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रेसलर्स को सता रही फ्यूचर की टेंशन, बोले- सीनियर्स का ये हाल तो हमारा क्या होगा...

पिछले करीब एक महीने से धरने पर बैठे रेसलर्स ने रविवार को नए संसद भवन की ओर मार्च शुरू कर दिया. उन्हें रोकने के लिए बैरिकेड्स लगाकर खड़ी दिल्ली पुलिस ने कई पहलवानों को हिरासत में ले लिया. बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया, लेकिन पुलिस के इस एक्शन ने कुश्ती में भविष्य बनाने आए युवा खिलाड़ियों को चिंता में डाल दिया.

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नए संसद भवन के लिए पैदल मार्च निकालने पर पुलिस ने जैसे की कार्रवाई शुरू की फोगाट बहनें सड़क पर लेट गईं.
नए संसद भवन के लिए पैदल मार्च निकालने पर पुलिस ने जैसे की कार्रवाई शुरू की फोगाट बहनें सड़क पर लेट गईं.

दिल्ली के जंतर-मंतर में पुलिस और पहलवानों के बीच रविवार को हुए टकराव के बाद अब अलग-अलग कोच और युवा पहलवानों की प्रतिक्रिया भी आने लगी है. युवा खिलाड़ियों का कहना है कि इस घटनाक्रम का असर पूरे खेल पर पड़ रहा है. अब तो परिजन भी उनसे इस बारे में सवाल पूछने लगे हैं.

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कोच ने रविवार की घटना को शर्मनाक करार दिया है. उनका कहना है कि युवा पहलवानों के परिवार को अब अपने बेटे और बेटियों के भविष्य की चिंता सताने लगी है. उन्होंने यह सवाल भी उठाया है कि अगर पहलवानों की बात में सच्चाई नहीं है तो वह खेल का मैदान छोड़कर धरने पर क्यों बैठे हैं? आजतक ने ऐसे ही कुछ कोच और युवा खिलाड़ियों से बात की. आइए जानते हैं कि इस पूरे घटनाक्रम पर उनका क्या कहना है.

आरोपों पर बात करने से किया इनकार

युवा खिलाड़ी गीतांजली चौधरी ने बृजभूषण शरण सिंह पर लगे आरोपों पर कुछ कहने से मना कर दिया. उन्होंने कहा कि आरोपों पर कुछ नहीं कहा जा सकता. लेकिन रविवार को सीनियर खिलाड़ियों के साथ जो हुआ, वह बहुत गलत था. वहीं, एक महिला कोच ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि पहलवान शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने जा रहे थे. लेकिन उन्हें रोकने के लिए महिला खिलाड़ियों को घसीटा और डिटेन भी किया गया.

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दिल्ली पुलिस के एक्शन की हो रही निंदा

उन्होंने आगे कहा कि यह सब देखकर बहुत दुख हुआ है कि किस तरह पहलवानों के साथ सरकार दुर्व्यवहार कर रही है. उन्होंने दिल्ली पुलिस के एक्शन की निंदा की और कहा, 'दिल्ली पुलिस को पहलवानों के साथ इस तरह का बर्ताव नहीं करना चाहिए था, क्योंकि पहलवान किसी के साथ मारपीट और जबरदस्ती नहीं कर रहे थे. दिल्ली पुलिस ने पहलवानों पर जो मामला दर्ज किया है, वह बिल्कुल गलत है. पहलवानों को जबरदस्ती घसीट कर बसों में डाला गया. जो लोग भी पहलवानों के समर्थन में जा रहे थे, उन्हें भी डिटेन किया गया. 

सुनवाई कर न्याय देने की हो रही मांग

महिला कोच ने आगे कहा कि प्रदर्शन के लिए पहलवान जब जंतर-मंतर से चलने की तैयारी कर रहे थे, उस समय उनके साथ बदतमीजी की गई. साक्षी को सड़क पर गिराकर उसके मुंह पर पैर रखा गया. इस तरह की घटना को देखकर जो बच्चे रेसलिंग की तरफ जाना चाहते हैं, वह भी पीछे हटने के बारे में सोचने लगे हैं. पिछले एक महीने से जो पहलवान जंतर-मंतर पर बैठे हैं, उनके पास कोई पुख्ता सबूत होंगे. नहीं तो कोई दो या तीन दिन भी धरने पर नहीं बैठ सकता. सरकार को पहलवानों की सुनवाई कर उन्हें न्याय देना चाहिए.

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पद्मश्री बजरंग पूनिया को भी घसीटा

खिलाड़ी शिक्षक खरब ने कहा कि सीनियर पहलवानों के साथ कल गलत हुआ. पद्मश्री से सम्मानित बजरंग पूनिया को भी रोड पर घसीटा गया. ऐसे में देश के भविष्य को लेकर खतरा नजर आने लगा है. ऐसी घटनाओं को देखकर हम रेसलिंग से दूर होने का विचार भी करने लगे हैं. इतने सीनियर खिलाड़ियों के साथ यह सब हो रहा है तो हमारी इज्जत तो वैसे भी नहीं होगी. दिल्ली पुलिस का पहलवानों पर मामला दर्ज करना गलत है.

खिलाड़ियों ने लगाए गंभीर आरोप

बता दें कि पहलवान पिछले करीब एक महीने से जंतर-मंतर पर बीजेपी सांसद बृजभूषण शरण सिंह की गिरफ्तारी की मांग को लेकर धरना दे रहे थे, लेकिन रविवार को पुलिस के साथ हुई झड़प के बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया. हालांकि, देर रात उन्हें रिहा भी कर दिया गया. डब्ल्यूएफआई प्रमुख बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न का आरोप लगा था. इसके बाद ओलंपिक पदक विजेता साक्षी मलिक, विनेश फोगाट, बजरंग पूनिया समेत कई पहलवान 23 अप्रैल को जंतर-मंतर पर धरने पर बैठ गए थे.

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