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'ढाई साल से ये सब चल रहा था, आप सो गए या अंधे हो गए थे?', राजकोट अग्निकांड पर HC में नगर निगम को फटकार

राजकोट गेमिंग जोन में लगी आग के मामले में गुजरात हाईकोर्ट में सुनवाई हुई इस दौरान कोर्ट ने कहा हमें राज्य की मशीनरी पर भरोसा नहीं है. कोर्ट ने राजकोट नगर निगम के कमिश्नर से कहा कि गेमिंग जोन किसी परमिशन के बग़ैर चल रहा था इस बात की जानकारी नहीं थी. इस पर कोर्ट ने सरकार को जमकर सुनाया.

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राजकोट अग्निकांड में अब तक 27 लोगों की मौत हो चुकी है
राजकोट अग्निकांड में अब तक 27 लोगों की मौत हो चुकी है

राजकोट अग्निकांड मामलें में गुजरात हाइकोर्ट ने सरकार और स्थानीय प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई है.  स्पेशल जज बीरेन वैष्णव और देवेन देसाई की पीठ राजकोट गेमिंग जोन में लगी आग मामले में स्वत: संज्ञान लेकर सुनवाई कर रही है.  रविवार को इस मामले को हाइकोर्ट ने खुद ही संज्ञान में लिय़ा था और राज्य सरकार तथा सभी नगर निगमों को तलब किया था.

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आज सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए राज्य सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाए और कहा कि अब हमें स्थानीय व्यवस्था और राज्य सरकार पर भरोसा नहीं है.

हाईकोर्ट की सख्ती

हाईकोर्ट ने राजकोट महानगर पालिका और राजकोट पुलिस कमिश्नर से 3 जून से पहले एफिडेविट फाइल करने का आदेश दिया है. हम RMC कमिश्नर को सस्पेंड कर सकते है लेकिन जवाब देने का मौका दे रहे हैं. हाईकोर्ट ने कहा, 'आग लगने की घटनाओं में हाईकोर्ट द्वारा जारी आदेशों का पालन क्यों नहीं किया जा रहा, ये कंटेम्प्ट के बराबर है. अधिकारियों ने कोई जांच की नहीं और गेमिंग जोन चलता रहा और निर्दोष लोगो की जान गई. ये मानव निर्मित घटना है, निर्दोष बच्चों के समेत लोगों की जान गई. नगर निगम के अधिकारियों को फायर NOC और BU परमिशन की जांच करते रहना चाहिए. तक्षशिलाकांड, श्रेयकांड, राजस्थान हॉस्पिटल में आग लगी, हरनी तालाब हादसा, मोरबी झूलता ब्रिज दुर्घटना के बाद भी प्रशासन ने कोई सीख नहीं ली है.'

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कोर्ट ने कहा- आप अंधे हो गए थे?

हाईकोर्ट ने  नगर निगम को फटकार लगाते हुए पूछा, 'लोग मशीनरी के ट्रिगर से मर रहे हैं. ढाई साल से यह सब चल रहा था तो क्या सो गये थे ? या आप अंधे हो गये थे.' कुछ बड़े अफ़सर गेमिंग जोन में खेलने गये थे उसकी तस्वीरें वायरल हुई इस संबंध में कोर्ट ने पूछा, जो अधिकारी वहां खेलने गए थे वो क्या कर रहे थे.? दुर्घटना के बाद पेनिक बटन दबाने का क्या मतलब, अब सरकार ने सभी गेमिंग जोन बद करवाए हैं.'

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कोर्ट ने सवाल किया कि हमारे चार साल के आदेश के बाद भी अगर फायर सेफ़्टी मामले में कोई कदम नहीं लिये गये तो राजकोट नगर निगम (आरएमसी) को क्यों नहीं जिम्मेदार माना जाए.? बता दें कि स्पेशल जज बीरेन वैष्णव और देवेन देसाई की पीठ राजकोट गेमिंग जोन में लगी आग मामले में स्वत: संज्ञान लेकर सुनवाई रही है.

इस बीच राजकोट बार एसोसिएशन ने बड़ा फैसला लिया है. बार एसोसिएशन राजकोट गेमिंग जॉन में गिरफ्तार हुए आरोपियों का केस नहीं लड़ेगी. वहीं अग्निकांड के इस मामले में तीसरी गिरफ्तारी हो गई है. राहुल राठौड़ नाम के शख्स को क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार किया है जो  गोंडल का रहने वाला है. राहुल गेमिंग जोन में वेल्डिंग का कामकाज करवा रहा था.

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कांग्रेस ने उठाए सवाल

राजकोट के गेमिंग जोन में लगी आग मामले पर गुजरात कांग्रेस के अध्यक्ष शक्तिसिंह गोहिल ने कहा, सरकार को बड़े अधिकारियों के खिलाफ एक्शन लेना चाहिए. उन्होंने  FIR में बड़े अधिकारियों के नाम शामिल नहीं किए जाने पर सवाल उठाए. शक्तिसिंह ने मांग करते हुए कहा कि जिन्होंने अपने परिजन खोए हैं उनके परिवार के सदस्य को आर्थिक मदद दी जाए.

27 लोगों की हुई थी मौत
बता दें कि राजकोट के टीआरपी गेम जोन में शनिवार को भीषण आग लग गई थी जिसमें 27 लोगों की मौत हो गई. कहा जा रहा है कि जनरेटर के लिए 1500 से 2000 लीटर डीजल, गो कार रेसिंग के लिए 1000 से 1500 लीटर पेट्रोल जमा था. जिसकी वजह से आग इतनी फैली कि पूरा स्ट्रक्चर जलकर खाक हो गया. गेम जोन से बाहर निकलने और प्रवेश के लिए 6 से 7 फीट का एक ही रास्ता था. गेम जोन में एंट्री के लिए 99 रुपये की स्कीम थी, जिसकी वजह से बड़ी संख्या में लोग हादसे के वक्त गेम जोन में मौजूद थे. इस मामले में राज्य सरकार ने पांच सदस्यीय SIT गठित की थी.

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