हिमाचल प्रदेश में भूकंप का एक जोरदार झटका कभी भी लाखों लोगों की जान के लिए मुसीबत बन सकता है. हिमाचल प्रदेश सरकर और नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी के बीच हुई बैठक में ये चौंका देने वाला खुलासा हुआ है, जिसके मुताबिक़ हिमाचल प्रदेश के शिमला, सुंदरनगर और धर्मशाला जोन में जोरदार भूकंप का एक झटका ही भारी तबाही के लिए काफी होगा. इसके अलावा हिमाचल में तेजी से पिघलने वाले ग्लेशियरों से बनने वाली झीलें भी आने वाले समय में खतरे की दस्तक अभी से ही देने लगी हैं.
नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी ने हिमाचल में भूकंप आने की आशंका जतायी है. हिमाचल प्रदेश पहाड़ी राज्य है और यहां के कई इलाके सिंकिंग जोन में आते हैं. लिहाजा यहां भूकंप लोगों की जान के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है. इसके बाद राज्य सरकार ने भूकंप की संभावना को देखते हुए अभी से ही लोगों को आगाह करना शुरू कर दिया है. शिमला जैसी जगह पर अगर भूकंप आता है तो यहां कई जानें जा सकती हैं, जिसका कारण बेतरतीब तरीके से बनाये गए भवन हैं, जो कि भूकंप को सहन नहीं कर सकते हैं.
शिमला में करीब तीन लाख की आबादी है. हिमाचल प्रदेश के मुख्य सचिव सुद्रिप्तो राय का कहना है की सरकार अपनी तरफ से तो स्थिति से निपटने के लिए तैयार है, लेकिन जनता को भी इस बाबत चौकन्ना रहना बेहद जरूरी होगा. मुख्य सचिव ने कहा कि नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी के साथ हुई बैठक के दौरान ये बात भी सामने आई की 1905 में भूकंप ने अकेले कांगड़ा जिला में ही करीब 20000 लोगों की जान ले ली थी, वहीँ हर सौ साल में एक बहुत बड़ा भूकंप आने की सम्भावना से इनकार नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा कि नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी ने एक सिमुलेशन किया है, जिसमें सुंदर नगर एपिसेंटर दिखाकर कहा है कि अगर भूकंप आता है और एक मिनट से कम समय तक भूकप रहता है तो एक लाख लोगो की मौत हो सख्ती है और इसको लेकर सरकार अलर्ट है. लोगो को भी आगाह कर रही है, मुख्य सचिव ने भी माना की शिमला और अन्य शहरों में भवन बेतरतीब तरीके से बनाये गए हैं और अगर भूकंप आता है तो काफी नुकसान भी हो सकता है.
नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी और हिमाचल सरकार के बीच हुई बैठक में तेजी से पिघलते ग्लेशियरों के कारण बनी कई झीलें भी आने वाले समय में एक बड़ा खतरा बन सकती हैं. ये झीलें भी इस पर्वतीय राज्य के उन इलाकों में भारी तबाही का कारण बन सकती हैं पहले से ही जहां नदियां और नाले मौजूद हैं.
इस बैठक के बाद अब राज्य सरकार ज्यादा आबादी वाले इलाकों में भवन निर्माण कार्यों के कानून को कड़ा करने पर विचार कर रही है. मुख्य सचिव सुद्रिप्तो राय का कहना है की पिछले 50 सालों में शिमला में बड़ी संख्या में ऐसे भवनों का निर्माण हुआ है जो भूकंप की दृष्टी से बेहद खतरनाक हैं. ऐसे भवनों को सरकार ने सुरक्षित घोषित किया हुआ है. सुद्रिप्तो राय का कहना है कि शिमला के डी कंजशन पर अब सरकार नई योजनाएं तैयार कर रही है ताकि भूकंप के समय उस समय की स्थिति से निपटा जा सके.
हिमाचल में 100 साल के बाद एक बार दोबारा जबरदस्त भूकंप आने की आशंका जतायी जा रही है. 1905 में आये भूकंप ने सिर्फ कांगड़ा में ही करीब 20000 लोगों की जान ले ली थी. नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी ने किसी भी समय शिमला, सुंदरनगर और धर्मशाला में भूकंप से सबसे ज्यादा तबाही की जताई आशंका जतायी है. नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी ने पिघलते ग्लेशियरों से बनी झीलों के लिए भी सरकार को आगाह किया है. ग्लेशियर पिघलने के कारण बनी झीलें भी बड़ा खतरा बन सकती हैं.