सूरत शहर के डिंडोली पुलिस थाना क्षेत्र अंतर्गत आने वाली जिग्नेश नगर सोसाइटी से 6 जुलाई को एक 5 साल का बच्चा गुम हो गया. बच्चे के पिता ताराचंद उत्तम पाटिल ने 7 जुलाई को डिंडोली पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करवाई थी. 5 साल के बच्चे विजय पाटिल के अपहरण का मामला दर्ज कर डिंडोली थाना पुलिस ने बच्चे की खोजबीन शुरू कर दी.
यह मामला बच्चे के अपहरण से जुड़ा था. लिहाजा डिंडोली पुलिस थाने की जांच में मदद करने के लिए सूरत क्राइम ब्रांच भी जुटी थी. बच्चे के गुम होने के तीन दिन बाद सूरत क्राइम ब्रांच और डिंडोली थाना पुलिस के ज्वाइंट ऑपरेशन के बाद 5 साल के बच्चे को महाराष्ट्र से सूरत की तरफ आ रही ट्रेन से बरामद कर लिया गया. इस मामले में पुलिस ने बच्चे का अपहरण करवाने में शामिल उसके ही पिता ताराचंद उत्तम पाटिल,बच्चे की बुआ ज्योति और उसके एक दोस्त करन को भी गिरफ्तार किया है.
ताराचंद उत्तम पाटिल ने 7 जुलाई को थाने में जो शिकायत दर्ज कराई थी. उसमें उसने बताया था कि 6 जुलाई की रात करीबन 9:30 बजे उसका बेटा घर से बाहर खेलने गया था और उसके बाद वह घर नहीं लौटा था. डिंडोली थाना पुलिस ने बच्चे को ढूंढने के लिए सोशल मीडिया, मीडिया और अन्य माध्यमों का सहारा लिया, लेकिन बच्चे का कोई अता-पता नहीं चला.
मामला छोटे बच्चे से जुड़ा था. लिहाजा पुलिस कोई भी रिस्क नहीं लेना चाहती थी. बच्चे को खोजने के लिए सूरत क्राइम ब्रांच भी डिंडोली थाना पुलिस की मदद में जुट गई थी. पुलिस ने सीसीटीवी चेक किए थे. सीसीटीवी में एक बच्चे को चिह्नित किया गया था और गुमशुदा हुए बच्चे के पिता ताराचंद पाटिल ने उस बच्चे को अपना ही बच्चा बताया था.
पुलिस बच्चे को खोजते खोजते उसके घर तक पहुंच गई, जो उसके मां-बाप ही निकले. बस यहीं से पुलिस को अपहरण हुए बच्चे के पिता पर शक हो गया था और फिर उससे पुलिस ने उल्टी पूछताछ शुरू की. पुलिस की पूछताछ में अपहरण हुए बच्चे के पिता ताराचंद पाटिल टूट गए. उसने अपनी करतूत को पुलिस के सामने स्वीकार कर लिया था.
बच्चे के पिता ताराचंद पाटिल ने पुलिस को बताया कि उसने ही अपने बेटे का अपहरण करके उसे महाराष्ट्र अपनी बहन ज्योति के घर छोड़ दिया है. फिर क्या था पुलिस उस बच्चे को लेने के लिए महाराष्ट्र के लिए रवाना हो चुकी थी और जब बच्चा अपनी बुआ ज्योति और उसके दोस्त के साथ सूरत की तरफ ट्रेन में बैठकर आ रहा था. तभी उसे सूरत क्राइम ब्रांच और डिंडोली थाना पुलिस की टीम ने ट्रेन की कोच से ही बरामद कर लिया था.
सूरत क्राइम ब्रांच के डीसीपी भावेश रोजिया ने बताया कि गुम हुए बच्चे के माता-पिता के बीच घरेलू झगड़ा चल रहा था. पिता ताराचंद पाटिल के ऊपर 8 से 9 लाख का कर्ज हो गया था और उसकी पत्नी नया मकान लेने के लिए बार-बार उस पर दबाव बना रही थी. तब बच्चे का पिता ने अपने ससुर के पास से पैसे वसूलने के लिए यह षड्यंत्र रचा था. इन दोनों की 8 से 10 साल पहले शादी हुई थी.
ताराचंद पाटिल ने अपनी बहन ज्योति को इस षड्यंत्र में शामिल किया था. वहीं ज्योति ने अपने एक मित्र करन को इसमें शामिल कर लिया. करन को ताराचंद पाटिल ने अपने बेटे को एक जगह दे दिया था और वह ऑटो में लेकर वहां से चला गया था. फिर बाद में ट्रेन से महाराष्ट्र लेकर गया था. बच्चे का पिता अपने ससुर से एक-दो दिन में अपहरण की रकम मांगने वाला था. सबसे पहले बच्चे के पिता ने सीसीटीवी में एक गलत लड़के की पहचान की थी.
जांच में बच्चे को लेकर वापस सूरत आ रहे करन का मोबाइल नंबर पुलिस को मिल चुका था. उसे सर्विलांस पर डालने पर उसका लोकेशन पुलिस को मिल रहा था. तब पुलिस की टीमें अगले स्टेशन से ट्रेन में बैठ गई थी. ट्रेन में एक के बाद एक कोच चेक कर रहे थे. बच्चा जिन कपड़ों में किडनैप हुआ था. उसी कपड़े में था. बाद में बच्चे की पहचान की गई और करन पकड़ा गया.