गुजरात चुनाव में कांग्रेस अपने नए फॉर्मूला के साथ उतरने की तैयारी कर रही है. प्रदेश में कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री माधवसिंह सोलंकी के समय की KHAM थ्योरी अभी तक चल रही है, जिसके जरिए कांग्रेस ने गुजरात में अबतक सबसे ज्यादा सीटें हासिल की थीं. हालांकि अब गुजरात कांग्रेस BDAM थ्योरी अमल करने पर विचार कर रही है.
कांग्रेस की KHAM थ्योरी में क्षत्रिय, हरिजन, आदिवासी और मुस्लिम शामिल थे, जिसे प्रदेश के पूर्व सीएम माधवसिंह सोलंकी के समय अमल में लाया गया था, लेकिन अब पार्टी BDAM थ्योरी लाने पर विचार कर रही है, जिसमें ओबीसी, दलित, आदिवासी और मुस्लिम वर्ग के लोगों के लिए न्याय की बात करेगी.
बजट में पिछड़ों की अनदेखी: चावड़ा
गुजरात कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और विधायक अमित चावड़ा के मुताबिक, भाजपा के शासन में BDAM- ओबीसी, दलित, आदिवासी और मुस्लिम समाज की पिछले 27 साल में सरकार के जरिए अनदेखी की गई. यहां तक कि गुजरात सरकार के बजट में 82 प्रतिशत बस्ती इन समुदाय की है. इसके बावजूद बजट में उनकी अनदेखी की गई. गुजरात सरकार के जरिए जो बजट हर साल विधानसभा में पेश किया जा रहा है, उसमें लगातार इन समुदाय के लोगों की अनदेखी की जा रही है.
पिछड़ों को भी मिले हक: मेवानी
गुजरात के दलित नेता जिग्नेश मेवानी का कहना है कि गुजरात की बीजेपी सरकार बिन आरक्षण आयोग के लिए 500 करोड का बजट दे रही है. हम इसका विरोध नहीं कर रहे हैं, लेकिन जो इस समुदाय के लोग हैं उन्हें भी तो अच्छा बजट मिलना चाहिए. इस वर्ग के लोगों का भी सरकारी बजट पर उतना ही अधिकार है. सरकार को इस समाज का हक देना चाहिए.
पिछड़ी जाति की राजनीति करेगी कांग्रेस
कांग्रेस की इस थ्योरी को लेकर ओबीसी, दलित, आदिवासी और मुस्लिम पिछडों के हक को लेकर कांग्रेस के नेता अब सडक पर उतरेंगे. कांग्रेस नेताओं का कहना है कि महंगाई, बेरोजगारी के साथ ये भी एक मुद्दा है. गौरतलब है कि गुजरात के चुनावी मैदान में एक ओर जहां आम आदमी पार्टी मुद्दों की राजनीति कर रही है जिसमें महंगाई, शिक्षा, बेरोगारी, सरकारी कर्मचारी के लिए भत्ते की बात कर रही है तो वहीं अब कांग्रेस इन मुद्दों के साथ-साथ सभी पिछडी जाति की राजनीति भी करेगी.