ये कहानी है लड़ाई की...नशे के खिलाफ निर्णायक लड़ाई की. ये कहानी है विजय की...एकजुटता के साथ किए गए प्रयासों से मिली जीत की, और ये कहानी है उम्मीद की भी. उम्मीद इस बात की कि ये कहानी सिर्फ एक गांव की कहानी न बन जाए, बल्कि मिसाल बने उन सभी गांवों, कस्बों, मोहल्लों और शहरों के लिए जो नशे के मकड़जाल में फंसी अपनी भावी पीढ़ियों को तिल-तिल मरता देख रहे हैं. ये कहानी हरियाणा के जिले जींद के अशरफगढ़ गांव की है.
2021-22 के बाद जब पूरी दुनिया कोरोना जैसी भयंकर महामारी से बाहर निकलकर फिर से खुली हवा में सांस लेने की कोशिश कर रही थी, वहीं अशरफगढ़ की हवा नशे के जहर से भर रही थी. एक वक्त ऐसा भी आया, जब गांव आसपास के बड़े इलाके के लिए नशे का बड़ा अड्डा बन गया था. सुल्फा, चिट्टा और गांजा खरीदने वालों के लिए पसंदीदा जगह था ये गांव, लेकिन इस जहर के खिलाफ जंग का ऐलान भी गांव वालों ने ही किया, प्रशासन ने सहयोग दिया और हौसला बढ़ाया और आज ये गांव मिसाल है, नशे के खिलाफ मिली जीत का.
महंगी गाड़ियों में लोग आते थे नशे का सामान खरीदने
अशरफगढ़ गांव की आबादी 4-5 हजार के करीब है. गांव के लोग बताते हैं कि कोरोना महामारी के खत्म होते-होते गांव में कुछ लोग नशे के धंधे में लिप्त हो गए. ये जहर इतनी तेजी से फैला कि आसपास के पूरे इलाके में ये गांव नशे के अड्डे के रूप में बदनाम हो गया. लोग कहीं बाहर जाते और अपने गांव का नाम बताते, तो कहा जाता कि ये तो नशे करने वालों के गांव से है. गांव के 5-6 परिवार इस धंधे में काफी एक्टिव थे, लेकिन वहां बड़ी और महंगी गाड़ियों में लोग नशे का सामान खरीदने आते. कई बार पंचायत में बुलाकर ऐसे परिवारों को चेताया गया, मगर किसी के कान पर जूं नहीं रेंगी.
साल 2023 के अक्टूबर महीने में गांव के लोगों ने आम सहमति से शहीद भगत सिंह के नाम से क्लब बनाया. क्लब में हर बिरादरी के युवाओं, सेना से रिटायर्ड लोगों को शामिल किया गया. गांव भर में CCTV कैमरे लगवाए गए. नशे का सामान बेचने वालों के लिए जुर्माने का ऐलान किया. जो भी नशा बेचता पकड़ा जाता, उसे पहली बार 11 हजार, दूसरी बार पकड़े जाने पर 22 हजार और तीसरी बार में तीन गुना फाइन देना पड़ता.
जब धंधेबाजों ने अपनी महिलाओं, बच्चों को कर दिया आगे
क्लब के अध्यक्ष प्रिंस संधु बताते हैं कि नशे के खिलाफ मुहिम शुरू हुई, तो धंधेबाजों ने अपनी महिलाओं, बच्चों को आगे कर दिया. उन्हें रोका जाता तो छेड़छाड़ के झूठे आरोप लगा दिए जाते. यहां प्रशासन से मदद मिली. महिला सिपाहियों ने ऐसी महिलाओं की तलाशी ली. धीरे-धीरे ऐसे लोगों पर केस और जुर्माने बढ़ने लगे. नशा बेचने वालों में खौफ बढ़ा. 6-7 महीने में ही इस बुराई पर काबू पा लिया गया.
जींद के DSP रोहतास धुल बताते हैं कि अशरफगढ़ गांव में लंबे वक्त से नशे का कारोबार फैला था. लेकिन, अब माहौल बदल चुका है. गांव वाले नशे के खिलाफ इस मुहिम में बहुत एक्टिव हैं. हम चाहते हैं कि यह हरियाणा का नंबर-1 गांव बन जाए. अशरफगढ़ में पदस्थ ASI मोनिका यहां 3 साल से एक्टिव हैं. उन्होंने एक बार यहां से 30 किलोग्राम गांजा पकड़ा था.