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अहमदाबाद में लगी साबरमती जेल के कैदियों की पेंटिग्स की प्रदर्शनी

ये सारी पेंटिग्स साबरमती जेल में बीते 11 साल से उम्र कैद काट रहे नरेंद्र सिंह राठौड़ और महेश परमार ने बनाई हैं. नरेंद्र सिंह राठौड़ का कहना है कि उनकी हर पेंटिंग बस यही कहना चाहती है कि जेल की दीवारों के अंदर रहते हुए कोई कैसे आजादी की जिंदगी की तमन्ना करता है.

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कैदियों की पेंटिग्स की प्रदर्शनी
कैदियों की पेंटिग्स की प्रदर्शनी

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जेल में किसी को भी अपने गलत कामों की वजह से सलाखों के पीछे रहना पड़ता है. किसी शख्स को कैद हो सकती है लेकिन उसकी रचनात्मकता पर कोई पहरा नहीं लग सकता. अगर इनसान अपनी ऊर्जा सही दिशा में लगाए तो वो क्या कमाल कर सकता है, इसे साबित कर दिखाया साबरमती जेल के दो कैदियों ने. इन दोनों की 40 पेंटिग्स की प्रदर्शनी इस वक्त नवजीवन प्रेस में लगी है. ये प्रदर्शनी महात्मा गांधी की जयंती 2 अक्टूबर तक चलेगी. बताया जा रहा है कि इस तरह कैदियों की पेंटिंग्स की प्रदर्शनी देश में पहली बार लगी है.

ये सारी पेंटिग्स साबरमती जेल में बीते 11 साल से उम्र कैद काट रहे नरेंद्र सिंह राठौड़ और महेश परमार ने बनाई हैं. नरेंद्र सिंह राठौड़ का कहना है कि उनकी हर पेंटिंग बस यही कहना चाहती है कि जेल की दीवारों के अंदर रहते हुए कोई कैसे आजादी की जिंदगी की तमन्ना करता है.

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वहीं महेश परमार ने कहा कि वे अपनी पेंटिग्स के जरिए यही संदेश देना चाहते हैं कि जेल में आकर जिंदगी खत्म नहीं हो जाती. यहां आने के बाद भी सकारात्मक कार्यों से जीवन को संवारा जा सकता है. बता दें कि इन दोनों कैदियों को भी साबरमती जेल की उसी खोली में रहने का भी मौका मिला जहां कभी महात्मा गांधी को रहना पड़ा था. वहीं रहते हुए दोनों कैदियों ने बापू के जीवन से प्रेरणा लेकर कैनवास पर कुछ सकारात्मक उकेरने का फैसला किया. नतीजा 40 पेंटिग्स के तौर पर सामने आया. प्रदर्शनी देखने आने वाले दोनों कैदियों की रचनात्मकता की दिल खोल कर तारीफ कर रहे हैं.

नवजीवन प्रेस के ट्रस्टी विवेक देसाई एक बार साबरमती जेल आए तो उनकी नजर इन पेंटिग्स पर पड़ी. उन्होंने जेल प्रशासन से इन पेटिंग्स की प्रदर्शनी लगाने का सुझाव दिया. लेकिन जेल के नियमों के मुताबिक लोग जेल के अंदर प्रदर्शनी देखने नहीं आ सकते. इस पर विवेक देसाई ने नवजीवन ट्रस्ट की सत्य आर्ट गैलरी में प्रदर्शनी लगाने का न्योता दिया. इसे जेल प्रशासन ने कबूल कर लिया. इन पेंटिग्स की कीमत 2000 से लेकर 12000 रुपए तक रखी गई है. पेंटिंग्स को बेचने से जो भी कमाई होगी वो इन्हें बनाने वाले दोनों कैदियों को दी जाएगी.

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