गुजरात में गोधरा कांड के दौरान बिलकिस बानो गैंगरेप केस सभी 11 सजायाफ्ता कैदियों को सरकार ने रिहा कर दिया है. जेल से बाहर आने के बाद विश्व हिंदू परिषद के दफ्तर में उनका फूल-माला पहनाकर सम्मान किया गया है.
आरोपी राधेश्याम को वीएचपी के अरविंद सिसोदिया द्वारा फूलों की माला पहनाकर स्वागत करते हुए की फोटो सामने आई है. वहीं अन्य तस्वीरों में दोषी फूल माला पहने कुर्सी पर बैठे हुए हैं. एक दिन पहले गोधरा उप जेल के बाहर निकलने पर दोषियों को मिठाई खिलाकर उनका स्वागत करते हुए का वीडियो सामने आया था.
जेल से रिहा किए जाने के एक दिन बाद दोषी शैलेश भट्ट ने मीडिया से कहा था कि हम सभी राजनीति के शिकार थे. जब उन्हें गिरफ्तार किया गया तो वह एक किसान और भाजपा की जिला इकाई के पदाधिकारी थे." एक अन्य दोषी राधेश्याम शाह ने रिहाई के बाद कहा था कि सभी निर्दोष हैं. हमारी विचारधारा के कारण हमें फंसाया गया था.
रिहाई के लिए बनाई गई थी कमेटी
बिलकिस केस के दोषियों को रिहा किया जाए या नहीं, इसके लिए सरकार ने एक कमेटी का गठन किया था. गोधरा के कलेक्टर सुजल मायात्रा को इस कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया था. वहीं इस कमेटी में पंचमहाल से बीजेपी के दो विधायक, गोधरा के विधायक सी.के.राउलजी, विधायक सुमन चौहान, पंचमहाल के सांसद जसवंत सिंह राठोड समेत 11 लोगों को शामिल किया गया था.
इन दोषियों को किया गया है रिहा
राधेश्याम शाह, जसवंत चतुरभाई नाई, केशुभाई वदानिया, बकाभाई वदनिया, राजीवभाई सोनी, रमेशभाई चौहान, शैलेशभाई भट्ट, बिपिन चंद्र जोशी, गोविंदभाई नाई, मितेश भट्ट और प्रदीप मोढिया को रिहा किया गया है.
पीएम की कथनी-करनी में अंतर देख रहा देश
वहीं कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी बिलकिस बानो मामले में दोषियों की रिहाई को लेकर बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा. उन्होंने ट्वीट किया- '5 महीने की गर्भवती महिला से बलात्कार और उनकी 3 साल की बच्ची की हत्या करने वालों को आजादी के अमृत महोत्सव के दौरान रिहा कर दिया गया. नारी शक्ति की झूठी बातें करने वाले लोग देश की महिलाओं को क्या संदेश दे रहे हैं? प्रधानमंत्री जी, पूरा देश आपकी कथनी और करनी में अंतर देख रहा है.'
दोषियों की रिहाई बिलकिस के संघर्ष का मजाक
बिलकिस बानो केस दोषियों की रिहाई पर AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने ट्वीट करते हुए कहा कि इन लोगों ने जघन्य अपराध किया है. उनकी रिहाई बिलकिस बानो के संघर्ष का मजाक है. पुराने घावों को फिर से ताजा कर दिया है. बीजेपी तकनीकियों के पीछे नहीं छिप सकती. सरकार की अपनी नीति और केंद्र के निर्देश बलात्कारियों और सीबीआई जांच के दोषियों को रिहा करने से रोकते हैं.
वहीं अपने दूसरे ट्वीट में उन्होंने लिखा- 2014 की रीमिशन नीति ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 1992 की नीति को हटा दिया. गुजरात सरकार ने खुद स्वीकार किया कि 2012 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 1992 की नीति को बदलना पड़ा क्योंकि यह अब कानून के अनुरूप नहीं थी.
कुछ भी महसूस करने की शक्ति नहीं बची
बिलकिस बानो के पति याकूब रसूल ने दोषियों की रिहाई पर एक अंग्रेजी अखबार से कहा कि पहले उनकी पत्नी को भरोसा नहीं हुआ कि ऐसा हुआ है. कुछ देर बाद बिलकिस रोने लगीं और फिर खामोश हो गईं.
इसके बाद बिलकिस ने कहा कि उन्हें अकेला छोड़ दिया जाए. उन्होंने अपनी बेटी सालेहा की आत्मा के लिए दुआ की है. याकूब रसूल ने कहा,'हमें जिस हालत में लाकर छोड़ दिया गया है, उसमें अब कुछ भी महसूस करने की शक्ति नहीं बची है.''
यह है पूरा मामला
27 फरवरी 2002 को गुजरात के गोधरा स्टेशन पर साबरमती एक्सप्रेस के कोच को जला दिया गया था. इस ट्रेन से कारसेवक अयोध्या से लौट रहे थे. इससे कोच में बैठे 59 कारसेवकों की मौत हो गई थी. इसके बाद गुजरात में दंगे भड़क गए थे. दंगों की आग से बचने के लिए बिलकिस बानो अपनी बच्ची और परिवार के साथ गांव छोड़कर चली गई थीं.
बिलकिस बानो और उनका परिवार जहां छिपा था, वहां 3 मार्च 2002 को 20-30 लोगों की भीड़ ने तलवार और लाठियों से हमला कर दिया. भीड़ ने बिलकिस बानो के साथ बलात्कार किया. उस समय बिलकिस 5 महीने की गर्भवती थीं. इतना ही नहीं, उनके परिवार के 7 सदस्यों की हत्या भी कर दी थी. बाकी 6 सदस्य वहां से भाग गए थे. इस मामले में सीबीआई के स्पेशल कोर्ट ने सभी 11 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी.