हिमाचल प्रदेश के किन्नौर में हुए भूस्खलन के बाद रेस्क्यू ऑपेरशन जारी है. मलबे में दबी बस का पता चल गया है. बस सड़क से 500 मीटर नीचे खाई में मिली है. बस के अलावा चट्टानों की चपेट में कई गाड़ियां आई. सुमो गाड़ी में सवार सभी 8 लोगों की मौत हो गई है. इस हादसे में अब तक कुल 13 मौतें हो चुकी है. रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है.
भूस्खलन के बाद मौके पर खौफनाक मंजर दिखा. करीब 200 मीटर का इलाका मलबे से पट गया. घटनास्थल पर 4 एंबुलेंस, 11 गाड़ियां और रेस्क्यू की कई मशीनें मौजूद है. तकरीबन 100 लोगों के खाने पीने का इंतजाम है.
बता दें कि किन्नौर जिला के चौरा और निगुलसरी के बीच नेशनल हाईवे पर कल दिन के 11 बज कर 56 मिनट पर पहाड़ दरका और हाहाकार मच गया. पत्थर, मिट्टी और मलबा अंधांधुंध ऐसे गिरा कि उसने कई जिंदगियों को अपने चपेट में ले लिया. यात्रियों से भरी बस मलबे में दब गई.
पहाड़ों से इतना ज्यादा मलबा गिरा कि किन्नौर के रेकॉन्ग पिओ से शिमला होते हुए हरिद्वार जा रही बस का घंटों अता-पता नहीं चला. पूरी रात बेचैनी में गुजरी क्योंकि अंधेरा घिरने की वजह से रेस्क्यू ऑपरेशन रोकना पड़ा, लेकिन सुबह जैसे ही आईटीबीपी के जवानों ने जैसे ही रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया, वैसे ही बड़ी राहत की खबर मिली.
जिस बस का कल तक अता-पता नहीं था वो बस मलबे में नजर आ गई. बस सड़क से पांच सौ मीटर नीचे और सतलज नदी के पानी की सतह से 200 मीटर लटकी पड़ी थी. उस बस में कितने यात्री सवार थे, इसका अभी-अभी ठीक पता नहीं चला है हालांकि दावा किया जा रहा है कि बस में 25 से ज्यादा मुसाफिर सवार थे.
आईटीबीपी के मुताबिक राहतकर्मियों को बस तक पहुंचने में अभी भी काफी वक्त लग सकता है क्योंकि जहां पर बस फंसी है वहां तक पहुंचना काफी मुश्किल है. खैर इस हादसे की तस्वीरें भयावह हैं. यहां की तस्वीरें बता रही हैं कि कितनी भारी तबाही मची है.
हादसे की खबर मिलने के बाद से ही एनडीआरएफ और एसडीआरएफ का बचाल दल रेस्क्यू ऑपरेशन में लगा है. फावड़ों और जेसीबी मशीनों से मलबे को हटाना का काम अनवरत जारी है. हिमाचल प्रदेश में लैंडस्लाइड की लगातार होती आपदा को देखते हुए NDRF और SDRF को पहले ही अलर्ट पर रखा था.
जानकारी के मुताबिक 200 से ज्यादा जवान राहत बचाव में लगे हुए हैं. हालांकि लोगों की शिकायत है कि राहत ऑपरेशन शुरू होने में काफी देरी हुई. किन्नौर और सिरमौर दोनों ही इलाकों में पहाड़ों के दरकने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं. हालांकि किन्नौर के इलाके में पहाड़ जब दरकते हैं तब मिट्टी और मलबा नहीं बड़े-बड़े चट्टान गिरते हैं.
(सभी फोटो- PTI)