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सिर्फ नया-पुराना नहीं, गुजरात की नई कैबिनेट के पीछे छुपा है बीजेपी का ये चुनावी समीकरण

गुजरात में बीजेपी ने फिर राजनीतिक प्रयोग की नई इबारत लिखते हुए मंत्रिमंडल के जरिए सिर्फ चेहरे ही नहीं बदले गए बल्कि जातिगत और क्षेत्रीय बैलेंस का भी बखूबी ख्याल रखा है. ऐसे में साफ जाहिर है कि गुजरात की नई कैबिनेट के पीछे छिपा है बीजेपी के 2022 का चुनावी समीकरण. 

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गुजरात मंत्रिमंडल का गठन
गुजरात मंत्रिमंडल का गठन
स्टोरी हाइलाइट्स
  • गुजरात मंत्रिमंडल में बदल दिए सभी पुराने चेहरे
  • पाटीदार और आदिवासी समाज को खास तवज्जो
  • बीजेपी ने 2022 के चुनाव का रखा खास ख्याल

बीजेपी ने गुजरात विधानसभा चुनाव से ठीक एक साल पहले ना सिर्फ सरकार का कप्तान बदला बल्कि पूरी टीम नई कर दी है. गुजरात में बीजेपी ने फिर राजनीतिक प्रयोग की नई इबारत लिखते हुए मंत्रिमंडल के जरिए सिर्फ चेहरे ही नहीं बदले गए बल्कि जातिगत और क्षेत्रीय बैलेंस का भी बखूबी ख्याल रखा है. ऐसे में साफ जाहिर है कि गुजरात की नई कैबिनेट के पीछे छिपा है बीजेपी का चुनावी समीकरण. 

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गुजरात विकास मॉडल के नाम पर ही बीजेपी ने अपना प्रभाव देश भर में जमाया है. राज्य में पिछले ढाई दशक से बीजेपी सत्ता में है, जिसके चलते सत्ता विरोधी लहर का खतरा माना जा रहा है. पीएम नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह गुजरात से आते हैं. ऐसे में गुजरात में अगले बीजेपी के सियासी जमीन दरकी या फिर कमजोर हुए तो विपक्ष को मोदी सरकार पर भी सवाल उठाने का मौका मिल जाएगा. ऐसे में बीजेपी गुजरात के सीएम से लेकर सभी मंत्रियों को बदल दिया है और अब नए चेहरे के सहारे अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में उतरेगी. 

युवा और अनुभव दोनों का बैलेंस

बीजेपी शीर्ष नेतृत्व ने गुजरात में भले ही विजय रुपाणी सरकार के 22 मंत्रियों में से किसी को भी भूपेंद्र पटेल सरकार में जगह नहीं दी हो, लेकिन युवा और अनुभव का जरूर ख्याल रखा है. पहली बार जीतकर भूपेंद्र पटेल को सत्ता की कमान सौंपी है तो कैबिनेट में सबसे युवा हर्ष संघवी को गृह राज्य मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई जबकि मनीषा वकील को महिला व बाल कल्याण का काम सौंपा गया है. इस तरह से नई सरकार में भले ही ज्यादाकर नए चेहरे हों, पर कई के पास ही सरकार में रहने का अनुभव है. 

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राघवजी पटेल 90 के दशक में शंकरसिंह वघेला सरकार में मंत्री रह चुके हैं, जबकि कृष्णानाथ राणा राज्य की नरेंद्र मोदी सराकर में मंत्री थे. राजेंद्र त्रिवेदी आनंदीबेन पटेल की सरकार में मंत्री थे और रुपाणी सरकार में विधानसभा स्पीकर की भूमिका निभा रहे थे. इसके अलावा गुजरात में छह साल तक बीजेपी की कमान संभालने वाले जीतू वघानी को भी मंत्री बनाया गया है. इससे साफ संकेत है कि बीजेपी ने भले ही मंत्रिमंडल के चेहरे बदले हो, पर अनुभवी नेताओं को भी तवज्जो दिया गया है. बीजेपी के प्रभारी भूपेंद्र यादव ने पत्रकारों से कहा कि पुराने नेताओं के अनुभव के साथ नए नेतृत्व वाली सरकार और संगठन में सामंजस्य से काम होता रहेगा. 

जातीय समीकरण साधने का दांव

2022 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए बीजेपी ने कैबिनेट के जरिए गुजरात के जातीय समीकरण साधने का दांव भी चला है. गुजरात के सबसे अहम पाटीदार समुदाय का बीजेपी ने विशेष ख्याल रखा है. कैबिनेट के जिन 24 मंत्रियों को गुरुवार को शपथ दिलाई गई है. मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के साथ-साथ कैबिनेट में भी सात पाटीदार मंत्री बनाए गए हैं तो ओबीसी का भी अहमियत दी गई है. छह ओबीसी, चार आदिवासी, तीन क्षत्रिय, दो ब्राह्मण, दो दलित और एक जैन समुदाय के विधायक को मंत्रिमंडल में जगह दी गई है. गुजरात में पाटीदार, ओबीसी और आदिवासी मतदाता निर्णायक भूमिका में है, जिन्हें बीजेपी ने नई सरकार में तवज्जो देकर सियासी संदेश देने की कोशिश की है. 

