किसान आंदोलन के बीच हरियाणा की सियासत में भी हलचल पैदा होती दिखाई दे रही है. हरियाणा में जेजेपी के सहारे चल रही मनोहर लाल खट्टर के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार पर संकट के बादल मंडराते नजर आ रहे हैं और कांग्रेस इस अवसर का फायदा उठाते हुए अविश्वास प्रस्ताव तक लाने की बात कर रही है.
दरअसल, कृषि कानून पर किसानों के आंदोलन का जेजेपी समर्थन कर रही है. जेजेपी ने खुलेआम बीजेपी सरकार को तेवर भी दिखा दिए हैं. दूसरी तरफ कुछ निर्दलीय विधायक भी खट्टर सरकार से अलग हो गए हैं. यही वजह है कि कांग्रेस को हरियाणा में फिर से संभावना नजर आ रही है.
इस मसले पर हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता भूपिंदर सिंह हुड्डा से आजतक ने जब सवाल किया कि उनके संपर्क में कितने विधायक हैं तो इस पर हुड्डा ने कहा, ''कितने विधायक संपर्क में हैं ये तो नहीं बताऊंगा. लेकिन 2 निर्दलीय विधायक अलग हो चुके हैं. 6-7 जेजेपी के विधायकों के बयान आ चुके हैं. इसीलिए राज्यपाल को मैंने पत्र लिखा है और मांग की है कि तुरंत सत्र बुलाया जाए. जिस दिन सत्र आएगा उसी दिन अविश्वास प्रस्ताव लाया जाएगा.''
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हुड्डा ने राज्यपाल को लिखे अपने पत्र में कहा है कि प्रदेश में राजनीतिक अस्थिरता है और सरकार के प्रति अविश्वास का माहौल है, लिहाजा विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया जाना चाहिए.
बता दें कि 90 सीटों वाली हरियाणा विधानसभा के चुनाव 2019 में हुए थे. इस चुनाव में बीजेपी को पूर्ण बहुमत नहीं मिल पाया था. जेजेपी नेता दुष्यंत चौटाला ने बीजेपी को अपना समर्थन दिया था, और इसके लिए उन्हें डिप्टी सीएम की जिम्मेदारी दी गई थी. अब जेजेपी के 10 में से सात विधायक किसानों के आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं, जिससे खट्टर के लिए चुनौती खड़ी हो गई है.
कामयाब रहा बंद
पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा ने किसान आंदोलन पर कहा कि हम किसी के कंधे पर बंदूक रखकर निशाना नहीं साध रहे हैं, हम सिर्फ किसानों का समर्थन कर रहे हैं. हुड्डा ने कहा कि बंद कामयाब रहा है. सरकार सुधार लेकर आए, लेकिन जो मौजूदा कानून आए हैं वो किसान के हित में नहीं है. इसलिए संसद का सत्र बुलाएं और रिफॉर्म लाएं, हम समर्थन करेंगे. हुड्डा ने कहा कि हम आज भी प्राइवेट निवेश का समर्थन करते हैं लेकिन किसान के हितों की रक्षा होनी चाहिए, उन्हें एमएसपी मिलनी चाहिए.