क्या किसान आंदोलन को लेकर संगठन के बीच फूट पड़ने लगी है? ये सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा था कि वो आंदोलन पूरे साल चलाने वाले हैं. वहीं हरियाणा में भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने उनके इस बयान को निजी राय बताया है. उन्होंने कहा कि राकेश टिकैत ने दो अक्टूबर तक आंदोलन चलाने की बात कही थी. लेकिन यह उनकी निजी राय है. साथ ही चढूनी ने चुनावों में बीजेपी का विरोध करने की बात कही है.
हरियाणा किसान यूनियन के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने चंडीगढ़ में संयुक्त किसान मोर्चा की किसान महापंचायत में कहा कि 2 अक्टूबर तक आंदोलन को ले जाने की जो बात राकेश टिकैत ने कही है वो उनकी निजी राय है. अब तक संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से उनके 2 अक्टूबर तक के आंदोलन चलने और उसके बाद के कार्यक्रम को लेकर दिए गए बयान पर कोई भी अधिकारिक फैसला नहीं लिया गया है. ये उनकी निजी राय और कार्यक्रम है.
चढूनी ने कहा कि निकाय चुनाव में पंजाब में बीजेपी का पूरा विरोध किसान संगठनों की तरफ से किया गया है और अब किसान संगठनों ने तय किया है कि भविष्य में जहां-जहां चुनाव होंगे वहां पर भारतीय जनता पार्टी का विरोध किया जाएगा. अगले कुछ महीनों में पश्चिम बंगाल में चुनाव होने हैं और वहां पर भी किसान संगठन बीजेपी को वोट ना देने की अपील जनता से करेंगे. साथ ही किसान आंदोलन को दक्षिण के राज्यों में भी ले जाने की भी तैयारी की जा रही है.
गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि किसान नेताओं को पकड़ने के लिए दिल्ली पुलिस लगातार रेड कर रही है. हमने किसानों से अपील की है कि दिल्ली पुलिस किसी को भी पकड़ने पहुंचे तो वहां पर वो उसे बंधक बना लें. लेकिन इस दौरान कोई ज्यादती ना की जाए. बल्कि उनको बिठाकर चाय पानी कराई जाए.. किसी भी किसान या किसान नेता को गिरफ्तार ना करने दिया जाए.
इससे पहले चढूनी ने हरियाणा में पंचायतों की जरूरत नहीं होने की बात कही थी. उन्होंने खाप और किसानों से कोई पंचायत नहीं रखने के लिए कहा था. चढूनी ने कहा कि पंजाब-हरियाणा के किसान कृषि कानूनों से होने वाले नुकसान को लेकर जागरूक हैं. इन दोनों प्रदेश में पंचायत करने से किसान नेताओं का समय खराब होता है और वह अन्य प्रदेशों के कार्यक्रम में नहीं पहुंच पाते हैं. ऐसे में किसानों व खाप प्रतिनिधियों को हरियाणा में पंचायत नहीं रखनी चाहिए.