एशिया का सबसे बड़ा टेक्सटाइल हब कहे जाने वाला सूरत कपड़ा बाजार के कारोबारी मुसीबत में नजर आ रहे हैं. यह मुसीबत असम सरकार के एक फैसले के चलते आई है. कारोबारियों को डर है कि करीब सौ करोड़ से भी ज्यादा का नुकसान हो सकता है. दरअसल, असम सरकार ने अपने यहां हस्तकला को बढ़ावा देने के लिए मेकला चादर पर प्रतिबंध लगा दिया है.
इसके चलते असम में 14 अप्रैल को मनाया जाने वाले पीहू पर्व को लेकर व्यापारियों ने सूरत कपड़ा बाजार में बड़े पैमाने पर मेकला चादर का ऑर्डर दिया था. सूरत के कारोबारियों ने ऑर्डर को समय पर पूरा करने के लिए प्रोडक्शन में दिन रात लगा दिया है. ज्यादातर ऑर्डर के पार्सल असम पहुंच गए हैं, लेकिन इसी बीच 28 फरवरी को असम सरकार ने बाहर से बनकर आने वाली मेकला चादर पर प्रतिबंध की घोषणा कर दी.
कैंसल और रिटर्न हो रहे हैं ऑर्डर
ऐसे में असम के व्यपारा या तो ऑर्डर को कैंसल कर रहे हैं या फिर ऑर्डर रिटर्न कर रहे हैं. ऐसे में सूरत के व्यापारियों के लिए सबसे बड़ी मुसीबत यह है कि मेकला चादर असम का पारंपरिक वस्त्र है और देश में और कहीं भी नहीं पहना जाता है. सूरत में वर्षों से असम के वस्त्रों का कारोबार करने वाले व्यापारियों की मानें, तो असम सरकार अगर फैसला वापस नहीं लेती है, तो सूरत कपड़ा कारोबार के लिए बड़ा नुकसान होगा.
सौ करोड़ से भी ज्यादा का हो सकता है नुकसान
कपड़ा कारोबारी रंगनाथ सारडा ने कहा कि केंद्र सरकार ने 1985 में सभी राज्य सरकारों को हैंडलूम ट्रेड को बढ़ावा देने के लिए विशेष कानूनी अधिकार दिया था. इसी के तहत असम सरकार ने अपने यहां मेकला चादर जो कि गृह उद्योग का एक भाग है, उसको लेकर फैसला करते हुए बाहर से इस वस्त्र पर प्रतिबंध लगा दिया है. कपड़ा उद्यमी सरकार से अपील कर रहे हैं कि यह प्रतिबंध कुछ दिनों को टाल दिया जाए. ऐसा नही होंने पर सूरत के कारोबारियों के सौ करोड़ से भी ज्यादा का नुकसान होने के साथ सालाना करीब सात सौ का कारोबार बंद हो जाएगा.
उम्मीद है कि समस्या का हल जरूर निकलेगा
कपड़ा उद्यमी सांवरमल बुधिया का कहना है कि सूरत का कपड़ा व्यापार पूरे देश में फैला हुआ है. हर राज्य के पारंपरिक वस्त्रों का निर्माण करने वाले सूरत के कारोबारियों के लिए यह एक बड़ी मुसीबत सामने आ गई है. असम और गुजरात में बीजेपी का शासन है, ऐसे में व्यापारियों को उम्मीद है कि इस समस्या का हल जरूर निकलेगा.