31 जुलाई को मेवात में हिंसा हुई, जिसमें छह लोगों की मौत हो गई और कई लोग घायल भी हुए. इस बीच सोशल मीडिया पर वीडियो भी वायरल हो रहे हैं, जिनमें दावा किया जा रहा है कि मेवात की पहाड़ी से उस मंदिर पर कथित रूप से फायरिंग हुई है, जहां से ब्रजमंडल यात्रा चलनी थी. आजतक ने इसके बाद एक स्पेशल इनवेस्टिगेशन शुरू की. उस पहाड़ी से पड़ताल की गई, जहां से गोलियां चलने का दावा हुआ. इस पड़ताल को नाम दिया गया है 'ऑपरेशन दृश्यम'.
ये नाम इसलिए, क्योंकि जो कुछ कैमरे में कैद हुआ है, वो अब तक ना कोई और दिखा पाया है, ना ही पुलिस देख पाई है. इसमें कई बड़े खुलासे हुए हैं, जिसे देखकर हरियाणा सरकार, हरियाणा के नूंह की पुलिस को अपनी जांच के लिए नए सिरे से तैयारी करनी होगी. दरअसल, मेवात में अरावली की पहाड़ी से नीचे यात्रा की शुरुआत वाले मंदिर तक 31 जुलाई की हिंसा के दौरान गोलियां चलने का दावा किया जा रहा है. इसके बाद ऊपर पहाड़ी से फायरिंग करके हिंसा भड़काने वालों को रोकने के लिए हवाई फायरिंग का भी वीडियो वायरल हो रहा है.
जहां तक अभी नूंह की पुलिस भी नहीं पहुंच पाई है. वहां पर आजतक का कैमरा पहुंचा. ड्रोन कैमरे से नीचे देखने पर मेवात की उसी फायरिंग वाली पहाड़ी पर कुछ लोग जाते नजर आए. कुछ लोग चारपाई लेकर जाते दिखे. ये लोग कौन हैं? जो अरावली की पहाड़ी पर दिखते हैं. क्या ये नूंह के स्थानीय लोग हैं? क्या ये लोग मेवात हिंसा के आरोपी लोग हैं? अभी ये साफ साफ नहीं कहा जा सकता है.
आखिर 31 जुलाई को ऊपर पहाड़ी से गोली चलाने वाली कहानी और किरदार कौन हैं? इससे जानने की कोशिश की गई. बेहद खतरे भरे माहौल में जब अरावली की पहाडियों पर आजतक टीम पहुंची तो यहां चारों तरफ हरियाली, झाड़ियां और पेड़-पौधे नजर आए. लेकिन इन सबके बीच जो कुछ मेवात हिंसा के दौरान गोली चलने के दावे वाली पहाड़ी पर दिखता है, वो चौंकाता है. जो लोग यहां सोते हुए, बैठे हुए नजर आए, ये कोई मेवात की पहाड़ी पर ऑक्सीजन लेने नहीं आए हैं बल्कि ये लोग मेवात में हुई हिंसा के बाद यहां छुपने, बचने और पनाह लेने के लिए पहुंचे हैं.
दावा है कुछ लोग नूंह मेवात के स्थानीय ग्रामीण हैं, जिनको डर है कि पुलिस उठा ले जाएगी. साथ ही आशंका है कि कुछ लोग इनके साथ ऐसे भी हो सकते हैं, जो दंगा हिंसा करने के आरोपी हों. कैमरे में आने से पहले सभी लोगों ने अपने-अपने चेहरे ढक लिए. उन्होंने कहा कि वह पुलिस के डर से यहां छिपे हुए हैं क्योंकि पुलिस बिना पूछे किसी को भी उठा ले रही है.
रिपोर्टर: आप लोग पहाड़ों में क्यों छिपे हुए हैं?
नूंह निवासी: पुलिस के डर की वजह से पहाड़ों में छिपे पड़े हैं. पुलिस आती है और उठा ले जाती है. ये भी नहीं पूछते कि तुम वहां गए या नहीं गए.
रिपोर्टर: पूरे गांव के लोग पहाड़ों में छिपे हैं?
नूंह निवासी: पूरा गांव निकल पड़ा है यहां पर. पुलिस के डर से जो भी गांव के लोग हैं, कोई कहीं चला गया तो कोई कहीं.
रिपोर्टर: पूरे पहाड़ों में कितने लोग हैं?
नूंह निवासी: तकरीबन होंगे 500 लोग यहां पर.
अब अगला सवाल जो इन चेहरों को पहाड़ी पर पनाह लिए देखकर उठता है. क्या यहां सिर्फ निर्दोष ग्रामीण ही पुलिस के क्रैकडाउन और हिंसा के बाद के एक्शन से बचने के लिए बैठे हैं? क्या इन्हें लगता है कि ये कुछ भी किया है तब भी पुलिस उठा ले जाएगी? नूंह की जमीन छोड़ पहाड़ को अपना सुरक्षा घेरा बनाए ये लोग कबूलते हैं कि संदिग्ध दंगाई, संदिग्ध हिंसा करने वाले भी स्थानीय लोगों की भीड़ में खुद को बचाने के लिए यहां आ बैठे हैं.
अरावली की पहाड़ी को अपने लिए सुरक्षा का बंकर बनाए लोगों को लेकर आगे और भी खुलासे होने थे. कारण, सवाल ये उठता है कि ये लोग पहाड़ पर ही क्यों छिपने आए हैं? क्या पहाड़ पर इसलिए छिपे हैं क्योंकि यहां से पुलिस आती नजर आती है? क्या पहाड़ पर इसलिए छिपे हैं क्योंकि यहां के रास्ते इन्हें पता हैं? ये कौन बताएगा कि यहां पर छिपने वालों में कुछ दंगे के आरोपी भी हैं?
