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हिमाचल प्रदेश के शिमला के कोटखाई में हुए गुड़िया रेप-मर्डर मामले में फंसे IPS जहूर हैदर जैदी की सेवाएं बहाल कर दी गई हैं. उन्हे पुलिस मुख्यालय में रिपोर्ट करने को कहा गया है. ज़ैदी 2017 में शिमला जिले के कोटखाई में एक नाबालिग स्कूली छात्रा से सामूहिक बलात्कार और मर्डर के आरोप में गिरफ्तार किए गए सूरज की हिरासत में मौत मामले में निलंबित चल रहे थे.
बाद में आईपीएस अधिकारी सौम्या सांबासिवन ने आरोप लगाया था कि जैदी उन पर दबाव बना रहे थे. 15 जनवरी, 2020 को जैदी को गृह विभाग द्वारा जारी एक अधिसूचना के माध्यम से निलंबित कर दिया गया था. जिसमें कहा गया था कि इस मामले में रिकॉर्ड और दस्तावेजों का अवलोकन किया गया है. जिसमें आरोप लगाए गए थे कि सौम्य संबासिवन ने जहूर हैदर जैदी की ओर से गंभीर कदाचार और ईमानदारी और कर्तव्य के प्रति समर्पण की कमी का खुलासा किया है जो एक अधिकारी के लिए अनुचित है.
बता दें कि 4 जुलाई 2017 को 16 साल की गुड़िया जब स्कूल से वापस आ रही थी तभी उसका अपहरण कर उसके साथ बलात्कार किया गया था. फिर बलात्कार के बाद मासूम गुड़िया की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी, जिसके बाद हत्यारे ने उसके मृत शरीर को जंगल में फेंक दिया था. 7 जुलाई 2017 को गुड़िया का शव कोटखाई के जंगल से बरामद हुआ था. मामले की जांच एक-दो दिन बाद ही स्थानीय पुलिस से लेकर हिमाचल पुलिस की स्टेट एसआईटी के हवाले कर दी गई थी.
पोस्टमार्टम और फोरेंसिक जांच से खुलास हो चुका था कि हत्या से पहले उसके साथ रेप किया गया था. इस मामले को लेकर पुलिस पर खासा दबाव था. इस केस में एसआईटी ने आशीष चौहान, राजेंद्र सिंह, सुभाष, लोकजन, दीपक और सूरज सिंह को अरेस्ट किया था. मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई. सीबीआई ने शिमला पुलिस द्वारा पकड़े गए आरोपियों को मुजरिम नहीं माना था और अपनी जांच नए सिरे से शुरू की थी. इसके बाद 8 अगस्त 2017 को हिमाचल पुलिस के आईजी समेत आठ पुलिस वालों को गिरफ्तार किया गया था. पुलिस पर 18 अगस्त की रात एक आरोपी सूरज को हिरासत में ले कर पीट-पीटकर मारने का आरोप था. इसी मामले में जैदी को निलंबित किया गया था.