गुजरात के जूनागढ़ में हर साल महाशिवरात्रि की रात अनोखी होती है. यहां आयोजित पांच दिन के मेले को मिनी कुंभ के नाम से भी जाना जाता है, जिसमें देशभर से हजारों नागा साधु पहुंचते हैं. इसे साधु-संतों के लिए खुशी की रात भी कहते हैं. कुंभ मेले की तरह यहां भी शाही स्नान होता है, जिसे काफी महत्वपूर्ण माना जाता है.
निकलती है शिवजी की बारात
महाशिवरात्रि की रात जूनागढ़ में नागा साधु सज-धज कर शिवजी की बारात निकालते हैं. इस दौरान वे लट्ठ दांव, तलवारबाजी, योग जैसे कई करतब करते हुए चलते हैं. करीब चार किमी के इस यात्रा में तीनों अखाड़ा के साधु-संत जुड़ते हैं, जिसमें श्री पंचनाम आवाहन अखाड़ा, श्री पंचनाम अग्नि अखाड़ा और दशनाम अखाड़ा शामिल है.
ठीक 12 बजे साधुओं का स्नान
रात को ठीक 12 बजे नागा साधु भावनाथ मंदिर के परिसर में आए मृगी कुंड में बारी-बारी से शाही स्नान करते हैं. ऐसा भी माना जाता है कि जब नागा साधु स्नान करते हैं, तब देवाधिदेव शिवजी किसी ना किसी रूप में आते हैं और मृगी कुंड में स्नान करके फिर अदृश्य हो जाते हैं.
हर साल जुटते हैं करीब 7 से 8 लाख लोग
कुंभ मेले की तरह महाशिवरात्रि के शाही स्नान का खास महत्व है. महाशिवरात्रि की रात नागा साधुओं के शाही स्नान और शिवजी की बारात देखने हर साल करीब 7 से 8 लाख लोग आते हैं.
मेले में शामिल हुए सीएम रुपाणी
इस साल महाशिवरात्रि के पर्व पर गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपाणी खास तौर आए और इस मेले के विकास की कई योजनाओं का जिक्र किया. उम्मीद यही है कि अगले साल मेला देखने और हिस्सा लेने आने वाले लोगों को अच्छी सुविधा मिलेगी.