
हरियाणा के करनाल में मंगलवार को किसानों और सरकार के बीच एक बार फिर ठन गई. किसानों की मांग मानने से सरकार/प्रशासन ने इनकार कर दिया, जिसके बाद भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत की अगुवाई में हजारों किसान सचिवालय के पास धरने पर बैठ गए.
करनाल में बुधवार को किसान संगठनों और प्रशासन के बीच दोपहर 2 बजे फिर बातचीत हुई, लेकिन वार्ता एक बार फिर विफल रही. वहीं, किसानों ने लघु सचिवालय के बाहर प्रदर्शन जारी रखने का फैसला किया है.
किसानों ने हाइवे को खोल दिया
हालांकि, करनाल से इतर जींद में बुधवार सुबह किसानों ने हाइवे को खोल दिया. जींद-चंडीगढ़, जींद-करनाल, जींद-दिल्ली हाइवे को किसानों द्वारा खोल दिया गया है, पहले यहां जाम लगाया गया था. किसानों का कहना है कि अगर करनाल से कोई आदेश आता है, तो वह फिर रास्ते जाम कर देंगे. अभी के लिए ट्रैफिक व्यवस्था दुरुस्त कर दी गई है.
करनाल में आमने सामने सरकार-किसान
बता दें कि करनाल में अगस्त के आखिरी दिनों में हुए लाठीचार्ज के खिलाफ किसानों ने बुधवार को प्रदर्शन किया. किसानों की मांग थी कि लाठीचार्ज में मारे गए किसान के बेटे को सरकारी नौकरी मिले, परिवार को मुआवजा मिले. साथ ही एसडीएम पर हत्या का केस चलाया जाए लेकिन सरकार ने इसे मानने से इनकार किया.
करनाल के सचिवालय के बाहर किसानों ने तभी धरना देना शुरू कर दिया. राकेश टिकैत, गुरनाम सिंह चढ़ूनी समेत अन्य बड़े किसान नेता धरना प्रदर्शन में शामिल हुए. इस दौरान पानी की बौछारें की गई, लेकिन किसान अपनी जगह से नहीं हटे. बुधवार को भी किसानों द्वारा अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन करने की बात कही गई है.
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में बड़ी पंचायत करने के बाद किसानों का एक ही हफ्ते में ये दूसरा हल्ला बोल है. कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन एक साल से जारी है, लेकिन सरकार-किसानों में कोई बात नहीं बन पाई है.
(जींद से विजेंद्र कुमार की रिपोर्ट)