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मोरबी ब्रिज हादसा: मृतकों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा दे ओरेवा कंपनी, गुजरात HC का आदेश

गुजरात हाई कोर्ट ने मोरबी ब्रिज हादसे में ओरेवा कंपनी को पीड़ित परिवारों को 10-10 लाख रुपये और घायलों को 2-2 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है. बीते साल 30 अक्टूबर को हुए हादसे में 135 लोगों की मौत हुई थी.

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मोरबी ब्रिज हादसा (फाइल फोटो)
मोरबी ब्रिज हादसा (फाइल फोटो)

गुजरात के मोरबी ब्रिज हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों और घायलों को मुआवजा देने का आदेश दिया गया है. गुजरात हाईकोर्ट ने पुल की मरम्मत करने वाली ओरेवा कंपनी को आदेश दिया है कि मृतकों के परिवारों को 10-10 लाख और घायलों को 2-2 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए. 

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ओरेवा ग्रुप ने कराई थी मरम्मत 

गांधीनगर से 300 किलोमीटर दूर मच्छु नदी पर बना ये केबल ब्रिज 7 महीने से बंद था. पुल की मरम्मत का काम अजंता मैनुफैक्चरिंग (ओरेवा ग्रुप) को मिला था. ये कंपनी घड़ियां, एलईडी लाइट, सीएफएल बल्ब, ई-बाइक बनाती है. हालांकि जानकारी सामने आई कि अजंता मैनुफैक्चरिंग ने मरम्मत का ठेका किसी दूसरी कंपनी को दे दिया था.

135 लोगों की चली गई थी जान 

मोरबी जिले में मच्छु नदी पर बना हैंगिंग ब्रिज बीते साल 30 अक्टूबर को टूट गया था. हादसे के वक्त इस पर 300-400 लोग मौजूद थे. सभी लोग नदी में गिर गए थे. हालांकि, इनमें से कुछ की जान बचा ली गई थी. इस हादसे में 135 लोगों की मौत हुई थी. चौंकाने वाली बात ये थी कि हादसे से 5 दिन पहले ही 7 महीने की मरम्मत के बाद ब्रिज को खोला गया था. हालांकि ब्रिज खोलने से पहले फिटनेस सर्टिफिकेट भी नहीं लिया गया था. इस ब्रिज के रखरखाव का ठेका ओरेवा कंपनी के पास ही था. जिसके बाद कंपनी और उसके मालिक के खिलाफ केस दर्ज कराया गया था. 

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143 साल पुराना था ब्रिज 

मोरबी का ये ब्रिज 143 साल पुराना था. इसकी लंबाई 765 फीट और चौड़ाई 4 फीट थी. इस पुल का उद्घाटन 1879 में किया गया था. इस केबल ब्रिज को 1922 तक मोरबी में शासन करने वाले राजा वाघजी रावजी ने बनवाया था. वाघजी ठाकोर ने पुल बनाने का फैसला इसलिए लिया था, ताकि दरबारगढ़ पैलेस को नजरबाग पैलेस से जोड़ा जा सके.
 

 

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