फरीदाबाद के एक अस्पताल ने सफलतापूर्वक 64 वर्षीय और 19 वर्षीय युवक के हाथ का प्रत्यारोपण कर इतिहास रच दिया है. यह भारत में पहली बार है, जबकि किसी रोगी का हाथ ट्रांसप्लांट किया गया हो. पिछले साल दिसंबर के अंतिम हफ्ते में हुई इन दोनों हाथों की सर्जरी में लगभग 17 घंटों का वक्त लगा था.
जानकारी के अनुसार, हाथ का पहला प्रत्यारोपण दिल्ली के रहने वाले 64 वर्षीय गौतम तायल का किया गया है, 10 साल पहले जिसकी किडनी ट्रांसप्लांट हुई थी. हाथ का दूसरा प्रत्यारोपण दिल्ली के रहने वाले 19 वर्षीय युवक देवांश गुप्ता का किया गया है.
मरीज की एक्टिविटी में हो रहा है सुधार
डॉ. मोहित शर्मा, प्रोफेसर और प्रमुख, सेंटर फॉर प्लास्टिक एंड रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी, अमृता हॉस्पिटल ने कहा, यह न केवल उत्तर भारत का पहला हाथ प्रत्यारोपण है, बल्कि देश में किडनी प्रत्यारोपण के मरीज पर किया गया पहला प्रत्यारोपण है. चिकित्सा विज्ञान में यह एक बहुत ही दुर्लभ और रोमांचक उपलब्धि है. दोनों हाथों के मिलन के लिए हमें दो हड्डियों, दो धमनियों, 25 कण्डराओं और 5 तंत्रिकाओं को जोड़ना पड़ा. ऑपरेशन के बाद मरीज अच्छा महसूस कर रहा है और उसके हाथों की गतिविधियों में भी सुधार हो रहा है. उन्हें एक सप्ताह के भीतर छुट्टी दे दी जाएगी.
चुनौतीपूर्ण थी सर्जरी
देवांश गुप्ता के हाथ का प्रत्यारोपण करने वाले डॉ. अनिल मुरारका ने कहा कि रोगी के दाहिने अंग को ऊपरी बांह के स्तर पर और कोहनी के स्तर से ऊपर बाएं अंग पर लगाया गया था. हाथ प्रत्यारोपण का स्तर जितना ऊंचा होता है, उतना ही चुनौतीपूर्ण होता है और ऊपरी हाथ-लेवल हैंड ट्रांसप्लांट में गहरे तकनीकी मुद्दे होते हैं.
अब तक रोगी की प्रगति उत्कृष्ट रही है. उसे इम्यूनोसुप्प्रेशन को आजीवन लेना चाहिए ताकि नए हाथों को उसके शरीर द्वारा अस्वीकार न किया जा सके. दिन-प्रतिदिन की गतिविधियों को करने के लिए उन्हें अपने नए हाथों में पर्याप्त कार्य करने के लिए 6 से 18 महीने के बीच कहीं भी ले जाएगा. उन्हें एक और साल तक मांसपेशियों के खिंचाव सहित गहन फिजियोथेरेपी से भी गुजरना होगा.
फ्लाइट से दिल्ली पहुंचे थे हाथ
गौतम तायल का कहना है कि इस उम्र में अपना अंग खोने से मैं टूट गया था. हालांकि, हाथ प्रत्यारोपण ने मुझे एक नया जीवनदान दिया है. मैं बहुत खुश और आभारी हूं कि भगवान और डॉक्टरों ने मुझे अपना जीवन पूरी तरह से जीने का दूसरा मौका दिया है. उन्होंने ठाणे के एक व्यक्ति के निधन के बाद परिजनों ने विभिन्न अंगों को दान करने पर सहमति जताई थी. इसके बाद मुंबई से हाथ को फरीदाबाद लगया गया था.
वहीं, 19 वर्षीय देवांश गुप्ता ने कहा कि जब मैंने इतनी कम उम्र में अपने दोनों हाथ खो दिए, तो मैं इस स्वीकार नहीं कर पा रहा था. ये मेरे लिए एक विनाशकारी क्षति थी. देवांश को जो दोनों हाथ प्रत्यारोपण किए गए हैं, वह सूरत के रहने वाले 33 साल के एक व्यक्ति के थे. जिसकी फेफड़ों की पुरानी बीमारी के कारण मौत हो गई. व्यक्ति की मृत्यु के बाद उनके परिवार ने हाथ सहित कई अंगों को दान करने को अपनी सहमत दे दी. इसके बाद लॉजिस्टिक ऑपरेशन कर हाथों को सूरत से फरीदाबाद लाया गया.