देश के वीर सपूत और भारतीय वायुसेना के फाइटर पायलट सिद्धार्थ यादव का पार्थिव शरीर शुक्रवार को उनके गृह जिले रेवाड़ी पहुंचा है. जैसे ही पार्थिव देह सेक्टर-18 स्थित उनके आवास पहुंची, माहौल गमगीन हो गया. इस दौरान 'सिद्धार्थ यादव अमर रहें' के नारों के बीच परिजनों, स्थानीय लोगों और पूर्व सैनिकों ने नम आंखों से श्रद्धांजलि दी.
बता दें कि बुधवार को गुजरात के जामनगर में वायुसेना का जगुआर फाइटर विमान एक ट्रेनिंग फ्लाइंग के दौरान क्रैश हो गया था. इस हादसे में पायलट सिद्धार्थ यादव शहीद हो गए. हादसे से पहले उन्होंने अपने साथी को सुरक्षित बाहर निकलने का समय दिया और विमान को घनी आबादी वाले क्षेत्र से दूर ले गए, जिससे कई लोगों की जान बच गई.
सिद्धार्थ यादव की महज 10 दिन पहले ही सगाई हुई थी और वे चार दिन पहले ही ड्यूटी पर लौटे थे. वे अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे. शहीद का पार्थिव शरीर सबसे पहले सेक्टर-18 स्थित उनके घर लाया गया, जहां पूरे सम्मान के साथ श्रद्धांजलि दी गई. इसके बाद शव को उनके पैतृक गांव भालकी ले जाया गया, जहां सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा.
बता दें कि गुजरात के जामनगर में बुधवार रात करीब साढ़े 9 बजे एयरफोर्स का जगुआर फाइटर क्रैश हो गया था. प्लेन ने जामनगर एयरफोर्स स्टेशन से उड़ान भरी थी. हादसे में पायलट सिद्धार्थ यादव शहीद हो गए, जबकि साथी मनोज कुमार सिंह को घायल अवस्था में अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
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28 वर्षीय सिद्धार्थ की 23 मार्च को ही सगाई हुई थी. वह इकलौते बेटे थे. 31 मार्च को वह रेवाड़ी से छुट्टी पूरी कर जामनगर एयरफोर्स स्टेशन पहुंचे थे. रेवाड़ी में जब इस दुर्घटना की सूचना मिली तो शोक की लहर दौड़ गई. सिद्धार्थ के परदादा बंगाल इंजीनियर्स में कार्यरत थे, जो ब्रिटिशर्स के अधीन था.
सिद्धार्थ के दादा पैरा मिलिट्री फोर्सेस में थे. सिद्धार्थ के पिता भी एयरफोर्स में रहे. वर्तमान में वह LIC में कार्यरत हैं. यह चौथी पीढ़ी है, जो सेना में सेवाएं दे रही थी. सिद्धार्थ ने 2016 में NDA की परीक्षा पास की थी. इसके बाद 3 साल का प्रशिक्षण लेकर उन्होंने बतौर फाइटर पायलट वायुसेना जॉइन की थी. उन्हें 2 साल बाद प्रोमोशन मिला था, जिससे वह फ्लाइट लेफ्टिनेंट बन गए थे.