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मेरा नाम प्रद्युम्न था... मैं रेयान स्कूल में पढ़ता था.. मुझे क्यों मार डाला कंडक्टर अंकल?

मेरा नाम प्रद्युम्न था.मेरी उम्र सात साल थी. मैं और मेरी बहन गुड़गांव के रेयान स्कूल में पढ़ते थे. रोजाना की तरह उस दिन भी मेरे पापा मुझे और मेरी बड़ी बहन को स्कूल छोड़कर आए थे. मैं उस दिन बहुत खुश था. क्योंकि उस दिन मेरे एक दोस्त का जन्मदिन था.

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प्रद्युम्न
प्रद्युम्न

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गुड़गांव में सात साल के बच्चे प्रद्युम्न का इस तरह से दुनिया छोड़कर चले जाना इंसानियत के लिए बहुत बड़ी त्रासदी है. खासकर उस परिवार के लिए जिसकी तमाम खुशियां ही प्रद्युम्न से थीं. प्रद्युम्न की हत्या को लेकर समाज सकते में है और सिस्टम का सन्नाटा टूट रहा है. इस सबके बीच प्रद्युम्न की छोटी सी जिंदगी की यादें उसके परिवार को रुला रही हैं. प्रद्युम्न की मां का रो रोकर बुरा हाल है. अपने जिगर के टुकड़े की नटखट हरकतें, जो उन्हें हंसाती थीं, अब उसकी यादें प्रद्युम्न की मां को रुला रही हैं. प्रद्युम्न बादलों के पार अपनी मां का हाल देखकर रूआंसा हो रहा होगा. हमने प्रद्युम्न की छोटी सी ज़िंदगी की यादों को उसी के शब्दों में संजोया है...

मेरा नाम प्रद्युम्न था...मेरी उम्र सात साल थी... मैं और मेरी बहन गुड़गांव के रेयान स्कूल में पढ़ते थे. रोजाना की तरह उस दिन भी मेरे पापा मुझे और मेरी बड़ी बहन को स्कूल छोड़कर आए थे. मैं उस दिन बहुत खुश था. क्योंकि उस दिन मेरे एक दोस्त का जन्मदिन था.

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पापा हमें स्कूल छोड़कर गए. मुझे सूसू आई थी. मैं टॉयलेट में गया. टॉयलेट में मुझे कंडक्टर अंकल मिल गए. वहां वो कुछ गलत काम कर रहे थे. मैंने कंडक्टर अंकल से पूछा कि आप क्या कर रहे हैं. तो कंडक्टर अंकल ने मुझे बाथरूम के अंदर खींच लिया. मैंने कहा कि मैं आपकी शिकायत टीचर को कर दूंगा. तो उन्होंने मुझे जोर से जकड़ लिया और चाकू से गला काट दिया. मुझे बहुत तेज दर्द हो रहा था. मेरा दम घुट रहा था. सबकुछ धुंधला दिखाई दे रहा था.

मैं चला गया, अपनी प्यारी मां को छोड़कर. अपने प्यारे पापा को छोड़कर. पता नहीं क्यों कंडक्टर अंकल ने मुझे मार डाला. आखिर मेरा क्या कसूर था. कोई गलती की थी तो समझा देते, मैं समझ जाता. मेरी टीचर कहती थीं कि मैं बड़ा समझदार हूं.

जबसे मैं गया हूं. मेरी मां का रो-रोकर बुरा हाल है. मेरी मां मुझे बहुत प्यार करती है. मुझे पता है कि वो वर्ल्ड की बेस्ट मॉम हैं. अभी पिछले साल ही जब मैं फर्स्ट क्लास में हिंदी लिखना सीख रहा था.

मदर्स डे पर टीचर ने कहा कि मदर्स डे पर अपनी मम्मी को लेटर लिखो. मैंने अपनी दिल की बात लिखी थी, टूटी फूटी हिंदी में.आज मैं अपनी मां के बारे में बोलूंगा, मां तुम कितना काम करती हो, जब तुम्हारा काम खत्म हो जाता है तो तुम ट्यूशन के लिए परेशान हो जाती हो, जब तुम मुझे डांटती हो तो ऐसा लगता है कि मुझे प्यार कर रही हो.