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कैबिनेट में क्षेत्रीय संतुलन का रखा ख्याल

भूपेंद्र पटेल सरकार के कैबिनेट गठन में गुजरात के जातीय समीकरण के साथ-साथ क्षेत्रीय संतुलन का भी ध्यान रखा गया है. कैबिनेट में बनाए गए 24 मंत्रियों में दक्षिण गुजरात से आठ मंत्री बनाए गए हैं. मध्य गुजरात से सात, सौराष्ट्र-कच्छ से सात और उत्तर गुजरात से तीन विधायकों को मंत्री बनाया गया है. दक्षिण गुजरात बीजेपी का गढ़ माना जाता है, 2017 के चुनाव में बीजेपी की सत्ता इसी इलाके में मिली जीत के कारण बची थी. यहां बीजेपी के 24 विधायकों में से आठ को मंत्रिमंडल में शामिल हुए, जिनमें से पूर्णेश मोदी को राजस्व तथा गृह राज्यतमंत्री स्वतंत्र प्रभार का जिम्मा हर्ष संघवी को दिया गया. पहली बार सूरत से चार मंत्री बनाए गए हैं. 

कैबिनेट में महिलाओं की संख्या बढ़ी

विजय रुपाणी सरकार में महज एक महिला मंत्री थी जबकि भूपेंद्र पटेल की सरकार में मनीषा वकील और निमीषा सुथार के रूप में दो महिला चेहरों को लिया गया. निमीषा गत उपचुनाव में मोरवा हड़फ सीट से चुनाव जीती हैं. मनीषा को महिला व बाल कल्यााण का स्वतंत्र प्रभार दिया गया जबकि निमीषा को आदिवासी विकास, स्‍वास्थ्य व परिवार कल्याण राज्यमंत्री का जिम्मा सौंपा गया. इसके अलावा निमा आचार्य को नई विधानसभा अध्यक्ष बनाया गया है. इस तरह बीजेपी ने आधी आबादी को भी साधने का दांव चला है. 

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सत्ता विरोधी लहर की विदाई 

गुजरात आगामी विधानसभा चुनावों से करीब एक साल पहले बीजेपी ने राज्य पूरी सरकार को बदल दिया है. विश्लेषक मानते हैं कि बीजेपी ने ये फेरबदल गुजरात में दरकती सियासी जमीन को रोकने और देशभर के बेजीपी नेताओं को संदेश देने के लिए किया है. इसीलिए नई टीम में किसी भी पुराने मंत्रियों को जगह इसलिए नहीं दी गई है कि ताकि सत्ता विरोधी लहर की आंच नए मुख्यमंत्री और नए मंत्रिमंडल तक नहीं पहुंचे. राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि सरकार में अब सभी चेहरे नए हैं. पूरी टीम के बदल जाने से गुजरात में अब सत्ता विरोधी लहर का बीजेपी आसानी से सामना कर सकेंगी. राज्य की पूरी टीम को बदल देने से जनता के सामने नई चेहरे होंगे. नई टीम नई ऊर्जा से सराबोर होगी और केंद्र सरकार की उम्मीदों के नाव पर सवार भी. गुजरात के विधानसभा चुनाव में नाम भूपेंद्र पटेल का चलेगा और चेहरा होंगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. 

बीजेपी ने खेला बड़ा सियासी दांव

दरअसल माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री से लेकर मंत्रिमंडल में नए टीम बनाकर बीजेपी ने बड़ा दांव खेला है. विजय रूपाणी जिनके सहारे पार्टी को अपनी नैया पार लगना मुमकिन नहीं लगा उन्हें हटाकर बीजेपी ने भूपेंद्र पटेल को राज्य का मुख्यमंत्री बना दिया अब वे ही भाजपा के विजय रथ को आगे बढ़ाएंगे. बीजेपी ने साफ कहा है कि नए सीएम भूपेंद्र पटेल की अगुवाई में ही 2022 के चुनाव में उतरेगी. गुजरात भाजपा के प्रभारी और केंद्र सरकार में मंत्री भूपेंद्र यादव ने मंत्रिमंडल के गठन के बाद पत्रकारों से बातचीत के बाद इसे नया प्रयोग बताया. उन्होंने कहा कि जो दल स्थिरता और सातत्य यानी कन्सिस्टेन्सी और कांटीन्यूइटी के साथ काम करती है वह नए नेतृत्व को उभारता है. 

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