हिमाचल में राज्यसभा चुनाव के बाद मची सियासी हलचल अब थम गई है. कांग्रेस ने सूबे में सरकार भी बचा ली है. आज प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस पर्यवेक्षक डीके शिवकुमार ने कहा कि सुखविंदर सुक्खू ही मुख्यमंत्री रहेंगे. वहीं, क्रॉस वोटिंग के साथ ही व्हिप का उल्लंघन करने वाले कांग्रेस के 6 विधायकों को अयोग्य ठहराए जाने से हिमाचल कांग्रेस सरकार को बड़ी राहत मिली है. सीएम सुक्खू के खेमे ने दावा किया है कि अयोग्यता से गुट को एकजुट रखने में मदद मिलेगी.
उधर, जयराम ठाकुर ने कहा कि यह सरकार लंबे समय तक नहीं चलेगी. ऐसे कई लोग हैं, जो अभी भी इस सरकार से खुश नहीं हैं. बागी विधायक रवि ठाकुर के दावों पर उन्होंने कहा कि कांग्रेस बागी विधायकों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है, यह प्रतिशोध की राजनीति है. हिमाचल प्रदेश विधानसभा से 15 विधायकों के निलंबन पर जयराम ठाकुर ने कहा कि पूरे देश ने 'देवभूमि' हिमाचल प्रदेश में राजनीतिक घटनाओं को देखा है. अगर कांग्रेस के पास बहुमत था, तो डिवीजन बोर्ड क्यों नहीं बनाया गया जो हमने मांगा था. उन्होंने सवाल पूछा कि सदन क्यों स्थगित किया गया? अगर कांग्रेस के पास बहुमत था तो भाजपा के 15 विधायकों को निलंबित क्यों किया गया?
बता दें कि आज उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री समेत 32 कांग्रेस विधायक नाश्ते पर सुखविंदर सिंह सुक्खू के सरकारी आवास ओकओवर पहुंचे और दोपहर के भोजन तक वहीं रहे. बाद में विक्रमादित्य सिंह और एचपीसीसी प्रमुख प्रतिभा सिंह भी उनके साथ शामिल हो गईं. उनके साथ डीके शिव कुमार भी थे. कांग्रेस विधायकों को अयोग्य ठहराए जाने से बीजेपी को झटका लगा है.
बीजेपी ने भले ही असंतुष्ट कांग्रेस विधायकों की मदद से राज्यसभा सीट जीत ली हो और कांग्रेस सरकार को कुछ हद तक परेशान कर दिया हो, लेकिन कांग्रेस को अभी भी बहुमत हासिल है. हालांकि बीजेपी ने दावा किया कि कांग्रेस के कई विधायक पाला बदलने के इच्छुक हैं, लेकिन अयोग्यता से जहां एक ओर कांग्रेस में कुछ समय के लिए असंतोष रुक सकता है. वहीं, कांग्रेस के विधायकों को अपने पाले में लाने के भाजपा के सपने को भी चकनाचूर कर दिया है.
अयोग्यता के बाद कांग्रेस के विधायकों की संख्या घटकर 34 हो गई है, लेकिन उसे अभी भी बहुमत हासिल है, क्योंकि बीजेपी के पास आधिकारिक तौर पर सिर्फ 25 विधायक हैं. भले ही 3 निर्दलीय भाजपा का समर्थन करें, जैसा कि उन्होंने राज्यसभा चुनाव के दौरान किया था. इसके बाद भी ये संख्या बढ़कर 28 से अधिक नहीं होगी. इससे पहले बजट पारित होने के दौरान मत विभाजन कराने की बीजेपी की पहली रणनीति भी काम नहीं आई, क्योंकि स्पीकर ने 15 बीजेपी सदस्यों को निलंबित कर दिया था. शेष 10 सदस्यों ने भी कसरत की, जिससे सत्तारूढ़ कांग्रेस को ध्वनि मत से बजट पारित करने का पर्याप्त अवसर मिला.
बीजेपी ने सदस्यों की अयोग्यता और निलंबन को अवैध बताया है. उधर, अयोग्य ठहराए गए विधायकों ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. बता दें कि अयोग्य ठहराए गए कांग्रेस विधायकों से संपर्क करने के प्रयास किए गए, लेकिन सफल नहीं हुए, क्योंकि उन्होंने अपने मोबाइल फोन बंद कर दिए हैं. आजतक ने धर्मशाला विधायक सुधीर शर्मा को भी फोन करने की कोशिश की, जिन्होंने कोई जवाब नहीं दिया. व्हाट्सएप मैसेज में सुधीर शर्मा ने दावा किया कि केवल एक अयोग्य विधायक को कारण बताओ नोटिस मिला है. उन्होंने कहा कि वे स्पीकर के फैसले को कोर्ट में चुनौती देंगे. सुधीर शर्मा ने कहा कि सरकार का फैसला लोगों के हित में जाना है.