ऑपरेशन दृश्यम की दूसरी पड़ताल में ये जानना जरूरी था कि पहाड़ी पर छिपे लोग क्या ये जानते हैं कि इनके बीच कौन हिंसा करने वाला है, कौन नहीं? इस पर आजतक की स्पेशल इनवेस्टिगेशन टीम ने यहां छिपे लोगों से बातचीत की. दरअसल, FIR में पुलिस ने कहा है कि कुछ लोकल लोग अवैध हथियार, लाठी, पत्थर के साथ पहाड़ी से आकर ब्रजमंडल यात्रा को नीचे मंदिर के पास रोकना चाहते थे. इन्होंने यहां हमला किया. पहाड़ी से कथित रूप से गोलियां चलने, पत्थर फेंके जाने के कुछ वीडियो भी सामने आए हैं.
रिपोर्टर: आप लोग पहाड़ों में ही क्यों आए, कहीं और भी तो जा सकते थे?
नूंह निवासी: इस वजह से हैं कि जैसे अभी पुलिस की गाड़ी जा रही है तो यहां से हमें पता चल जाता है कि गाड़ी आ रही है तो हम साइड हो जाते हैं. पुलिसवाले जहां मनमानी हो रही है छापे मार रहे हैं.
पहाड़ी ही अब इनके लिए कुछ दिनों तक छिपने की जगह है. यहां काली तिरपाल नुमा पॉलीथीन भी नजर आई जो रात में ये खुद के बचाव के लिए ढंकने के लिए रखी गई थी. जिस तरह चींटियां एक के पीछे एक करके आगे बढ़ती हैं, उसी तरह लगातार ग्रामीण मेवात नूंह से बचकर इन पहाड़ियों तक आ रहे हैं.
रिपोर्टर: पहाड़ों में जो लोग हैं, वो सभी आपके ही गांव के हैं?
नूंह निवासी: नहीं, हमारे गांव के भी हैं और साथ के गांव के भी हैं. कहीं से 10 तो कहीं से 5 लोग पहाड़ी में चढ़ जाते हैं.
रिपोर्टर: कब से आप लोग पहाड़ों पर चढ़े हुए हैं?
नूंह निवासी: ये तीसरा दिन है यहां हमारा.
रिपोर्टर: इसके ऊपर भी और लोग बैठे हुए हैं?
नूंह निवासी: जहां तक हर आदमी अपना बचाव करेगा और ऊपर चला जाएगा. पहाड़ ही बचान का आखिरी हथियार है. जैसे यहां बैठे हैं वैसे ही ऊपर भी लोग बैठे हैं. अगर पुलिस नहीं आई तो हम यहीं बैठे रहेंगे.
इसके बाद टीम पहाड़ी से उतरकर अरावली की तलहटी में बसे गांवों में पहुंची. यहां मुलाकात हुई रफीक से, जो नूंह सरपंच एसोसिएशन के प्रमुख हैं. उन्होंने छिपे कैमरे पर कुबूल किया कि इनके गांव के कुछ लोगों हिंसा की और हिंसा के दौरान लूटपाट भी की. वो सभी हिंसा के बाद भाग निकले हैं.
रफीक: 5-6-7 बच्चे हैं मेरे गांव के, ऐसा नहीं कि उनको बचाऊंगा. ना पैरवी करूंगा. आगे चलकर दे दूंगा उनको.
रिपोर्टर: क्या वे मुस्लिम लड़े थे?
रफीक: हां
रिपोर्टर: क्या वे हिंसा और लूटपाट में शामिल थे?
रफीक: नहीं. झगड़े में.
रिपोर्टर: क्या हम उनसे मिल सकते हैं?
रफीक: नहीं, वे सब भाग चुके हैं.
रिपोर्टर: कितने साल के हैं वो?
रफीक: वो सभी 18, 20, 25 साल के हैं.
रिपोर्टर: वे सभी लूट में शामिल थे?
रफीक: दो-तीन उनमें से लूट में और 5-7 हिंसा में शामिल हैं.
31 जुलाई की हिंसा के चश्मदीद इरफान का दावा है कि हिंसा करने वाले कुछ राजस्थान से भी आए थे और कुछ हिंसा करने वाले नूंह के ही थे.
इरफान: कुछ पिकअप वैन राजस्थान से आई थी. 7 या 8 गाड़ियां आई थीं फिरोजपुर राजस्थान साइड से.
रिपोर्टर: ये लोग कौन थे?
इरफान: मुस्लिम थे वो सारे.
रिपोर्टर: वो कब आए?
इरफान: जब वो आए, तुरंत झगड़ा शुरू हो गया. इससे पहले नहीं आए थे वो लोग. पहाड़ी से लोग आ रहे तो उन्होंने पिकअप से उनकी गाड़ी से टक्कर मार दी. इसके बाद झगड़ा शुरू हो गया.
मेवात की हिंसा में दोषी, आरोपी, भड़काना, लड़ना सारे आरोप दोनों तरफ के लोगों पर लग रहे हैं. इस अरावली की पहाड़ी पर ऐसा नहीं कि छिपे हुए सारे लोग आरोपी या दोषी ही हैं. लेकिन सच ये भी है कि यहां छिपकर बैठे हुए सारे लोग निर्दोष भी नहीं है. अब ये चुनौती हरियाणा पुलिस के सामने है कि कैसे पाहड़ी पर निर्दोषों की भीड़ के बीच छिपे बैठे गुनहगारों को खोजकर निकालती है.
(आजतक ब्यूरो)