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हिमाचल का मामला हाथ से निकल चुका है! एक और बगावत के खतरे के बीच कांग्रेस हाईकमान अभी इंतजार के मूड में

हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस के अंदर एक और बगावत हो सकती है. विधायकों का बड़ा हिस्सा सीएम सुक्खू से नाराज चल रहा है और अंदरखाने निराशा गहरा रही है. ऐसे में हाईकमान के सामने सरकार बचाना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है. कहा जा रहा है कि कांग्रेस के भीतर असंतोष खत्म के प्रयासों में पूरी तरह सफलता नहीं मिली है.

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मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के साथ हिमाचल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह. (फोटो: पीटीआई)
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के साथ हिमाचल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह. (फोटो: पीटीआई)

हिमाचल कांग्रेस में सबकुछ ठीक नहीं है. अभी भी अंदरखाने बगावत की आग सुलग रही है. कहा जा रहा है कि विधायकों की नाराजगी दूर नहीं हुई है और किसी भी वक्त सुक्खू सरकार को झटका दिया जा सकता है. सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू से विधायकों का एक बड़ा गुट नाराज है. ऐसे में सरकार बचाना बड़ी चुनौती बनी हुई है. फिलहाल, यह लड़ाई दिल्ली तक पहुंच गई है. 

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हिमाचल प्रदेश में बीते तीन दिन से राजनीतिक संकट देखने को मिल रहा था. हालांकि, मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू फिलहाल इस नाराजगी को दूर रखने में कामयाब रहे हैं. लेकिन, अभी भी खबरें आ रही हैं कि पार्टी के अंदर तनाव खत्म नहीं हुआ है. क्योंकि प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह और उनके बेटे विक्रमादित्य सिंह 6 अयोग्य कांग्रेस विधायकों के समर्थन में आ गए हैं. उन्होंने कार्रवाई पर निराशा जाहिर की है. इन विधायकों ने राज्यसभा चुनाव में बीजेपी के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की थी.

'मां-बेटे की जोड़ी भी सरकार से नाराज'

प्रतिभा सिंह ने कहा, नाराज विधायक सिर्फ यही चाहते थे कि उनकी बात सुनी जाए. इस बीच, विक्रमादित्य सिंह अचानक चंडीगढ़ पहुंच गए और बागी विधायकों से मुलाकात की है. सरकार से नाराजगी के बीच विक्रमादित्य ने भी कैबिनेट मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था. बाद में हाईकमान से बातचीत होने पर इस्तीफा वापस लेने की बात कही थी. 

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'सुक्खू को हटाने की मांग कर रहे हैं विधायक'

सूत्र का कहना है कि गुरुवार को ऑब्जर्वर ने भले ही प्रतिभा सिंह और सीएम सुक्खू के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता की. लेकिन, पार्टी के अंदर तनाव बरकरार है और सरकार बहुत कमजोर स्थिति में है. घटनाक्रम से जुड़े सूत्र ने बताया कि कई विधायक सुक्खू से नाखुश हैं और उन्हें हटाने की मांग करते आ रहे हैं. इन विधायकों ने कुछ आरोप भी लगाए हैं. उनका कहना है....

1). मुख्यमंत्री फाइलों को ट्रांसफर करने से इनकार करते हैं. ओछी राजनीति में संलिप्त रहते हैं.
2). जब विधायक काम के लिए संपर्क करते हैं तो वे उन्हें लंबे समय तक इंतजार कराते हैं और उनका अपमान करते हैं.
3). मुख्यमंत्री प्रतिशोध की राजनीति में लिप्त रहते हैं. वे अपने ही निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस विधायकों की संख्या कम कर रहे हैं.

'दिल्ली हाईकमान की बात भी नहीं सुन रहे हैं सुक्खू?'

पिछले एक साल में ऐसे कई मौके आए हैं, जब सुक्खू ने पार्टी के आदेशों की अवहेलना की है. सूत्र बताते हैं कि सुक्खू को खुली छूट मिली हुई है और वो विधायकों की तो बात ही छोड़िए, उन्होंने दिल्ली में कांग्रेस नेतृत्व की बात मानने से भी इनकार कर दिया है. सीएम के खिलाफ लगातार शिकायतों के बाद कुछ महीने पहले दिल्ली में एक बड़ी बैठक हुई थी, जिसमें पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल, सीएम सुक्खू और प्रदेश प्रभारी राजीव शुक्ला मौजूद थे. पार्टी नेतृत्व को इस बात से अवगत कराया गया कि पार्टी में गंभीर असंतोष चल रहा है. विधायक सरकार के कामकाज से नाखुश हैं और बगावत की स्थिति पैदा हो रही है, जो सरकार को हिला सकती है.

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'गारंटी देते रहे सुक्खू, विधायकों ने कर दिया खेल!'

सुक्खू को राजेंद्र राणा और सुधीर शर्मा जैसे वरिष्ठ नेताओं को समायोजित करने के लिए कहा गया था. क्योंकि वे खुद को कमजोर महसूस कर रहे थे और बड़े कदम उठा सकते थे. हालांकि सीएम अनभिज्ञ बने रहे और नेतृत्व को आश्वासन दिया कि सब कुछ नियंत्रण में है. सुक्खू ने यहां तक कहा कि वो गारंटी देते हैं कि सरकार पांच साल चलेगी. उन्होंने राज्यसभा चुनावों में क्रॉस वोटिंग की संभावना से भी इनकार कर दिया और तब भी वे अति आत्मविश्वास में रहे, जब पहला वोट कांग्रेस के खिलाफ पड़ा.

'हाईकमान के हाथ से निकल चुका मामला?'

फिलहाल, ऑब्जर्वर ने कोई फिजिकली रिपोर्ट पेश नहीं की है. संभावना है कि उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष को टेलीफोन पर पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी है. हालांकि अंडरलाइनिंग फैक्ट यही है कि मामला हाथ से निकल चुका है और जब तक मौजूदा मुख्यमंत्री को नहीं बदला जाता, तब तक नाराजगी दूर करने की कवायद परवान चढ़ने की संभावना बेहद कम है. सूत्रों का कहना है कि हाईकमान फिलहाल रातोंरात नेतृत्व बदलने का फैसला लेने के बजाय एक महीने तक इंतजार करना चाहता है. ऐसे हालात में विधायकों के धैर्य की परीक्षा हो रही है और नेतृत्व जानता है कि वो कड़ी राह पर आगे बढ़ रहा है.

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'दिल्ली जाने में क्या बुराई है?'

वहीं, चंडीगढ़ में कांग्रेस के निष्कासित 6 विधायकों से विक्रमादित्य की मुलाकात पर ऑब्जर्वर भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा, किसी से मिलने में कोई ऐतराज नहीं है. वो आपस में सब दोस्त रहे हैं. मिलने में कोई बुराई नहीं है. विक्रमादित्य के दिल्ली जाने पर हुड्डा ने कहा, अपने कामों को लेकर दिल्ली जाने में क्या बुराई है. उन्होंने आगे कहा, हिमाचल प्रदेश में 5 साल कांग्रेस की सरकार चलेगी और सुखविंदर सिंह सुक्खू मुख्यमंत्री हैं.
 

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