हरियाणा के उपमुख्यमंत्री और जननायक जनता पार्टी (JJP) प्रमुख दुष्यंत चौटाला के पिता अजय चौटाला को तिहाड़ जेल से दो हफ्ते की फरलो दिए जाने के मामले ने अक्टूबर महीने में ही तूल पकड़ लिया था. इस घटनाक्रम पर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने 26 अक्टूबर को भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर निशाना साधा था.
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने तब ट्वीट किया था- “अखिल भारतीय भ्रष्टाचार धुलाई मशीन चालू आहे!".
प्रियंका गांधी ने बीजेपी को इसलिए कटघरे में खड़ा किया क्योंकि बीजेपी के जेजेपी के साथ हरियाणा में गठबंधन सरकार बनाने के ऐलान के कुछ ही घंटे बाद अजय चौटाला को तिहाड़ जेल से दो हफ्ते की फरलो मिलने की खबर आई. अजय चौटाला अवैध भर्ती घोटाले में तिहाड़ में 10 साल की सजा काट रहे हैं.अखिल भारतीय भ्रष्टाचार धुलाई मशीन चालू आहे! https://t.co/FyALFymM0C
— Priyanka Gandhi Vadra (@priyankagandhi) October 26, 2019
दिल्ली में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) ने एक बयान में कहा, “हरियाणा में बीजेपी सरकार ने जेजीपी को समर्थन देने के लिए अजय चौटाला को इनाम दिया है.”
दिल्ली सरकार से सलाह नहीं
कांग्रेस ने दिल्ली की AAP सरकार को अजय चौटाला को फरलो दिए जाने के लिए जिम्मेदार ठहराया. कांग्रेस पर पलटवार करते हुए AAP ने कहा कि फरलो तिहाड़ जेल के महानिदेशक (डीजी) ने दी और इस मुद्दे पर दिल्ली सरकार के गृह मंत्री या सरकार में अन्य किसी से सलाह नहीं ली गई थी.
आखिर इस मामले का सच क्या था? किसने दो हफ्ते के लिए अजय चौटाला को जेल से आज़ादी दी थी? क्या फरलो देने के पीछे कोई राजनीतिक पहलू भी था? इन्हीं सब सवालों का जवाब जानने के लिए इंडिया टुडे ने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत महानिदेशक (डीजी) कारागार, तिहाड़ जेल के दफ्तर को याचिका भेजी.
किसने अजय चौटाला को दिया फरलो?
“किसने अजय सिंह चौटाला को अक्टूबर 2019 में फरलो देने का फैसला किया?” इस सवाल का जवाब डीजी कारागार के दफ्तर ने ये दिया- “कारागार के महानिदेशक फरलो देने के लिए सक्षम अधिकारी हैं.” इससे संकेत मिलता है कि इस मामले में राज्य सरकार ने कोई भूमिका नहीं निभाई लगती.
आरटीआई याचिका में हमारा दूसरा सवाल था- अजय सिंह चौटाला ने कब फरलो के लिए आवेदन किया था? इसका जवाब डीजी कारागार के दफ्तर से ये मिला- “सिद्धदोषी अजय चौटाला पुत्र ओम प्रकाश चौटाला ने फरलो के लिए 03/10/2019 को आवेदन दिया.”
इसका मतलब है अजय चौटाला के आवेदन पर सकारात्मक जवाब आने में 23 दिन का वक्त लगा. अजय चौटाला को हरियाणा में बीजेपी-जेजेपी गठबंधन के लिए डील होने के कुछ ही घंटे बाद फरलो मिल गई. ये संयोग हो भी हो सकता है और नहीं भी.
किस आधार पर मिली फरलो
सवाल का जो RTI जवाब मिला उससे निर्णायक तौर पर नहीं कहा जा सकता कि अजय चौटाला को ऐसे वक्त पर फरलो संयोगवश मिली या ये गठबंधन की डील के बदले में इनाम के तौर पर मिली?
“अजय सिंह चौटाला को किस आधार पर फरलो दी गई?” हमारे इस सवाल पर डीजी कारागार के दफ्तर का जवाब था- “DPR 2018 के मुताबिक फरलो देने के लिए किसी आधार की ज़रूरत नहीं होती.”
इसी सवाल के तिहाड़ की जेल नंबर 2 से मिले जवाब में कहा गया- ‘ये (फरलो) ‘पात्रता के आधार’ पर दी गई.’
प्रति उपलब्ध कराने से इनकार
हमने अजय चौटाला के आवेदन की प्रमाणित प्रति और जिस फाइल पर आदेश दिया गया उसके आखिरी पन्ने की प्रति उपलब्ध कराने का आग्रह किया था. इस पर डीजी कारागार के दफ्तर का जवाब था- “तीसरी पार्टी से जुड़ी सूचना होने की वजह से सूचना उपलब्ध नहीं कराई जा सकती.”
इसी सवाल के जवाब में जेल नंबर 2 ने कहा- ‘ये जानकारी ‘सूचना के अधिकार अधिनियम 2005’ के सेक्शन 8 (1) (j) के तहत तीसरी पार्टी सूचना होने की वजह से ये उपलब्ध नहीं कराई जा सकती. दोषसिद्ध अजय चौटाला ने आरटीआई एक्ट 2005 के तहत आवेदन में मांगी गई किसी भी सूचना को साझा करने से इनकार किया है.’
RTI के तहत हमारा एक और सवाल था- “सितंबर और अक्टूबर 2019 में कितने कैदियों को फरलो दी गई?” इसका जेल नंबर 2 ने जवाब दिया- ‘सितंबर में 78 कैदियों ने इसके लिए आवेदन किया, एक को छोड़ बाकी सभी 77 को ये मिल गई. अक्टूबर में 112 ने फरलो के लिए आवेदन किया था जिनमें से 106 को जेल अथॉरिटी की मंजूरी मिल गई.’