हिमाचल प्रदेश के ऊना में खाद्य सुरक्षा मानकों की गंभीर अनदेखी सामने आई है. ऊना जिले में खाद्य विभाग द्वारा लिए गए 17 सैंपल में से तीन की रिपोर्ट आई है, जिसमें दो सैंपल अमानक और एक मिस-ब्रांडेड पाया गया. ऊना में गोलगप्पे के पानी में रंग की मिलावट पाई गई, जो नियमों के खिलाफ है. साथ ही, रेडी-टू-सर्व कॉफी को भी अमानक घोषित किया गया है. सरसों के तेल का सैंपल मिस-ब्रांडेड निकला, जिसका मतलब है कि उसमें मिलावट थी.
हमीरपुर के बाबा बालक नाथ मंदिर के प्रसाद के रूप में बेचे जा रहे रोट पहले ही असुरक्षित पाए गए थे. मंदिर प्रबंधन ने उस दुकान को बंद कर दिया है और जल्द ही इसे आउटसोर्स करने की योजना है. खाद्य सुरक्षा और मानक विंग के सहायक निदेशक जगदीश धीमान ने बताया कि गोलगप्पे के पानी और कॉफी के सैंपल अमानक पाए गए हैं और सरसों के तेल में मिलावट मिली. इस पर कार्रवाई की जा रही है.
खाद्य सुरक्षा मानकों की गंभीर अनदेखी सामने आई
राज्य सरकार ने स्वास्थ्य विभाग को कड़े निर्देश दिए हैं कि बाजार में केवल गुणवत्ता युक्त खाद्य उत्पादों की बिक्री सुनिश्चित की जाए. खाद्य मानकों का उल्लंघन करने वालों पर कानूनी कार्रवाई होगी. बात दें, हिमाचल के हमीरपुर जिले के दियोटसिद्ध में बाबा बालकनाथ मंदिर ट्रस्ट की दुकान पर प्रसाद के रूम में बेचे जाने वाले रोट के नमूने जांच में खाने लायक नहीं पाए गए.
प्रसाद के तौर रोट भी खाने लायक नहीं
प्रसाद के रूप में रोट बनाने के लिए गेहूं के आटे, चीनी और देसी घी या वनस्पति तेल का इस्तेमाल किया जाता है. हर साल लगभग 50 से 75 लाख भक्त बाबा बालक नाथ के प्राचीन गुफा मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचते हैं. वो बाबा बालकनाथ को प्रसाद के रूप में रोट, मिठाइयां और अन्य चीजें चढ़ाते हैं.