गुजरात दंगा मामले में गिरफ्तार सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ और पूर्व आईपीएस आरबी श्रीकुमार को शनिवार को अहमदाबाद मेट्रो कोर्ट में पेश किया गया. इस दौरान तीस्ता ने कोर्ट से कहा कि पिछले 6 दिनों में पुलिस मुझसे 6-7 घंटे से अधिक पूछताछ नहीं कर रही है. पुलिस सिर्फ समय बर्बाद कर रही है. 6 से ज्यादा महिला पुलिस अफसर मुझ पर नजर रखती हैं.
वहीं सरकारी वकील ने कहा कि हमें किसी और रिमांड की जरूरत नहीं है. इसके बाद तीस्ता और आरबी श्रीकुमार को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. सुनवाई के दौरान तीस्ता ने जेल में सुरक्षा मौह्या कराने की भी अपील की. उनका कहना है कि कई दंगा पीड़ितों के आरोपी जेल में बंद है. वहीं सरकारी वकील ने इस पर कहा कि जेल मैन्युअल के मुताबिक सुरक्षा दी गई है.
पिछले दिनों आतंक निरोधी दस्ते (एटीएस) ने सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ को मुंबई के जुहू स्थित उनके घर से गिरफ्तार कर लिया था. और पूर्व आईपीएस अधिकारी श्रीकुमार को अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार किया था. फिल हाल इस मामले की जांच विशेष जांच दल (एसआईटी) कर रही है.
गौरतलब है कि गुजरात दंगा मामले में एसआईटी ने सूबे के तत्कालीन मुख्यमंत्री (अब प्रधानमंत्री) नरेंद्र मोदी को क्लीन चिट दे दी थी. नरेंद्र मोदी को क्लीन चिट दिए जाने के खिलाफ जाकिया जाफरी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी.
जाकिया जाफरी की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दी थी. सर्वोच्च न्यायालय ने ये टिप्पणी भी की थी कि तीस्ता सीतलवाड़ गोपनीय तरीके से अपने स्वार्थ के लिए जाकिया जाफरी की भावनाओं का इस्तेमाल कर रही थी. जाकिया जाफरी इस मामले में असली पीड़ित हैं और इसीलिए तीस्ता सीतलवाड़ इस मामले में लगातार घुसी रही.
सुप्रीम कोर्ट ने ये भी टिप्पणी की थी कि तीस्ता सीतलवाड़ को लेकर और छानबीन जरूरी है. तीस्ता, जाकिया जाफरी को उनके मुकदमे में मदद करने के बहाने नियंत्रित कर रही थी. तीस्ता अपने हित साधने के लिए बदले की भावना से मुकदमे में दिलचस्पी ले रही थी और चीजें अपने मनमुताबिक गढ़ भी रही थी. सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद मामला दर्ज कर तीस्ता सीतलवाड़ और आरबी श्रीकुमार को गिरफ्तार किया गया था.