किसान संगठनों और हरियाणा सरकार के बीच शुक्रवार को बातचीत के दौरान एक स्पष्ट नतीजा निकलते-निकलते रह गया. किसान नेताओं ने आजतक को बताया कि हरियाणा की खट्टर सरकार सैद्धांतिक रूप से किसानों पर दर्ज केस को वापस लेने पर तैयार हो गई थी. लेकिन मामला पिछले एक साल के दौरान मृत किसानों को शहादत का दर्जा देने पर फंस गया.
सूत्रों के अनुसार हरियाणा सरकार इसके लिए राजी नहीं हो रही थी. इसके बाद किसानों और सीएम खट्टर के बीच बातचीत बेनतीजा खत्म हो गई. किसान नेता हरिंदर सिंह लखोवाल ने दावा किया कि बातचीत के दौरान हरियाणा सरकार किसानों के ऊपर दर्ज मामले को वापस लेने को तैयार हो गई. इसके बाद किसानों ने मांग की है कि इस आंदोलन के दौरान जितने किसानों की मौत हुई है, उन्हें 'शहीद' का दर्जा दिया जाए और उन्हें आर्थिक मुआवजा और दूसरे तरह की क्षतिपूर्ति भी दिए जाएं.
खट्टर सरकार ने किसानों की मांग को सिरे से खारिज कर दिया. सरकार किसानों को शहीद का दर्जा देने पर विचार नहीं कर रही है. वहीं केस वापस लिए जाने पर आजतक को सूत्रों ने बताया कि खट्टर सरकार किसानों के ऊपर से उन मामलों को वापस नहीं लेना चाहती थी, जहां गंभीर धाराएं लगाई गई थी.
किसान संगठनों का दावा, 702 हुए 'शहीद'
बता दें कि किसानों संगठनों का दावा है कि पिछले एक साल में किसान आंदोलन के दौरान 702 किसानों ने अपनी जान गंवाई है. किसान सरकार से इन किसानों से शहीद का दर्जा देने की मांग कर रहे हैं. इसके अलावा वे किसानों के लिए मुआवजे की भी मांग कर रहे हैं.