कांग्रेस से इस्तीफा देने के बाद अब पाटीदार नेता हार्दिक पटेल 2 जून को बीजेपी में शामिल होंगे. वहीं गुजरात के पूर्व उपमुख्यमंत्री और पाटीदार नेता नितिन पटेल ने हार्दिक के पार्टी में शामिल होने पर कहा कि अगर कोई गलती करता है या गलत फैसला लेता है हालांकि बाद में वह सुधरना चाहे या राष्ट्र के लिए काम करना चाहे तो उसे एक मौका दिया जाना चाहिए.
हार्दिक पटेल 2 जून को गांधीनगर में बीजेपी मुख्यालय कमलम् में पार्टी ज्वॉइन करेंगे. गुजरात बीजेपी के प्रावक्ता भरत डांगर ने आज यानी मंगलवार को इसकी आधिकारी घोषणा की. उन्हें बीजेपी में शामिल कराने के लिए खुद मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल और बीजेपी अध्यक्ष सी.आर. पाटिल के साथ कैबिनेट के कई मंत्री मौजूद रहेंगे.
23 मई को बीजेपी में जाने का किया था इशारा
पिछले हफ्ते ही हार्दिक पटेल ने आजतक से खास बातचीत में अपने नए ठिकाने के सवाल पर बता दिया था कि रास्ता तय हो चुका है. हर इंसान राजनीतिक जीवन में 4 मुद्दों के साथ आगे बढ़ता है. इनमें समाज हित, राष्ट्र हित, प्रदेश का हित और समाज का हित शामिल हैं.
गुजरात की जनता कांग्रेस को दूर-दूर तक पसंद करने के लिए तैयार नहीं है. भारतीय जनता पार्टी को लेकर लोगों की अपेक्षा काफी ज्यादा हैं. जो चीजें कांग्रेस में रहकर नहीं की जा सकीं, आगे की जाएंगी.
कांग्रेस पर जमकर साधा था निशाना
हार्दिक पटेल कांग्रेस में प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष के पद पर थे लेकिन हार्दिक इससे खुश नहीं थे. हार्दिक का कहना था कि उनको फैसले लेने की स्वतंत्रता और अधिकार नहीं हैं.
उन्होंने कहा था कि कांग्रेस सिर्फ अपने फायदे के लिए लोगों का इस्तेमाल करती है. जब कोई पार्टी का व्यक्ति आवाज उठाता है, तो उसके ऊपर आरोप लगाना शुरू कर दिए जाते हैं. यह दुर्भाग्य है कि गुजरात कांग्रेस दलित, आदिवासियों और पाटीदार किसी को सम्मान नहीं देती है. नाराज होकर 18 मई 2022 को हार्दिक पटेल ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था.
कांग्रेस नेताओं ने दी सफाई
- कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जगदीश ठोकर ने कहा कि हार्दिक ने पार्टी इसलिए छोड़ी क्योंकि उनको डर था कि राजद्रोह के मामले में उनको जेल जाना पड़ सकता है.
- जिग्नेश मेवाणी ने हार्दिक पटेल को जेल जाने का डर सता रहा है, इसलिए वह आइडियोलॉजिकली समझौता कर रहे हैं. हार्दिक के खिलाफ 32 मामले दर्ज हैं. अगर सरकार हार्दिक के कहने पर पाटीदार आंदोलन के दौरान दर्ज केस वापस ले रही है तो दलित आंदोलन के दौरान दर्ज केस भी वापस लिए जाने चाहिए.