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बस एक वोट का सवाल है! हिमाचल में BJP-कांग्रेस की अलग टाइप की मजबूरी, दोनों ही नहीं चाहते अपना स्पीकर, जानिए क्यों

हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस के छह विधायकों समेत सरकार का समर्थन करने वाले नौ एमएलए ने राज्यसभा चुनाव में बीजेपी उम्मीदवार को वोट किया है. इसके बाद सुक्खू सरकार के भविष्य पर सवाल खड़े हो रहे हैं तो वहीं बदली परिस्थितियों में बीजेपी और कांग्रेस, दोनों की ही अलग टाइप की मजबूरी है.

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विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर और सीएम सुखविंदर सुक्खू
विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर और सीएम सुखविंदर सुक्खू

हिमाचल प्रदेश की विधानसभा में बजट सत्र चल रहा है और बीच सत्र में ही सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार संकट में आ गई है. राज्यसभा की एक सीट के लिए हुए चुनाव में सत्ताधारी कांग्रेस अपने 40 और दो निर्दलियों समेत तीन अन्य विधायकों के समर्थन के साथ गई थी. राज्यसभा चुनाव के नतीजे आए तो नंबरगेम बदल गया. वोटों का गणित ऐसा बैठा कि कांग्रेस न सिर्फ वो सीट हार गई जिस पर उसकी जीत तय मानी जा रही थी, बल्कि अब सुक्खू सरकार के भविष्य को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं.

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विधानसभा का नंबरगेम ऐसा उलझा है कि राज्यसभा चुनाव में पार्टी लाइन के खिलाफ जाकर क्रॉस वोटिंग करने वाले विधायकों पर एक्शन लेने से कांग्रेस कतरा रही है तो वहीं विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) भी आक्रामक मोड में आ गई है. हिमाचल विधानसभा में विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर सुबह-सुबह ही राजभवन पहुंच गए. जयराम ठाकुर ने कहा है कि हम फाइनेंस बिल से पहले डिवीजन वोटिंग चाहते हैं. उन्होंने पहले भी जरूरत के समय यह मांग उठाए जाने का हवाला दिया और यह भी कहा कि स्पीकर इसकी अनुमति नहीं दे रहे हैं.

जयराम ठाकुर बीजेपी विधायकों को साथ लेकर राजभवन पहुंचे थे. वह डिविजन ऑफ वोटिंग की बात तो कर रहे हैं, बीजेपी विधायकों के सस्पेंशन की आशंका भी जता रहे हैं, यह भी कह रहे हैं कि सु्क्खू सरकार अल्पमत में आ गई है. लेकिन उन्होंने न तो सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की बात कही और ना ही स्पीकर को हटाने की. राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग और उसके बाद छह विधायकों के बीजेपी की सरकार वाले हरियाणा के पंचकूला पहुंच जाने को ऑपरेशन लोटस से जोड़कर देखा जा रहा है. नंबरगेम भी फंस गया है लेकिन विपक्ष सरकार को बहुमत साबित करने की चुनौती देने की जगह डिवीजन वोटिंग की डिमांड कर रहा है तो उसके पीछे क्या है?

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डिवीजन वोटिंग की डिमांड क्यों

जयराम ठाकुर डिवीजन वोटिंग की डिमांड कर रहे हैं तो यह फूंक-फूंक कर कदम रखने की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है. दरअसल, कांग्रेस के छह विधायकों ने राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग की और तीन विधायक भी सरकार का साथ छोड़ गए लेकिन इन सबके बावजूद विधानसभा का नंबरगेम टाइट है.

बीजेपी विधायकों ने राज्यपाल से की मुलाकात
बीजेपी विधायकों ने राज्यपाल से की मुलाकात

कांग्रेस के पास अब भी स्पीकर समेत 34 विधायकों का समर्थन है. अब अगर डिवीजन वोटिंग होती है तो सरकार के पास 33 वोट होंगे और विपक्ष को यह उम्मीद है कि 34 वोट के साथ प्रस्ताव गिर जाएगा. ऐसे में विधानसभा से ही यह संदेश चला जाएगा कि सुक्खू सरकार अल्पमत में है. इस स्थिति को समझने के लिए विधानसभा के नंबरगेम की चर्चा जरूरी है.

