एक तरफ जहां केंद्र सरकार किसानों से जुड़े तीन महत्वपूर्ण अध्यादेश आज से शुरू हुए मॉनसून सत्र में पास कराने जा रही है वहीं दूसरी तरफ इनके विरोध में किसानों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है. हरियाणा के पीपली की घटना के बाद आज सिरसा में किसान संगठनों ने मीटिंग की. इस मीटिंग में 20 सितंबर को पूरे देश में नेशनल हाइवे जाम करने का ऐलान किया गया.
राष्ट्रीय किसान संगठन के प्रधान जसबीर सिंह भाटी और किसान नेता प्रह्लाद सिंह ने कहा कि जिस प्रकार से सरकार ने पीपली रैली में किसानों पर लाठियां बरसाईं वो निंदनीय है. वहीं किसान संगठन लगातार किसानों पर थोपे गए अध्यादेशों का विरोध कर रहे हैं और इसके लिए आंदोलनरत हैं. उन्होंने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य के लिए भी कानून बनाया जाए.
20 सितंबर को जाम की चेतावनी
किसान नेताओं ने कहा कि वे अपनी मांगों को लेकर 20 सितंबर को देशभर में रोड जाम करेंगे. जबकि इससे पहले 15 से 19 सितंबर तक देशभर में धरने दिए जाएंगे. मीटिंग के बाद किसान नेताओं ने देशभर के 19 संगठन किसानों के इन मुद्दों पर एकसाथ हैं और आढ़ती व व्यापारियों का भी समर्थन प्राप्त है. ये भी कहा गया है कि सरकार ने सबके बावजूद भी किसानों की मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो 27 सितंबर को और भी बड़ा आंदोलन किया जाएगा.
गौरतलब है कि केंद्र की मोदी सरकार किसानों से जुड़े कुछ अहम तीन अध्यादेश पारित कर चुकी है. इन विधेयकों को संसद में बिल के रूप में पेश किया गया है. सोमवार को लोकसभा में विपक्षी दलों ने इन बिलों का विरोध किया और आरोप लगाया कि इनसे कॉर्पोरेट जगत को फायदा पहुंचेगा.
जबकि केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर विपक्ष को जवाब देते हुए बताया कि इस बिल से छोटे किसानों को फायदा पहुंचेगा. उन्होंने बताया कि इस बिल के बाद प्राइवेट कंपनी ग्रामीण इलाकों में पहुंचेंगी और किसानों को बेहतर दाम मिलेंगे. तोमर ने बताया कि किसानों को हर हाल में न्यूनतम मूल्य मिलेगा.
पीपली में किसानों पर हुआ था लाठीचार्ज
जबकि किसान सरकार की राय से इत्तेफाक नहीं रखते हैं. किसानों व किसान संगठनों का कहना है कि ये कानून बड़े कारोबारियों को फायदा पहुंचाने वाले हैं. इसी मसले पर विरोध जताने के लिए 10 सितंबर को पीपली में महारैली को आयोजन किया गया था. इस दौरान किसानों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया.
कुरुक्षेत्र में किसान भाइयों पर हुए लाठीचार्ज की मैं घोर निंदा करता हूं ! भाजपा सरकार तीनों अध्यादेशों के ख़िलाफ़ किसानों की आवाज़ दबा नही सकती!
— Capt. Ajay Singh Yadav (@CaptAjayYadav) September 10, 2020
भाजपा सरकार के जाने के दिन आ गए हैं!
कांग्रेस पार्टी हरियाणा के किसान-मजदूर-आढती के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है।#कुरुक्षेत्र_की_रण pic.twitter.com/stxQIberbo
कांग्रेस ने किसानों की पिटाई को हरियाणा की खट्टर सरकार का जुल्म करार दिया. कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने घटना के बाद कहा था कि हरियाणा में खट्टर सरकार की गुंडागर्दी और पुलिस के जुल्म का नंगा नाच कुरुक्षेत्र की रणभूमि में पूरे देश ने देखा. तीनों अध्यादेशों का विरोध कर रहे किसान-आढ़ती-मजदूर शांतिप्रिय तरीके से किसान बचाओ-मंडी बचाओ रैली का पीपली मंडी में आयोजन करना चाहते थे. परंतु चौबीस घंटों में हजारों पुलिसकर्मी लगा किसानों और आढ़तियों के नेताओं की जबरन धरपकड़ शुरू कर दी गई, घरों पर नोटिस लगाए गए व जगह जगह पुलिस नाके लगाकर किसानों-मजदूरों-आढ़तियों को पीपली आने से रोका गया. इसके बावजूद भी जब हजारों की संख्या में लोगों ने कूच किया तो फिर पगड़ियां उछाली गईं तथा किसानों व आढ़तियों पर निर्दयता से लाठियां चलाई गईं.
पीपली में किसानों से मारपीट व सरकार के अध्यादेशों के खिलाफ एक बार फिर किसान जुटे हैं और आंदोलन करने की चेतावनी दी है.