
गुजरात में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं और चुनावी जंग से पहले केंद्र सरकार ने बड़ा दांव चल दिया है. गृह मंत्रालय ने गुजरात के मेहसाणा और आणंद जिले में रह रहे पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आकर रह रहे हिंदू, सिख, पारसी और इसाई समुदाय के लोगों को नागरिकता देने का ऐलान कर दिया है. नागरिकता के लिए आवेदन को लेकर गृह मंत्रालय ने नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है.
केंद्र सरकार के इस फैसले से मेहसाणा और आणंद में रह रहे पड़ोसी देशों के अल्पसंख्यकों में प्रसन्नता की लहर दौड़ गई है. मेहसाणा जिले में कई साल से रह रहे करीब 300 से अधिक पाकिस्तानी शरणार्थियों को केंद्र सरकार के इस फैसले का लाभ मिलेगा और उन्हें नागरिकता मिल सकेगी. कई साल से शरणार्थी के रूप में किसी तरह जिंदगी बसर करने को मजबूर ये नागरिक भारतीय कहलाने की आस से ही खुशी से झूम रहे हैं.
पाकिस्तान से आकर रह रहे परिवारों में सरकार के इस ऐलान के बाद हर तरफ आनंद छाया हुआ है. कोई मिठाई लाकर भगवान को भोग लगा रहा है तो तो कोई खुशी के आंसुओं से बच्चों की अच्छी पढ़ाई, कमाई के ख्वाब पर जमी धूल को धो रहा है. पाकिस्तान से आए ये परिवार अपने वर्षों पुराने सपने के हकीकत में बदलने के एहसास से ही प्रफुल्लित हैं.
पाकिस्तान में नहीं थी रोजी
पिछले 5 साल से मेहसाणा तहसील में रहकर खेती बारी का काम कर परिवार चला रहे रंजीत ठाकुर ने नागरिकता देने के भारत सरकार के फैसले पर खुशी व्यक्त की. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में बहुत सारी दिक्कतें आ रही थी और पढ़ाई करने के बाद भी बच्चों का कोई फ्यूचर दिख नहीं रहा था. रंजीत ने पाकिस्तान में अपने परिवार के सामने आने वाले संकटों की चर्चा करते हुए कहा कि मजबूर होकर उन्हें भारत आना पड़ा था.
वे कहते हैं कि साल 1947 में जब भारत और पाकिस्तान का बंटवारा हुआ था, तब उनके परिवार को भारत आने से रोक दिया गया था. शायद इसी वजह से उन्हें इतने दर्द उठाने पड़े. अगर परिवार तभी भारत आ गया होता तो शायद उन्हें ये दिन नहीं देखना पड़ता. रंजीत ने आगे कहा कि पाकिस्तान में हमारे पास रोजी ही नहीं थी. मजदूरी करके परिवार का जैसे-तैसे गुजारा कर रहे थे.
आंखों में अच्छे भविष्य की आस
आंखों में अच्छे भविष्य की आस लिए रंजीत ने कहा कि अब भारत का नागरिक बन जाने के बाद बच्चे और परिवार सुरक्षित रहेंगे. अच्छी पढ़ाई करके बच्चे कुछ बन सकेंगे और उन्हें वैसी जिंदगी नहीं जीनी पड़ेगी जैसी हमने जी है. करीब पांच साल से गुजरात में रह रहे पाकिस्तानी नागरिकों ने बताया कि भारत सरकार ने हमें भारतीय कहलाने का हक देने की बात की है.
पाकिस्तानी नागरिकों ने कहा कि भारत सरकार के इस फैसले से पाकिस्तान में रह रहे हमारे अन्य भाई बहनों की भी उम्मीद जगेगी. उन्हें भी यहां रहने और पढ़ने का मौका मिले, ऐसी हमारी इच्छा है. इससे हम सब साथ में रह सकेंगे और वे भी भारत में आकर सुरक्षित महसूस करेंगे.
आणंद में भी खुशी की लहर
सरकार की ओर से किए गए पड़ोसी देशों से आकर रह रहे वहां के अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने के ऐलान को लेकर आणंद में भी खुशी की लहर दौड़ गई. आणंद जिले के तारापुर मे रहने वाली पाकिस्तान के सिंध की मूल निवासी मिताली महेश्वरी ने सरकार के फैसले पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि नागरिकता के लिए आवेदन कर दिया है. मिताली के माता पिता को साल 2019 मे ही भारत की नागरिकता मिल गई थी लेकिन मिताली और उनकी बड़ी बहन, छोटा भाई को तब नागरिकता नहीं मिली थी. फिलहाल, मिताली ने अपनी बड़ी बहन के साथ नागरिकता के लिए आवेदन कर दिया है.
भारत सरकार के इस निर्णय से मिताली के परिवार के साथ ही पाकिस्तान समेत अन्य पड़ोसी देशों से आकर आणंद में रह रहे वहां के अल्पसंख्यक परिवारों में भी खुशी है. आजतक से बात करते हुए लोगों ने खुशी जताई और कहा कि इस प्रक्रिया को जितनी जल्दी हो सके, पूरा कर लिया जाना चाहिए. लोगों ने कहा कि पहले नागरिकता की प्रक्रिया काफी जटिल थी. दिल्ली तक दौड़ लगानी पड़ती थी तब कहीं जाकर नागरिकता मिल पाती थी. अब जिलाधिकारी को अधिकार दिए जाने से प्रक्रिया सहज हो गई है.
(मेहसाणा से कामिनी के इनपुट के साथ)