बलात्कार और हत्या के दोषी डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को बार-बार पैरोल देने के लिए हरियाणा सरकार सिख समूहों और विपक्षी दलों के निशाने पर है. एक आंकड़े के मुताबिक विवादास्पद डेरा प्रमुख को 2023 तक 133 दिनों से ज्यादा की पैरोल और फर्लो लीव दी गई है. राम रहीम को बार-बार पैरोल देने से विवाद भी शुरू हो गए हैं क्योंकि ये पैरोल या तो चुनाव से जुड़े थे या खेतों की देखभाल के लिए राम रहीम जेल से बाहर आया तो कभी पालक बेटियों की शादी जैसे अजीबोगरीब बहानों पर राम रहीम जेल से बाहर आया.
जेल से बाहर आकर राम रहीम ने ऑनलाइन सत्संगों को संबोधित करना शुरू किया या वीडियो जारी किए. इस दौरान चुनावी राज्यों के कई नेता उसके पास आशीर्वाद लेने भी पहुंचे. फिलहाल राम रहीम 40 दिन की पैरोल पर बाहर है. इस दौरान डेरा प्रमुख के 25 जनवरी को शाह सतनाम की जयंती समारोह में शामिल होने की संभावना है.
विपक्ष ने साधा निशाना
डेरा प्रमुख को बार-बार पैरोल दिए जाने को लेकर विपक्ष ने हरियाणा सरकार पर निशाना साधा है. इसके अलावा सिख समूह भी हरियाणा सरकार पर हमलावर हैं, क्योंकि ये सिख संगठन पूर्व खालिस्तानी आतंकवादियों (जिन्हें बंदी सिख कहा जाता है) की रिहाई की मांग कर रहे हैं जिन्होंने अपनी सजा पूरी कर ली है.
'बंदी सिखों को नहीं मिल रही रिहाई'
एसजीपीसी के प्रमुख हरजिंदर सिंह धामी ने केंद्र सरकार पर अल्पसंख्यकों के प्रति दोहरी नीति रखने का आरोप लगाया है, जो उनके अनुसार सिखों के बीच अविश्वास पैदा कर रहा है. उन्होंने कहा, अगर गुरमीत राम रहीम को कई बार पैरोल दी जा सकती है तो सरकार सिखों की आवाज को क्यों नजरअंदाज कर रही है. शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर बादल ने भी जेल में बंद सिखों को रिहा करने की मांग पर केंद्र सरकार की चुप्पी पर निराशा व्यक्त की है, जिन्होंने सजा पूरी कर ली है, लेकिन कथित तौर पर जेलों में बंद होने के लिए मजबूर किया जा रहा है.
हरियाणा कांग्रेस के प्रवक्ता केवल ढींगरा ने कहा, भाजपा नेता बदले में आशीर्वाद मांग रहे थे क्योंकि बाबा को अक्सर पैरोल मिलती थी.
पैरोल कानून के अनुसार दिए गए: हरियाणा सरकार
इस मामले के तूल पकड़ने के बाद रोहतक की सुनारिया जेल के अधिकारियों का कहना है कि ये आरोप बेबुनियाद हैं, क्योंकि पैरोल कानून के अनुसार दी गई थी. गुरमीत राम रहीम को इसी सुनरिया जेल में रखा जाता है. अधिकारियों ने बताया 11 अप्रैल 2022 को अधिसूचित हरियाणा सदाचार कैदी (अस्थायी रिहाई) अधिनियम, 2022 के अनुसार, दोषी कैदियों को नियमित पैरोल दी जा सकती है. हालांकि, कई हत्याओं या गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम के तहत दोषी कैदियों को पैरोल के योग्य नहीं होते हैं. पैरोल जेल में एक दोषी के आचरण पर मंजूरी और जिला प्रशासन से सुरक्षा मंजूरी के अधीन है जहां वह पैरोल अवधि के दौरान रहेगा.
सीएम खट्टर ने दी सफाई
इनके अलावा हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने भी आरोपों का खंडन करते हुए कहा है कि सब कुछ कानून के अनुसार किया गया था. हरियाणा भाजपा की प्रवक्ता परवीन अत्रेय से जब संपर्क किया गया तो उन्होंने विपक्षी कांग्रेस पर संविधान और कानून को चुनौती देने का आरोप लगाया.
परवीन अत्रेय ने कहा, 'गुरमीत राम रहीम को बलात्कार और हत्या के लिए दोषी ठहराया गया है और वह जेल की सजा काट रहा है. जेल मैनुअल के प्रावधानों के अनुसार पैरोल दी गई है. इन प्रावधानों पर किसी भी चर्चा या पूछताछ का मतलब कानून पर सवाल उठाना है. इस प्रावधान पर सवाल उठाने का मतलब संविधान को चुनौती देना है.'
कुछ ऐसा है राम रहीम की पैरोल का रिकॉर्ड-
2019-20: गुरमीत राम रहीम की पैरोल की 6 अर्जी खारिज की गईं.
2020: गुड़गांव के एक अस्पताल में भर्ती अपनी बीमार मां से मिलने के लिए 24 अक्टूबर को एक दिन की पैरोल दी गई.
2021: बीमार मां से मिलने के लिए 21 मई को एक दिन का पैरोल दी गई.
2022: गुरमीत राम रहीम 91 दिन जेल से बाहर रहा. फरवरी में 21 दिन (पंजाब विधानसभा चुनाव), जून में 30 दिन (हरियाणा नगर पालिका चुनाव) और अक्टूबर में 40 दिन (आदमपुर, हरियाणा और हिमाचल विधानसभा चुनाव).
2023: 40 दिन की पैरोल 21 जनवरी से शुरू हुई. वह 25 जनवरी को पूर्व डेरा प्रमुख की बरसी में हिस्सा लेने सिरसा जाएगा.