेश ने X पर एक पोस्ट में कहा, सुधांशु त्रिवेदी ने जो दावे किए हैं, उसमें कोई बड़ा खुलासा नहीं किया है. नेहरू पूरी तरह से पारदर्शी थे और अपने पीछे लिखित रिकॉर्ड छोड़ गए थे, जो उनके द्वारा व्यक्तिगत रूप से लिखे गए थे. इस विषय पर कुछ पत्र और भी हैं, जिन्हें सुधांशु त्रिवेदी ने नहीं दिखाया है.

'सामान्य रूप से पूजा करने जाने से आपत्ति नहीं'

कांग्रेस ने पंडित जवाहरलाल नेहरू के 11 मार्च 1951 को तत्कालीन गृहमंत्री सी राजगोपालाचारी को लिखे गए पत्र को साझा किया. इसमें नेहरू ने लिखा था, मैंने उन्हें लिखा है कि उनके इस मंदिर या किसी अन्य मंदिर या अन्य पूजास्थल पर सामान्य रूप से जाने और पूजा करने में कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन इस विशेष अवसर पर यानी मंदिर के उद्घाटन के मौके पर जाने का अलग मतलब होगा. इसके कुछ निहितार्थ होंगे. पत्र में आगे लिखा है, राष्ट्रपति भी खुद को इस समारोह से जोड़ने के लिए उत्सुक हैं. मुझे नहीं पता कि क्या मेरे लिए इस बात पर जोर देना कि कि उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए. मैं आपकी सलाह के मुताबिक उन्हें यह बताने का प्रस्ताव करता हूं कि वो ऐसा कर सकते हैं, इस मामले में उनका अपना विवेक है. हालांकि मुझे अब भी लगता है कि उनके लिए वहां ना जाना ही बेहतर होगा.

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'यह यात्रा राजनीतिक महत्व ले रही है'

13 मार्च 1951 को नेहरू ने सोमनाथ मंदिर की अपनी यात्रा पर तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद को पत्र लिखकर कहा था कि अगर आपको लगता है कि निमंत्रण अस्वीकार करना आपके लिए सही नहीं होगा तो मैं दबाव नहीं डालना चाहूंगा. नेहरू ने प्रसाद को लिखा था कि उनकी सोमनाथ मंदिर की यात्रा 'एक निश्चित राजनीतिक महत्व' ले रही है. आगे कहा था, उनसे संसद में इसके बारे में सवाल पूछे जा रहे थे, जिसका जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि सरकार का इससे कोई लेना-देना नहीं है.

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सोमनाथ मंदिर के बारे में...

12 प्रतिष्ठित ज्योतिर्लिंगों में से एक गुजरात में सोमनाथ मंदिर को आक्रमणकारियों द्वारा कई बार नष्ट किया गया था. औरंगजेब के आदेश पर इसे ढहा दिया गया था. आजादी के बाद पुनर्निर्माण होने तक यह उसी अवस्था में रहा. तत्कालीन गृह मंत्री सरदार पटेल को सोमनाथ मंदिर के जीर्णोद्वार का श्रेय दिया जाता है. सौराष्ट्र के पूर्व राजा दिग्विजय सिंह ने 8 मई 1940 को सोमनाथ के नवनिर्मित मंदिर की आधारशिला रखी थी. 11 मई 1951 को भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने मंदिर में ज्योतिर्लिग स्थापित किया था. सोमनाथ मंदिर 1962 में पूर्ण निर्मित हो गया था.

A photo of the Somnath Temple innaugration in 1951, attended by President Dr Rajendra Prasad

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