scorecardresearch
 

Adani Ports को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, गुजरात सरकार को अभी नहीं लौटानी पड़ेगी 108 हेक्‍टेयर जमीन

मामला 2005 का है, जब 108 हेक्टेयर जमीन अडानी पोर्ट्स को आवंटित की गई थी. 2010 में, जब कंपनी ने जमीन पर बाड़ लगाना शुरू किया, तो नवीनल गांव के निवासियों ने एक जनहित याचिका के साथ गुजरात उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया.

Advertisement
X
गुजरात में 108 हेक्टेयर से अधिक भूमि मामले में अडानी पोर्ट्स को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली. (प्रतीकात्मक तस्वीर)
गुजरात में 108 हेक्टेयर से अधिक भूमि मामले में अडानी पोर्ट्स को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

सुप्रीम कोर्ट ने उद्योगपति गौतम अडानी की कंपनी अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड को बड़ी राहत देते हुए गुजरात हाई कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें राज्य सरकार से कंपनी को आवंटित 108 हेक्टेयर चरागाह भूमि वापस लेने को कहा गया था. यह जमीन कच्छ जिले में मुंद्रा बंदरगाह के पास नवीनल गांव में स्थित है. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर गुजरात सरकार से जवाब मांगा है. गुजरात उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से पोर्ट कंपनी को आवंटित 108 हेक्टेयर भूमि वापस लेने को कहा था. न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगा दी. 

Advertisement

मामला 2005 का है, जब 108 हेक्टेयर जमीन अडानी पोर्ट्स को आवंटित की गई थी. 2010 में, जब कंपनी ने जमीन पर बाड़ लगाना शुरू किया, तो नवीनल गांव के निवासियों ने एक जनहित याचिका के साथ गुजरात उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया. उन्होंने गुजरात हाई कोर्ट से कहा कि अडानी पोर्ट्स को जो जमीन आवंटित की गई है, वह चारागाह भूमि है. उन्होंने अपनी याचिका में तर्क दिया कि गांव चरागाह भूमि की कमी का सामना कर रहा है. निवासियों के अनुसार, 276 एकड़ भूमि में से 231 एकड़ Adani Ports & SEZ को आवंटित होने के बाद गांव में केवल 45 एकड़ चरागाह भूमि बची है.

वर्ष 2014 में, राज्य सरकार ने कहा कि ग्रामीणों को चरागाह के लिए 387 हेक्टेयर सरकारी भूमि देने का आदेश पारित किया गया है, जिसके बाद अदालत ने मामले का निपटारा कर दिया. जब सरकार ने 387 हेक्टेयर भूमि का आवंटन नहीं किया तो ग्रामीणों ने गुजरात हाई कोर्ट में अवमानना ​​याचिका दाखिल की. 2015 में, राज्य सरकार ने एक समीक्षा याचिका दायर की और अदालत को बताया कि ग्राम पंचायत के पास आवंटित करने के लिए केवल 17 हेक्टेयर सरकारी भूमि उपलब्ध है. राज्य सरकार ने प्रस्ताव दिया कि वह लगभग 7 किलोमीटर दूर शेष भूमि आवंटित कर सकती है.

Advertisement

ग्रामीणों ने इसे यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि यह मवेशियों के चरने के लिए बहुत दूर है. अप्रैल 2024 में गुजरात हाई कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल और न्यायमूर्ति प्रणव त्रिवेदी की खंडपीठ ने राजस्व विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को समाधान निकालने का निर्देश दिया. एसीएस ने एक हलफनामे के माध्यम से पीठ को सूचित किया कि राज्य सरकार ने लगभग 108 हेक्टेयर या 266 एकड़ चारागाह भूमि वापस लेने का फैसला किया है, जो पहले एपीएसईजेड को आवंटित की गई थी. 

राजस्व विभाग ने अदालत को सूचित किया कि राज्य सरकार कुल 129 हेक्टेयर भूमि को चारागाह के रूप में विकसित करेगी और इसे गांव को वापस देगी, जिसके लिए वह अडानी पोर्ट्स से ली गई 108 हेक्टेयर जमीन में 21 हेक्टेयर जमीन अपने पास से जोड़ेगी. गुजरात हाई कोर्ट ने इस पर संतुष्टि व्यक्त की और राज्य सरकार को इस प्रस्ताव को लागू करने का निर्देश दिया. अडानी पोर्ट्स ने गुजरात सरकार के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी. न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड की अपील पर विचार किया और गुजरात हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दिया. 

Live TV

Advertisement
Advertisement