हिमाचल विधानसभा में क्या है नंबरगेम

हिमाचल विधानसभा की स्ट्रेंथ 68 विधायकों की है. कांग्रेस के 40 विधायक हैं जिनमें से छह विधायकों ने राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग की थी. ये सभी विधायक हरियाणा के पंचकूला स्थित एक होटल में हैं. सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आरोप भी लगाया है कि हरियाणा पुलिस ने हमारे विधायकों को किडनैप कर लिया है.

कांग्रेस के अपने विधायकों की संख्या बागियों को हटा दें तो 34 पर आ गई है. दो निर्दलीय समेत तीन अन्य विधायकों ने भी राज्यसभा चुनाव में बीजेपी को वोट किया था. बीजेपी के 25 विधायक हैं और कांग्रेस के छह बागियों के साथ ही तीन अन्य को भी जोड़ लें तो सरकार के खिलाफ यानि जो विधायक फिलहाल विपक्ष में नजर आ रहे हैं, उनकी तादाद भी सत्तापक्ष के बराबर 34 ही है.

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मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू (फाइल फोटोः पीटीआई)
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू (फाइल फोटोः पीटीआई)

दोनों दल क्यों नहीं चाहते अपना स्पीकर

हाल ही में बिहार का सत्ता परिवर्तन हो या महाराष्ट्र से लेकर मध्य प्रदेश के पुराने घटनाक्रम, इस तरह के हालात में सबसे पहले निशाने पर स्पीकर होता है. विपक्षी पार्टियां सत्ता परिवर्तन से पहले अपना स्पीकर बनाने की कवायद शुरू करती हैं लेकिन हिमाचल प्रदेश में हालात उलट नजर आ रहे हैं. विधानसभा में नंबरगेम ऐसा फंसा है कि सत्तापक्ष हो या विपक्ष, इस सियासी लड़ाई में अन्य राज्यों की तरह स्पीकर का आसन सेंटर पॉइंट नहीं है.

यह भी पढ़ें: हिमाचल में हलचल तेज, राज्यपाल से मिले विधानसभा स्पीकर, पंचकूला से शिमला रवाना हुए कांग्रेस के बागी विधायक

इस समय स्पीकर कांग्रेस के हैं और उनके आसन पर रहने की स्थिति में बागियों को हटा दें तो सुक्खू सरकार के पास 33 विधायकों का समर्थन बचता है और अगर कांग्रेस के बागी, निर्दलीय डिवीजन वोटिंग के दौरान भी बीजेपी के साथ जाते हैं तो विपक्ष में 34 वोट हो जाएंगे. ऐसे में विपक्ष विधानसभा से यह संदेश देने में सफल रहेगा कि सरकार अल्पमत में है. हो सकता है कि बीजेपी फाइनेंस बिल पर वोटिंग में कौन साथ है, कौन खिलाफ? इसका आकलन करने के बाद अविश्वास प्रस्ताव लाए. इस स्थिति में भी बीजेपी बहुमत परीक्षण तक अपने खेमे का स्पीकर बनाना नहीं चाहेगी. क्योंकि स्पीकर के आसन पर जिस पार्टी का विधायक होगा, उसका संख्याबल एक कम हो जाएगा.

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इसे इस तरह से भी समझ सकते हैं कि कांग्रेस के स्पीकर को हटाकर बीजेपी अगर अपना स्पीकर बनाती है तो फिर बीजेपी का संख्याबल 33 हो जाएगा और कांग्रेस नंबरगेम में एक आगे 34 पर पहुंच जाएगी. कहा यह भी जा रहा है कि राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग झांकी है, बीजेपी की रणनीति अब कांग्रेस के और विधायकों को भी अपने पाले में लाने की होगी. कांग्रेस के बागी छह विधायक अगर दल बदलते हैं तो उनको दल-बदल अधिनियम के तहत अयोग्य ठहराए जाने का खतरा भी है. अयोग्यता की कार्यवाही से बचने के लिए दो तिहाई यानी कांग्रेस के कुल 27 विधायकों के पालाबदल की जरूरत होगी जो मुश्किल माना जा रहा है.

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