कांग्रेस हाई कमान के राम मंदिर निमंत्रण को ठुकराने के बाद गुजरात कांग्रेस में घमासान मचा हुआ है. पूर्व प्रदेश प्रमुख और पूर्व विधायक की नाराजगी पर अब प्रदेश अध्यक्ष ने सफाई देते हुए कहा हमारे यहां आंतरिक लोकशाही है. दरअसल गुरुवार शाम कांग्रेस हाईकमान की ओर से राम मंदिर निमंत्रण को ठुकराने का विधिवत ऐलान हुआ जिसके बाद गुजरात कांग्रेस में नाराजगी के सुर उठने लगे.
गुजरात कांग्रेस नेताओं की नाराजगी
सबसे पहले गुजरात कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और पोरबंदर से विधायक अर्जुन मोढवाडिया ने ट्वीट कर नाराजगी व्यक्त की और कहा, 'भगवान श्री राम आराध्य देव है यह देशवासियों की आस्था और विश्वास का विषय है राष्ट्रीय कांग्रेस को ऐसे राजनीतिक निर्णय लेने से दूर रहना चाहिए था.' इसके बाद भाजपा को बैठे बैठाए मुद्दा मिल गया.
कांग्रेस के पूर्व विधायक और कार्यकारी अध्यक्ष अंबरीश डेर ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से नाराजगी व्यक्त की. उन्होंने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट मे लिखा , 'मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम हमारे आराध्य देव है इसलिए यह स्वाभाविक है कि भारत भर में अनगिनत लोगों की आस्था इस नवनिर्मित मंदिर से वर्षों से जुड़ी हुई है. भारतीय कांग्रेस के कुछ लोगों को एसे खास तरह के बयान से दूरी बनाई रखनी चाहिए और जन भावना का दिल से सम्मान करना चाहिए. इस तरह के बयान मेरे जैसे गुजरात कांग्रेस के कई कार्यकर्ताओं के लिए निराशाजनक है. जय सियाराम.'
वहीं गुजरात कांग्रेस के मीडिया विभाग के सह संयोजक और प्रवक्ता हेमांग रावल ने भी सोशल मीडिया में अपनी राय व्यक्त की उन्होंने कहा, 'मुझे गर्व है कि मैं धर्म कर्म वचन से हिंदू ब्राह्मण हूं. श्री राम नाम से बड़ा नाम जग में ना कोई है, ना कोई था और ना होगा. राम मंदिर निर्माण के गौरवान्वित क्षण पर मुझे आमंत्रण मिला होता तो मैं बेशक जाता और यह मेरा प्रण है कि मैं जल्दी रामचंद्र के दर्शन को आऊंगा, जय श्री राम.'
कैमरे पर आने से बचते रहे नाराज नेता
कांग्रेस के इन नेताओं ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया और राय जाहिर की पर कैमरे के सामने आने से बचते रहे. अभी तक इन तीनों नेताओं ने कैमरे पर कोई बयान नहीं दिया पर इन बयानों पर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष शक्ति सिंह गोहिल ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हमारे कुछ साथियों ने अपने विचार रखे हैं क्योंकि हमारे यहां आंतरिक लोकशाही है पर हाई कमान से कोई दूसरी आवाज नहीं है. भाजपा की तरह हमारे वहां भाजपा जैसा नहीं है कि आका ने कहा और उसके खिलाफ बोले तो कलम कर दिए जाओगे.
गोहिल का दावा
कांग्रेस हाई कमान के फैसले को जायज ठहराते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शक्ति सिंह गोहिल ने दावा किया, 'देखिए साफ बात है, हिन्दू धर्म मे सबसे बड़ा अगर कोई निर्णय कर सकते हैं, जिसका हमारे शास्त्रों और हमारी परंपराओं में जिक्र है वह है शंकराचार्य जी महाराज है. जब शंकराचार्य जी महाराज कह रहे हैं कि मंदिर पूर्ण नहीं हुआ है अभी प्राण प्रतिष्ठा नहीं होनी चाहिए और भाजपा चुनाव देखते हुए राजकीय इवेंट करती है तो साफ है उसमे कौन जाएगा. मंदिर जाने के लिए किसी निमंत्रण को जरूरत नहीं होती. सभी बिना बुलाए भगवान के घर जा सकते है, जब पूर्ण मंदिर होगा तब हर कांग्रेसी जिसको आस्था है वो जाएगा.'
उन्होंने कहा कि बीजेपी एक इवेंट करा रही है. गोहिल ने कहा, 'मैं यह कहना चाहूँगा कि सिर्फ भव्यता से भगवान का आशीर्वाद नहीं मिलता है. रावण के पास बहुत भव्यता थी पर उसे आशीर्वाद नहीं मिला. पर शबरी माँ के पास कुछ नहीं था थोड़े से बेर थे पर भाव था इसलिए भगवान का आशीर्वाद मिला. हमारे यहां कहा जाता है कि मन चंगा तो कठौत मे गंगा, अब जब काम के नाम पर वोट नहीं मिल रहे तो राम के नाम पर रोटी पकाने वोट बेंक के लिए निकले है. में हिंदू हूं मैं भगवान की आराधना करता हूं मेरे इष्ट देव की प्रार्थना करता हूं तो मोक्ष की प्राप्ति के लिए करता हूं, मतों की राजनीति में मेरे भगवान का मैं उपयोग नहीं करता हूं.'
बीजेपी पर राजनीति करने का आरोप
गोहिल ने कहा कि किसी हमारे साथियों ने निजी तौर पर कहीं अपनी बात रखी है. उन्होंने आगे कहा, 'शंकराचार्य जी के बाद में अगर हिंदू मजहब में और कोई इवेंट करते हैं तो उसका कोई मतलब नहीं रहता है. रामनवमी आ रही थी रामनवमी पर करते. भगवान राम के लिए इससे ज्यादा क्या शुभ दिन हो सकता है. पर इनको तो चुनावी राजनीति करनी है तो यह इवेंट है. मंदिर के दर्शन के लिए हमें किसी निमंत्रण की जरूरत नहीं है. जहां जब चाहे हर कांग्रेसी जाता है, प्रार्थना करता है पर राजनीति नहीं करता.' अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में गुजरात कांग्रेस के नाराज नेताओं का रुख क्या रहता है और प्रदेश नेतृत्व इन नेताओं को कैसे मनाता है.