कोरोना महामारी के खिलाफ लड़ने में वैक्सीन को सबसे अचूक हथियार बताया गया है. इसी वजह से समय रहते टीका लग जाए, इसका प्रयास भी लगातार किया जा रहा है. लेकिन फिर भी सोशल मीडिया की दुनिया में टीके को लेकर इतनी गलतफहमियां फैलाई जा रही हैं कि कई लोग कोरोना वैक्सीन लेने से कतरा रहे हैं. ऐसा ही कुछ अहमदाबाद के जुहापुर में भी देखने को मिल रहा है जहां पर मुस्लिम समाज के कुछ लोग वैक्सीन लेने से साफ मना कर रहे हैं.
वैक्सीन को लेकर क्या डर?
अब जब वैक्सीन को लेकर इस उदासीनता की वजह जानने की कोशिश हुई तो चौंकाने वाले खुलासे होते दिख गए. किसी की नजर में वैक्सीन लगवाने से कमजोरी और बुखार होता है, तो किसी ने यहां तक कह दिया कि टीके की वजह से कई लोगों में नपुंसकता आ जाती है. सभी के तर्क अलग रहे, लेकिन उनका आधार गायब दिखा. अब इन्हीं गलत अफवाह की वजह से यहां पर लोग टीका लगवाने को तैयार नहीं दिख रहे.
क्यों हो रहा नकारात्मक प्रचार?
जुहापुर की एक स्थानीय महिला ने कहा है कि हमारा अल्लाह है, अल्लाह हमें बचा लेगा. एक शख्स ने तो वैक्सीन से ज्यादा अच्छा कोरोना को बता दिया. इस शख्स ने कहा कि मुझे कोरोना हुआ था, अब मैं ठीक हूं लेकिन वैक्सीन लेने पर मर जाते हैं तो वैक्सीन से अच्छा कोरोना ही है. अब ये तो सिर्फ कुछ लोगों की प्रतिक्रिया हैं, लेकिन जुहापुर में कई लोग ऐसी ही सोच रखते हैं और उनके जरिए वैक्सीन को लेकर लगातार नकारात्मक प्रचार किया जा रहा है.
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कैसे रुकेगा ये दुष्प्रचार?
ऐसे में अब वैक्सीन को लेकर हो रहे दुष्प्रचार को खत्म करने के लिए कई सामाजिक संस्थाओं की मदद ली जा रही है. अहमदाबाद के जुहापुर में भी 'साथ' नाम का संगठन सक्रिय भूमिका निभा रहा है. वे इलाके में लगातार वैक्सीन लगवाने के लिए अपील कर रहा है और कई दूसरे लोगों के अनुभव भी साझा करते दिख रहा है.
इस संस्थान की तरफ से बताया गया है कि वे कई ऐसे लोगों को अपने साथ लेकर चल रहे हैं जो पहले से ही वैक्सीन लगवा चुके हैं और बिल्कुल स्वस्थ हैं. ऐसे में उन लोगों का उदाहरण देकर दूसरों को भी टीका लगवाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. कोशिश उन मौलवियों संग भी बातचीत करने की है जिनके जरिए मुस्लिम समाज को प्रभावी अंदाज में वैक्सीन को लेकर जरूरी संदेश दिया जा सकता है.