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मैं अपनी मम्मी का लाडला था. मेरी शैतानियों पर झूठ मूठ के गुस्सा होती थी, लेकिन मैं जानता था कि वो मेरी फिक्र करती हैं. मुझे शैतानी करना पसंद था, लेकिन मुझे पढ़ना भी अच्छा लगता था. क्लास में फर्स्ट आने के लिए मैं खूब पढ़ाई करता था. कुछ ही दिन पहले मेरी मम्मी स्कूल आईं थीं, टीचरों से मेरी तारीफ सुनकर प्राउड फील कर रही थीं.

मेरी मम्मी रो रही हैं. मैं होता तो अपने हाथों से उनके आंसू पोंछता. उन्हें चुप करवाता, लेकिन मैं ऐसा नहीं कर पा रहा. मेरी क्या गलती थी कंडक्टर अंकल. मुझे क्यों मार दिया आपने?

सब कहते थे प्रद्युम्न तो अपनी बोली से ही दिल जीत लेता है. मेरी मम्मी पापा से कहती थीं कि पूरा मोहल्ला हमारे बेटे की तारीफ करता है. अब मेरा पूरा मोहल्ला मेरी तोतली आवाज के लिए तरस रहा है.

जबसे मैं गया हूं मेरी मां रोए जा रही है. मैं जानता हूं कि उन्हें मेरी याद आ रही है. मुझे भी उनकी याद सता रही है. मां कहती थी कि मैं घर की रौनक हूं. मेरे हंसने से घर में खुशी फैल जाती थी. जबसे मैं गया हूं, मेरे घर की सारी खुशियां चली गईं हैं. मुझे पता है कि मेरी मम्मी मेरी आवाज़ सुनने के लिए तरस रही हैं.

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मेरी मां मुझे ढूढ़ रही हैं. वो मेरे खिलौने देख रही हैं, मेरी किताबों को निहार रही हैं और कभी मेरे बिस्तर को सीने से लगा लेती हैं. वो मेरी हर चीज में मुझे तलाश रही हैं. मैं उनकी जिगर का टुकड़ा था, जिसे कंडक्टर अंकल ने उनसे छीन लिया.

मेरे मम्मी-पापा ने मुझे अपनी हैसियत से बढ़कर अच्छे स्कूल में भेजा था. ये सोचकर कि रेयान स्कूल से पढ़कर उनके बेटे का भविष्य सुरक्षित होगा. मैं स्कूल जाते हुए कभी नहीं रोया. मुझे तो स्कूल में बहुत मजा आता था. कभी कभी तो मुझे स्कूल से घर आने का मन ही नहीं करता था, लेकिन अब मैं वापस अपने घर जाना चाहता हूं. अपनी मां को गले लगाना चाहता हूं. अपनी बहन के साथ खेलना चाहता हूं, लेकिन मुझे पता है कि अब मैं कभी अपने घर नहीं जा सकूंगा.

मां मैं अब कभी नहीं लौट पाऊंगा, लेकिन मुझे पता है कि तुम मुझे कभी नहीं भूल पाओगे. मुझे ये भी पता है कि तुम मेरे लिए पापा के साथ मिलकर न्याय की लड़ाई लड़ोगी ताकि किसी और मां को तुम्हारी तरह अपने बच्चे के गम में आंसू ना बहाना पड़े.

माता पिता ने बयां की आपबीती

प्रद्युम्न की मां ने बताया‍ कि उस दिन मेरा बच्चा हंसते हुए बाय करते हुए गया. इसके बाद स्कूल से फोन आया कि बाथरूम में गिर गया है और फोर्टिंस आ जाओ, हम बच्चे को लेकर जा रहे हैं. वहीं प्रद्युम्न के पिता ने बताया‍ कि प्रद्युम्न बहुत जॉली और बहुत इमोश्नल था. उसने अपनी मां की तारीफ करते हुए एक लेटर लिखा था और कार्टून जैसा भी बनाया था. वहीं मां कहती हैं कि प्रद्युम्न बहुत सीधा सा था. बहुत मासूम सा था. सबका दिल जीत लेता था. हमारे मोहल्ले के सब लोग सिर्फ उसके बोलने के पीछे पागल थे. इतने प्यार से वो सबको अंकल, आंटी कहकर बात करता था. मेरे बच्चे पर कोई अंगुली नहीं उठा सकता. मेरी परवरिश इतना अच्छी थी. मेरा बच्चा बहुत अच्छा था. बहुत इंटेलिजेंट था. अपनी औकात से ज्यादा बढ़ाकर पढ़ा रहे थे. सोचते थे बच्चा पढ़ लेगा तो सब ठीक हो जाएगा.

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