हरियाणा के जींद जिले के उचाना में रविवार को आयोजित किसान महापंचायत में चुनाव में किसी भी पार्टी का समर्थन या विरोध नहीं करने का फैसला लिया गया है. एक किसान नेता ने इसकी जानकारी दी है. हरियाणा विधानसभा की 90 सीटों लिए 5 अक्टूबर को वोट डालेंगे जाएंगे, जबकि 8 अक्टूबर को नतीजे तारीख को घोषित होंगे.
भारतीय किसान नौजवान यूनियन के तत्वावधान में आयोजित इस महापंचायत में हरियाणा, पंजाब और अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए. इसमें जगजीत सिंह डल्लेवाल, श्रवण सिंह पंढेर और अभिमन्यु कोहाड़ जैसे किसान नेता शामिल हुए.
'किसान आंदोलन का चुनाव से कोई लेना-देना नहीं'
डल्लेवाल ने महापंचायत में लिए गए फैसले की जानकारी देते हुए कहा, 'हमारा (किसान आंदोलन का) चुनाव से कोई लेना-देना नहीं है. हमारा उद्देश्य आंदोलन को मजबूत करना है. हम चुनाव में न तो किसी की मदद करेंगे और न ही किसी का विरोध करेंगे. अपने आंदोलन को मजबूत करने के लिए हम लोगों को सरकार की विफलताओं और किसानों के खिलाफ लिए गए फैसलों से अवगत कराएंगे.'
उन्होंने कहा, 'अगली महापंचायत 22 सितंबर को पिपली, कुरूक्षेत्र में होगी. हम जिन मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं वह सिर्फ पंजाब, हरियाणा नहीं बल्कि पूरे देश के किसानों की हैं. पूरे देश को इस आंदोलन से जोड़ने के लिए देश के कोने-कोने में महापंचायतें हो रही हैं.'
'वोट देने जाएं तो 10 साल के अत्याचार याद रखें'
डल्लेवाल ने कहा कि जिस तरह से सरकार द्वारा किसानों को किसान महापंचायत में आने से रोका गया वह 'बेहद शर्मनाक, निंदनीय' है. उन्होंने आरोप लगाया, 'किसानों को इकट्ठा होने से रोकने के लिए कई जगहों पर सीमेंट के अवरोधक लगाए गए थे. गुरुद्वारा प्रबंधकों को यहां तक कहा गया कि वे उनके लिए खाना न पकाएं.'
किसान नेता अभिमन्यु कोहाड़ ने कहा, 'हम किसी राजनीतिक दल को वोट देने की अपील नहीं करते हैं, लेकिन हम यह जरूर कहेंगे कि जब आप वोट देने जाएं तो पिछले दस सालों में किसानों और मजदूरों पर जो अत्याचार हुए हैं, उन्हें याद रखें.'