गुजरात में कावी के समुद्र तट पर शिवलिंग मिलने के बाद भरूच और आसपास के जिलों से लोग बड़ी संख्या में दर्शन के लिए आ रहे हैं. कावी गांव के लोग इस शिवलिंग का भव्य मंदिर बनाने की बात कर रहे हैं. दूसरी ओर कुछ लोग इस पर सवाल उठा रहे हैं कि ये शिवलिंग है या नहीं. पुरातत्व विभाग से जांच कराने की मांग कर रहे हैं. शिवलिंग मिलने से नया विवाद शुरू हो गया है.
भरूच जिले के जंबूसर तहसील के कावी गांव में मछुआरों को मिला शिवलिंग गुजरात समेत पूरे देश में चर्चा का केंद्र बन गया है. कावी के देवीपूजक समुदाय के लोग जो पेशे से मछुआरे हैं, वो 7 तारीख को मछली पकड़ने के लिए समुद्र में गए थे. इसी दौरान एक शिवलिंग जाल में फंस गया. इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.
समुद्र के बीच तट से 185 किमी दूर मिले इस शिवलिंग को कावी गांव के प्राचीन कमलेश्वर महादेव मंदिर में दर्शन के लिए रखा गया है. दो दिन में शिवलिंग का वीडियो इस कदर वायरल हुआ कि सूरत, वडोदरा, अहमदाबाद जिलों से बड़ी संख्या में लोग दर्शन के लिए आ रहे हैं.
'10-12 लोगों ने कोशिश की लेकिन इसे हिला नहीं पाए'
जिन लोगों को यह शिवलिंग मिला है, उन्होंने बताया कि शुरुआत में हमें ड्रम जैसा लगा. दो लोगों ने इसे खींचने की कोशिश की. मगर, वो खींच नही पाए. फिर 10-12 लोगों ने कोशिश की लेकिन इतने सारे लोग भी इसे हिला नहीं पाए. हमने ध्यान से देखा तो मालूम चला की अंदर शेषनाग का आसन और मूर्ति है. इसलिए हमने बीच समुद्र में भगवान भोलानाथ की स्तुति करने के बाद ओम नमः शिवाय का जाप किया.
उन्होंने कहा कि हमने भगवान का स्मरण कर उनकी स्थापना करने का निर्णय लिया. इसके बाद हम शिवलिंग को उठाने में सफल हो सके. वर्तमान में यह शिवलिंग कावी गांव के प्राचीन कमलेश्वर महादेव मंदिर में रखा है. देखने वालों का कहना है कि यह शिवलिंग अद्भुत है और अलौकिक लगता है. इसके स्पर्श से मन को शांति मिलती है. शिवलिंग के अंदर नाग देवता और अन्य मूर्तियों का स्थान है. जो चांदी की तरह दिखता है.
'शिवलिंग को कमलेश्वर महादेव मंदिर में स्थापित किया जाए'
उन्होंने कहा कि शिवलिंग पर बने निशानों को देखकर ऐसा लगता है कि या तो इसे तोड़ने की कोशिश की है या फिर यह समुद्र में किसी चीज से टकरा गया होगा. समुद्र से यह शिवलिंग प्राप्त करने वाले देवीपूजक समाज के लोगों ने मांग की है कि इस शिवलिंग को कमलेश्वर महादेव मंदिर में स्थापित किया जाए.
ट्रस्टी मंडल ने भी इसकी अनुमति देने को कहा है. यदि इसे यहां स्थापित नहीं किया गया तो हम कावी बंदरगाह पर सरकार से जमीन मांगेंगे और वहां भव्य मंदिर बनाएंगे. वाघेला परिवार की बेटी प्रियंका ने कहा, 'हर दिन पिता मछली लाते थे. दो दिन पहले वह शिवलिंग लेकर आए. मैं बहुत खुश हूं कि भगवान को हम ला पाए. जब से शिवलिंग आया है तब से हम इसे ही देखते हैं. यह दिव्य शिवलिंग है.
'पुरातत्व विभाग आए और कहे तो हम मान सकते हैं'
शिवलिंग को देखने के लिए वडोदरा से आए पर्यटक इलाबेन परमार ने कहा कि हमने वीडियो देखा था. यह अद्भुत शिवलिंग है. जंबूसर तहसील में बीजेपी के कोषाध्यक्ष विजयभाई सिंधा ने कहा, यह शोध का विषय है कि क्या यह वास्तव में शिवलिंग है या कुछ और? अगर पुरातत्व विभाग आए और वो कहे तो हम मान सकते हैं कि ये सचमुच शिवलिंग है.
कावी कंबोई स्थित पवित्र तीर्थ स्थल स्तंभेश्वर महादेव मंदिर के महंत विद्यानंदजी ने भी इसी तरह की राय व्यक्त करते हुए कहा कि यदि यह वास्तव में एक शिवलिंग है और पुरातत्व विभाग ऐसा कहता है, तो इसे सही स्थान पर स्थापित किया जाना चाहिए.